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साल 2014 में सरकार बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों के मसलों को सबसे ऊपर रखा था. लेकिन अब खेती-किसानी से जुड़े सवालों पर ही विपक्ष सरकार को घेर रहा है. खासतौर पर बकाये को लेकर गन्ना किसानों के गुस्से को भुनाने की कोशिश जारी है. कांग्रेस ने एक ‘विश्वासघात’ बुकलेट जारी की है. जिसमें किसानों से जुड़ी परेशानियों को सबसे पहले जगह दी गई है. जाहिर है 2019 के लोकसभा चुनाव में किसान अहम होंगे. कांग्रेस और बीजेपी किसानों को अपने एजेंडे में ऊपर रख रहे हैं तो इसकी सियासी वजह ज्यादा है.देश में 9.2 करोड़ किसान परिवार हैं. इसका मतलब करीब 45 करोड़ लोग. वे लोग जो गांवों में रहते हैं और सबसे ज्यादा वोट करते हैं. माना जा रहा है कि इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और पंजाब के 150 किसानों से मुलाकात करने जा रहे हैं, ताकि उनकी समस्याओं को दूर करके नाराजगी कम की जा सके, विपक्ष को जवाब दिया जा सके.
गन्ना किसानों से मुलाकात करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को नमो ऐप के जरिए देशभर के किसानों से रूबरू हुए थे. आम किसानों से संवाद करने के बाद गन्ना किसानों पर फोकस करने की वजह क्या है. गन्ना किसान आखिर सरकार के लिए क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं?
क्या कैराना ने चेताया?
हाल ही में प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र पश्चिमी यूपी के कैराना में लोकसभा उप चुनाव संपन्न हुआ है. प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ ने गन्ना और जिन्ना दोनों मसलों को जरूरी बताया था. लेकिन जब परिणाम आया तो पता चला कि जिन्ना पर गन्ना भारी पड़ गया है. आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने ‘जिन्ना पर भारी गन्ना’ कहकर ये संदेश दिया कि किसानों की अनदेखी बीजेपी को भारी पड़ गई है. जयंत कहते हैं कि कैराना लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली मिलों पर ही 800 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है. गन्ना किसानों के बकाया की बात करें तो देश में करीब 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है.
हालांकि कैराना के चुनाव परिणाम के बाद सरकार ने चीनी मिलों की मदद के लिए 8,500 करोड़ रुपये का पैकज मंजूर किया था. पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों को साधने के लिए वहां के किसान नेता विजयपाल सिंह तोमर को बीजेपी ने राज्यसभा भेजा है. मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. लेकिन सरकार के 48 महीने पूरे होने पर जो रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया है, उसमें गन्ना किसानों का ज़िक्र नहीं है.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री कहते हैं कि मोदी सरकार पहले दिन से ही किसानों को लेकर संजीदा है. इसीलिए आय दोगुनी करने का लक्ष्य बनाकर हम लोग काम कर रहे हैं. किसानों से संवाद करके हम उनका हौसला बढ़ाना चाहते हैं. गन्ना किसानों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिल रहे हैं, उनकी समस्या पूछा रहे हैं तो इसमें किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए. कैराना की वजह से गन्ना किसानों को नहीं बुलाया गया है. हम किसानों के लिए काम कर रहे हैं, उनकी बेहतरी के लिए उन्हें बुला रहे हैं. लाल बहादुर शास्त्री के अलावा सिर्फ नरेंद्र मोदी इस तरह किसानों को बुलाकर मिल रहे हैं.
क्या है गन्ना किसानों की हालत?

बीते कुछ वर्षों में गन्ना उत्पादन पर नज़र डाली जाए तो इसने हर साल नया रिकॉर्ड बनाया है. साल 2015-16 मे चीनी मिलों ने 645.66 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि साल 2016-17 में 827.16 लाख टन और साल 2017-18 में ये बढ़कर 1,100 लाख टन हो जाने का अनुमान है. कांग्रेस नेता राजीव त्यागी के दावों को मानें तो देश भर में चीनी मिलों पर किसानों का बकाया बढ़कर 23000 करोड़ रुपये पहुंच गया है. हालांकि संसद में दिए एक जवाब के मुताबिक 31 जनवरी तक ये बकाया 16520 करोड़ रुपये था. उस दौरान अकेले उत्तर प्रदेश के किसानों का 6078 करोड़ से ज्यादा रुपया बकाया था.
संसद में दी सरकार की जानकारी के मुताबिक, जनवरी तक महाराष्ट्र के गन्ना किसानों का 2874 करोड़, कर्नाटक के किसानों का 2758 करोड़, तमिलनाडु के किसानों का 1855 करोड़ और पंजाब-हरियाणा-गुजरात के किसानों का करीब 500-500 करोड़ रुपये बकाया था. आपको बता दें कि इन सभी राज्यों में ये गन्ना पेराई का सीजन है, इसलिए बीते तीन महीनों में इन आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई होगी.
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक, देश में सबसे ज्यादा 159 चीनी मिलें महाराष्ट्र में हैं. महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में 119 और कर्नाटक में 61 मिलें सक्रिय हैं. देश में सर्वाधिक 288 मिलें निजी क्षेत्र की, 214 मिलें सहकारिता क्षेत्र की और 11 मिलें सार्वजनिक क्षेत्र की हैं.
कितना हुआ भुगतान?
हालांकि यूपी के ऊर्जा मंत्री और योगी सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा बताते हैं कि सरकार ने अभी तक 21,978 करोड़ रुपये का भुगतान इस साल किसानों को कर दिया है. उन्होंने पिछली सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमें ये गन्ना किसानों के बकाया वाली दिक्कत विरासत में मिली है. उन्होंने दावा किया कि यूपी सरकार ने फरवरी 2018 तक का किसानों का बकाया चुका दिया है और बाकी बचे हुए 10 हज़ार करोड़ को चुकाने के लिए भी मैकेनिज्म तैयार किया जा रहा है. श्रीकांत ने कहा कि गन्ना किसानों का भुगतान हमारी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी के अचानक घटे दामों से ये चुनौती और भी मुश्किल हो गई है.
कहां गया 14 दिन का वादा?
यूपी सरकार ने सत्ता में आने पर गन्ना किसानों से वादा किया था कि 14 दिन के अन्दर किसानों के बकाया का भुगतान कर दिया जाएगा. मतलब कि किसान जिस दिन मिल को गन्ना देंगे उसके 14 दिन के अन्दर भुगतान की पर्ची किसान को दे दी जाएगी. हालांकि खुद यूपी सरकार ने जो आंकड़ें जारी किए हैं वो कुछ और ही बयान कर रहे हैं.
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