Friday, 29 June 2018

उड़ता हिंदोस्तान-3 : दोस्तों के साथ PARTY के दौरान 2 दिन DRUGS माफिया के साथ


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देश भर में फैले ड्रग्स माफिया से जुड़ी कहानियां पिछले दो दिनों में पढ़ने के बाद आज यानी शुक्रवार को पढ़िए हिमाचल प्रदेश और बिहार से दो कहानियां.उड़ता हिंदोस्तान-2 : ड्रग्स के धंधे में मरीज़, बच्चे, नौजवान होते हैं पैडलर


उड़ता हिंदुस्तान: हर इंजेक्शन में बंद है एक चुभती हुई कहानी


हिमाचल प्रदेश ड्रग्स की जन्नत के नाम से भी नशे के शौकीनों के बीच जाना जाता है और कई टूरिस्ट यहां अच्छी क्वालिटी की ड्रग्स के आकर्षण में आते हैं. दूसरी तरफ, बिहार में ड्रग्स का कारोबार अपनी जड़ें जमा रहा है और साल दर साल यहां हालात बिगड़ते जा रहे हैं. इन दो कहानियों के ज़रिये इन दो राज्यों में ड्रग्स का सच.हिमाचल गए दिल्ली के एक टूरिस्ट की आपबीती


पहाड़ों और कुदरत की गोद में कुछ शांति और सुकून खोजने मैं हिमाचल गया था. अपनी तलाश से पहले यहां मैं अपने एक पुराने दोस्त से मिला और उसके साथ उसके दो हिमाचली दोस्त भी थे आस्था और निशित. कुछ ही देर में माहौल दोस्ती से गर्म हो गया और हमने एक जॉइंट साथ में लिया. इस दौरान हम चारों आपस में हेल्दी डायट और अपने हेल्दी रूटीन के बारे में बात करते रहे.


इस मुलाकात के दौरान हम सभी उन इलाकों की सैर के अनुभव बांट रहे थे जो पिछले समय में हमने हासिल किए थे. इस बातचीत ने एक घुमाव लिया और बातों-बातों में मैं इस फैसले पर आ गया कि मैंने अपने दिल्ली लौटने के बस के टिकट कैंसल करवा दिए और उनकी कार से कासोल जाने का प्रोग्राम बन गया. कासोल में एक बेहतरीन पार्टी के बाद मैं अपने दोस्तों को अच्छी तरह गुडबाय कहना चाहता था.


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अब हम कासोल में थे और पूरी तरह खास पार्टी के मूड में. इससे पहले हम शराब और जॉइंट का नशा कर चुके थे. लेकिन मैं पूरी तरह डूब जाने के जोश में था. इस पार्टी के लिए आस्था और निशित के पास कुछ खास इंतज़ाम था जिसके लालच में ही मैंने कासोल की पार्टी के लिए प्रोग्राम बना लिया था. इस पार्टी में हम चारों के अलावा और भी लोगों ने हमें जॉइन किया जो आस्था और निशित के सर्कल में थे.


अब निशित ने इस पार्टी का खास आइटम निकाला और मुझे एमडीएमए यानी एक्सटेसी आॅफर किया. आस्था और निशित इस पार्टी से बेहद खुश थे और मुझ पर उनका विशेष ध्यान था. निशित ने एक्सटेसी के बारे में कुछ ज्ञान देकर मुझसे यह लेने को कहा. एक्सटेसी लेते ही जैसे मैं हवा में उड़ने लगा था. किसी रॉकेट से भी ज़्यादा तेज़ उड़ान थी मेरी और एक उन्माद सा मुझ पर हावी होने लगा था. मैंने पहले भी एक बार यह ट्राय किया था और मुझे अच्छा लगा था लेकिन यह क्वालिटी अलग थी और यह बहुत तेज़ था.


सूरज डूब चुका था और रात के उन तमाम किस्सों के लिए मेरे साथ सभी बेकरार थे जो सामने आने वाले थे. एक कैफे में डिनर के बाद हम चारों और निशित के कुछ और खास दोस्तों के बीच खास पार्टी शुरू होने वाली थी. कुछ लोग डांस कर रहे थे और सब नशे में थे. तभी निशित ने एक ज्वैलरी बॉक्स खोला जिसमें कई तरह की ड्रग्स थीं. इन ड्रग्स के लिए सभी बेताब थे. इन दोस्तों में एक इज़राइली औरत भी थी जो मुझ जैसे कम उम्र के लड़कों के साथ ज़्यादा फ्रेंडली थी.


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इस इज़राइली ने निशित को ड्रग्स के लिए पटाया तो निशित ने उसे एक्सटेसी दिया बजाय और कीमती ड्रग्स के. मैं इतने सुरूर में आ चुका था कि मुझे किसी बात पर कोई शक नहीं हो रहा था बल्कि यही लग रहा था कि सब दोस्त आपस में पार्टी कर रहे हैं. मुझे उस वक्त यह भी नहीं समझ आया कि मेरी दोस्त आस्था तो निशित को बेहतर जानती थी कि वह अस्ल में कौन है. उस इज़राइली औरत को फिर निशित ने कोकीन भी दिया था. इसके बाद रात फैलती गई और मैं नशे में कब सो गया, पता ही नहीं चला.


सुबह उठकर ड्रग्स के इस नशे के कारण मेरा सिर भारी था और पेट में कुछ तकलीफ थी. इसका हालिया इलाज करते हुए हम चारों मीलों दूर कटागला के लिए निकल गए. उस सफर की यादें सब धुंधली हैं क्योंकि मैं हैंगओवर में था. इसके बाद मैं अपने सफर पर चला गया और निशित जैसे अजनबी दोस्त से मिलने की अच्छी यादें मेरे ज़हन में रहीं. वह खुशमिज़ाज था, मीठा बोलता था और बहुत खयाल रखता था. उसने रास्ते के लिए मुझे खाना और फल पैक करवाकर दिए थे.


मुझे लग रहा था कि वह दोस्तों की मेहमाननवाज़ी के लिए ड्रग्स का इंतज़ाम कर रहा था. मुझे अब सब कुछ समझ आया और मैंने अपनी मूर्खता के लिए खुद को डांटा भी और मन ही मन संतोष किया कि मैं उसका पैडलर या साथी होने से बच गया.


कुल्लू वैली, मनाली जैसे और भी स्थान ड्रग्स के लिए जाने जाते हैं लेकिन हिमाचल के कासोल और मलाना दो कस्बे ड्रग्स के कारोबार के लिए खास तौर से कुख्यात हैं और इनकी गूंज विदेशों तक है. कई विदेशी यहां सिर्फ ड्रग्स के लिए ही आते हैं और यह भी एक सच है कि हिमाचल के ड्रग्स कारोबार के संचालन में कई विदेशी जुड़े हुए हैं. इज़राइली बहुत बड़ी संख्या में इस कारोबार में शामिल हैं. एक फैक्ट यह है कि यहां के कई लोकल लोग इज़राइल की भाषा हिब्रू पढ़ना और बोलना तक सीख चुके हैं.


28 परिवारों को ड्रग एडिक्ट बनाने वाले मियां-बीवी


कैमूर के रहने वाले पति पत्नी शिवाजी और हीरा ने तब एक स्कीम रची जब उनके हाथ ड्रग्स लग गई. किसी और शहर से एक परिचित से दोनों को ड्रग्स हासिल करने का रास्ता मिल चुका था लेकिन बिहार के इस पिछड़े इलाके में इसे खपाया कैसे जाए, इसके लिए उन्होंने एक साज़िश रची. ज़िले में काम करने वाले मज़दूरों में से एक परिवार उनके घर कामकाज के लिए आता था. शिवाजी और हीरा ने इस मज़दूर परिवार पर पहला प्रयोग करने का मन बनाया.


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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़े.

परिवार की महिला को हीरा और पुरुष व नाबालिग बच्चों को शिवाजी ने अलग अलग रोगों के इलाज के बहानों से ड्रग्स के इंजेक्शन देना शुरू किए. धीरे—धीरे इन सबको इन इंजेक्शनों की आदत लग गई और हीरा व शिवाजी को समझ आ गया कि प्रयोग कामयाब रहा. अब इन दोनों ने इस परिवार के परिचय का इस्तेमाल करते हुए और भी मज़दूर परिवारों को निशाना बनाया. कभी शिवाजी और हीरा किसी मज़दूर के घर जाकर इंजेक्शन देते तो कभी उन्हें अपने घर बुलाकर.


कुछ ही महीनों में तकरीबन 28 ऐसे परिवार इस नशे के आदी हो चुके थे जो यही सोच रहे थे कि इलाज और दवाई का चक्कर है. अब इन इंजेक्शनों की कीमत वसूलने का सिलसिला शुरू हुआ. बिन इंजेक्शन के ये लोग बेचैन रहते थे इसलिए इंजेक्शन लेना इनकी मजबूरी था. इन इंजेक्शनों की कीमत चुकाने के चक्कर में अगले कुछ ही महीनों में इन परिवारों का सब कुछ बिक चुका था. अब इनके पास कोई कीमत नहीं थी अदा करने को लेकिन इंजेक्शन लेना मजबूरी थी.


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हीरा और शिवाजी ने रास्ता निकाला और इन सबको दिहाड़ी मज़दूरी पर लगाया. तय यह हुआ कि रोज़ जितना कमाकर लाएंगे, वो रकम हीरा और शिवाजी को देंगे और इसके बदले उन्हें इंजेक्शन और ज़रूरी भोजन मिलेगा. धीरे—धीरे आलम यह था कि 28 परिवार ड्रग्स के आदी हो चुके थे और ये पति पत्नी इन सबको अपने गुलामों के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे. अब इंजेक्शन लगाने के ठिकाने कुछ गुप्त हो चुके थे ताकि यह खबर हीरा और शिवाजी के लिए मुसीबत न बन जाए.


ड्रग्स के आदी हो चुके इन परिवारों के कुछ लोगों की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उन्हें ज़रूरी प्राकृतिक काम करने के लिए भी इंजेक्शन चाहिए होता था. कुछ को इंजेक्शन गुप्तांगों में लगाना मजबूरी हो चुकी थी ताकि वो रोज़मर्रा के काम कर सकें. इस हालत में भी हीरा और शिवाजी अपना कारोबार चला रहे थे और इन परिवारों की मजबूरी को भुना रहे थे. अब हीरा और शिवाजी आगे की योजना बनाने की राह पर थे तभी एक दिन पुलिस ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर दबिश देकर दोनों को गिरफ्त में ले लिया.


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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़े.

साल 2013 में जब कैमूर ज़िले से शिवाजी केशरी और उसकी पत्नी हीरामणि को हिरासत में लिया तो इनके पास से मॉर्फीन और अफीम से बनी अन्य ड्रग्स का भारी स्टॉक बरामद किया गया. स्टॉक में रखी कई शीशियों पर दर्ज एक्सपायरी डेट भी काफी पहले निकल चुकी थी. बिहार में पिछले कुछ सालों से ड्रग्स का कारोबार जिस तेज़ी से जड़ें जमा रहा है, उसके आंकड़े हैरान करने वाले हैं. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जारी ये आंकड़े यह अंदेशा भी पैदा करते हैं कि बिहार देश का दूसरा पंजाब बनने की राह पर है. यहां छोटे—छोटे बच्चे और छोटी मोटी दुकानें तक ड्रग्स के कारोबार के केंद्र में आ चुके हैं.


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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/karobar/moodies-report-on-indian-economy-453313.html

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