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केरल पुलिस ने पांच पादरियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच जांच के आदेश दिए हैं. इन पर एक महिला के कंफेशन को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसका यौन शोषण करने का आरोप है. महिला के पति ने मामला दर्ज कराया था. मामले की जांच के लिए डीवाईएसपी साबू पी मैथ्यू के नेतृत्व में टीम बनाई गई है. बता दें कि मीडिया में खबर आने के बाद जांच का काफी दबाव बढ़ गया था जिसके बाद मलंकारा ऑर्थोडेक्स चर्च को अंदरूनी जांच के लिए मजबूर होना पड़ा था.चर्च प्रशासन ने गुप्त रूप से मामले से निपटने का प्रयास भी किया था. लेकिन राष्ट्रीय महिला आयोग के संज्ञान लेने के बाद मामला उसके हाथ से निकल गया. आयोग ने राज्य के डीजीपी लोकनाथ बेहरा को मामले की जांच के लिए कहा था. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी जवाब मांगा था.
इस मामले को लेकर राज्य के राजनेताओं ने चुप्पी साध रखी है, हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने जांच की मांग की है. उन्होंने बेहरा को पत्र लिखकर कहा कि चर्च का अंदरूनी जांच कराना अनुचित है क्योंकि यह निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच नहीं होगी. बता दें कि यह मामला फरवरी में सामने आया था.
महिला के पति को अपने बैंक खाते में कुछ गड़बड़ नजर आई. इस पर उसने पत्नी से पूछा तो पता चला कि तीन पादरियों ने उसके कंफेशन का खुलासा करने की धमकी देकर उसका यौन शोषण किया. बता दें कि चर्च में किए जाने वाले इस तरह के कंफेशन को बिल्कुल गुप्त रखा जाता है. चर्च में मई में शिकायत दर्ज कराई गई और इसके बाद आरोपी पादरियों को अस्थायी रूप से उनकी चर्च ड्यूटी से हटा दिया गया.महिला के पति की मांग थी कि आरोपी पांचों पादरियों को उनके पदों से हटा दिया जाए. उसका कहना था कि पहले पादरी ने उसकी पत्नी का कंफेशन सुनने के बाद ब्लैकमेल कर उसका यौन शोषण किया. महिला ने शादी से पहले के संबंध को कबूल किया था जिसे सुनकर पादरी ने उसे धमकाया कि यदि उसने सहयोग नहीं किया तो वह इस बात को उसके पति को बता देगा. उसने महिला की तस्वीरें भी ले ली और उन्हें दूसरे पादरी के साथ भी साझा किया.
इसके बाद तो पांच से आठ पादरियों से महिला के साथ संबंध बना लिए. महिला के पति ने मामले के सारे दस्तावेज चर्च को भी सौंपे. इस बीच महिला ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई थी.
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