Friday, 30 November 2018

जॉब की है तलाश तो 19 दिसंबर को यहां दीजिए इंटरव्यू


READ MORE

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने लेजर साइंस एंड टेक्नॉलजी सेंटर में जूनियर रिसर्च फेलो की भर्तियों के लिए आवेदन मंगाए हैं. 12 पदों पर ये भर्तियां लेजर, फोटोनिक्स और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के लिए हैं. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 19 और 20 दिसंबर को सुबह 9:30 पर डीआरडीओ के ऑफिस में इंटरव्यू के लिए आ सकते हैं. ये इंटरव्यू 11:30 तक चलेगा. चयनित उम्मीदवारों को 3 साल का फेलोशिप ग्रांट किया जाएगा जिसे सरकारी नियमों के मुताबिक आगे बढ़ाया जा सकता है.ये भी पढ़ें- NHAI में युवाओं के लिए नौकरी का मौका, 60 हजार रुपए होगी सैलरी


पदों का विवरण-
फिजिक्स- 7 पदइलेक्ट्रॉनिक्स- 5 पद


योग्यता-
– फिजिक्स जेआरएफ के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास यूजीसी नेट क्वालिफिकेशन के साथ फर्स्ट डिविजन में बेसिक साइंस में पोस्टग्रेजुएट डिग्री होनी चाहिए. या ग्रेजुएशन/पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर फर्स्ट डिविजन के साथ एमई/एमटेक की डिग्री होनी चाहिए.- इलेक्ट्रॉनिक जेआरएफ के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास नेट/गेट क्वालिफिकेशन के साथ बीई/बीटेक में फर्स्ट डिविजन होना चाहिए. या ग्रेजुएशन/पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर फर्स्ट डिविजन के साथ एमई/एमटेक की डिग्री होनी चाहिए.


ये भी पढ़ें- रेलवे में फिर आई नौकरियों की बहार, दसवीं पास इस डेट तक कर सकते हैं अप्लाई


आयु सीमा-
दोनों जेआरएफ के लिए 31 दिसंबर को उम्मीदवार की अधिकतम आयु सीमा 28 साल होनी चाहिए. ओबीसी उम्मीदवारों को 3 साल और एससी/एसटी उम्मीदवारों को 5 साल की छूट दी जाएगी.


पे स्केल-
पहले 2 साल के लिए 25,000 रुपए. अगले साल SRF द्वारा अपग्रेड किया जाए तो तीसरे साल 28,000 रुपए


ये भी पढ़ें- बिहार के इस सरकारी विभाग में नौकरी पाने का मौका, 50 हजार रुपए तक मिलेगी सैलरी


ये डॉक्यूमेंट्स होंगे जरूरी-
खुद से लिखा या टाइप किया हुआ एप्लीकेशन जिसमें नाम, जन्मतिथि, एड्रेस हो. इसके अलावा आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र (अगर जरूरी हो), शैक्षणिक सर्टिफिकेट, मार्क्स के परसेंटेज, गेट/ नेट का स्कोर कार्ड अपने साथ जरूर लाएं. सभी डॉक्यूमेंट्स को सेल्फ अटेस्ट भी कर लें. इसके अलावा ओरिजनल सर्टिफिकेट भी साथ लाएं.


सरकारी नौकरियों की दूसरी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


Article source: https://www.jagran.com/haryana/panipat-18243350.html

एक रुपए के नोट क्यों जारी नहीं करता रिजर्व बैंक? जानें सबसे छोटे नोट की बड़ी कहानी


READ MORE

पूरी दुनिया पहले विश्वयुद्ध की आग में झुलस रही थी. तब भारत के रुपए-पैसे औपनिवेशिक सरकार यानी ब्रिटिश सरकार के यहां छपा करते थे. चूंकि लड़ाई की वजह से सिक्के ढालने वाले टकसालों की क्षमता सीमित हो चुकी थी, लिहाजा ब्रिटिश सरकार ने एक रुपए का नोट निकाला. 30 नवंबर 1917 को इंग्लैंड से छपकर आया ये नीले रंग का नोट जल्द ही भारतीय बाजार पर छा गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का ये सबसे नन्हा नोट आरबीआई नहीं, बल्कि भारत सरकार की ओर से जारी होता है. इस एक रुपए के नोट के अलावा दूसरे सभी नोटों पर आरबीआई गर्वनर के दस्तखत होते हैं. ये नोट दूसरे नोटों से अलग है, साथ ही इसके कई दिलचस्प पहलू भी हैं जो इसे दूसरे नोट से अलग बनाते हैं.जब थप्पड़ के बदले शास्त्री जी ने चपरासी को लगा लिया था गले!


हमारे देश में रुपए-पैसों की टकसाल का एकमात्र अधिकार आरबीआई के पास है. एक रुपए के नोट के अलावा बाकी सबपर आरबीआई गर्वनर के हस्ताक्षर होते हैं, वहीं एक रुपए के नोट वित्त मंत्रालय द्वारा जारी होता है और इसपर वित्त सचिव के दस्तखत होते हैं. इसकी एक बड़ी वजह ये है कि आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 24 के अनुसार आरबीआई को एक रुपये के बैंक नोट जारी करने का अधिकार नहीं है. चूंकि नोट के अलावा ये सिक्कों के रूप में भी बाजार में है, लिहाजा इसे लाएबिलिटी माना जाता है और मैं धारक को … अदा करने का वचन देता हूं, नहीं लिखा रहता है.



फोटो, सौजन्य- मिंटेज वर्ल्ड

एक रुपए के नोट के 101 सालों के इतिहास में इन पर दो बार रोक लगी. सबसे पहले साल 1926 में लागत संबंधी वजहों से इस नोट पर रोक लगाई गई, बाद में 1940 में नोट दोबारा बनने लगे जो 1994 में एक बार फिर से बंद कर दिए गए. इसके बाद 2015 से नोटों की छपाई फिर से शुरू हो गई. हालांकि दो बार नोट बनने पर रोक लगने के बाद भी इनका अस्तित्व खत्म नहीं हुआ और ये हमेशा वैध रहे.


वोटर आईडी पर गलत नाम-तस्वीर आ जाए या पता बदल जाए तो ऐसे कराएं सही


आजादी के बाद नोट से जॉर्ज पंचम की तस्वीर हटाकर अशोक स्तंभ प्रिंट किया जाने लगा. कहा जाता है कि पहले भारत सरकार ने इसपर गांधीजी की तस्वीर चित्रित करनी चाही, लेकिन कुछ वजहों से ऐसा संभव नहीं हो सका. नोट पर उस वक्त के वित्त सचिव के दस्तखत थे.



एक रुपए का नोट

एक रुपए के नोट छापने का अधिकार भारत सरकार को कॉइनेज एक्ट के तहत मिला हुआ है. इस एक्ट के तहत केवल एक रुपए के नोट छापने का अधिकार वित्त मंत्रालय को है, लेकिन इस नोट और सिक्कों का बाजार में सर्कुलेशन आरबीआई के तहत ही आता है. इस एक्ट में हालांकि वक्त-वक्त पर कई बदलाव होते रहे हैं. एक रुपए के नोट पर आरबीआई के गर्वनर की बजाए वित्त सचिव का साइन होता है, साथ ही इसपर सिल्वर लाइन भी नहीं होती है, जो कि बाकी सभी नोटों में होती है.


दस काम जिसे इंसान चुटकियों में कर सकते हैं लेकिन रोबोट हो जाते हैं फेल


नोट के रंग में भी लगातार बदलाव हुए, जैसे पहला इसका रंग हरा था जो 1951 में तब के वित्त सचिव के जी अंबेगांवकर के कार्यकाल में नीला-बैंगनी सा हो गया. फिर 1966 में एस भूतलिंगम के दौरान नोट का साइज और छोटा हो गया. माना जाता है कि एक रुपए का नोट एकमात्र ऐसी करंसी है, जिसके रंग आकार और दस्तखत में बहुत बार बदलाव हुए. 30 नवंबर साल 2017 में एक रुपए के नोट के 100 साल पूरे होने पर नोट के संक्षिप्त इतिहास के साथ एक कार्ड भी जारी हुआ.


सिखों के लिए क्या है कृपाण की अहमियत?


Article source: https://www.jagran.com/haryana/panipat-18243350.html

राम मंदिर को लेकर RSS की आज से नई मुहिम, 9 दिन तक निकालेगी रथ यात्रा


READ MORE

लोकसभा चुनाव के नज़दीक आते ही राम मंदिर को लेकर सियासत गर्मायी हुई है. अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनाने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) शनिवार से रथ यात्रा निकालने जा रही है. इसकी शुरुआत दिल्ली से होगी. राम मंदिर के लिए जन समर्थन जुटाने के लिए यह यात्रा 1 दिसंबर से 9 दिसंबर तक पूरी दिल्ली में निकाली जा रही है.इस रथ यात्रा को ‘संकल्प रथ यात्रा’ नाम दिया गया है. इसके आयोजन की जिम्मेदारी इस बार स्वदेशी जागरण मंच को दी गई है, जो आरएसएस का ही एक संगठन है. इस यात्रा की शुरुआत संघ के प्रांत संघचालक कुलभूषण आहूजा झंडेवालान मंदिर से करेंगे.


जब अयोध्या में राममंदिर बनाने को कांग्रेस लाई थी अध्यादेश और बीजेपी ने किया था विरोध


विश्व हिंदू परिषद पहले से ही पूरे देश में जन समर्थन जुटाने में लगा हुआ है. वीएचपी ने बीते शनिवार (25 नवंबर) को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए धर्मसभा की थी. जिसमें देशभर से साधु-संतों का जमावड़ा लगा था. शिवसेना ने भी इसी पर अलग से कार्यक्रम किया था. शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंदिर को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि अगर राम मंदिर नहीं बना तो दोबारा बीजेपी सरकार नहीं आएगी.



रथ यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी इस बार स्वदेशी जागरण मंच को दी गई है.

आरएसएस ने की थी धर्मसभा
वहीं, आरएसएस ने भी 25 नवंबर को ही नागपुर स्थित अपने हेडक्वार्टर में धर्मसभा की थी. धर्मसभा को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि लटकाना बहुत हुआ, अब लड़ना है. राम मंदिर बनाकर रहेंगे. उन्होंने कहा था, ‘एक साल पहले मैंने स्वयं कहा था कि धैर्य रखें. अब मैं ही कह रहा हूं कि धैर्य से काम नहीं होगा. अब हमें लोगों को एकजुट करने की जरूरत है. अब हमें कानून की मांग करनी चाहिए.”आतंकी मसूद अजहर की धमकी- अयोध्या में राम मंदिर बना तो दिल्ली से काबुल तक मचेगी तबाही


अध्यादेश लाने की हो रही मांग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वीएचपी और संत समाज की ओर से लगातार मोदी सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है कि सरकार तुरंत कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण करें. सरकार से मांग की जा रही है कि अध्यादेश लाकर या कानून बनाकर इसका हल निकाला जाए.


1992 में निकली थी पहली रथ यात्रा
बता दें कि 1992 में आरएसएस ने बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में एक देशव्यापी रथ यात्रा निकाली थी. इस रथ यात्रा ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए बड़े आंदोलन किए थे. वहीं, इस आंदोलन के बाद देशभर में सांप्रदायिक झड़प की घटनाएं हुईं. 6 दिसंबर 1992 को कारसेवको ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया था. अयोध्या का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. कोर्ट ने अभी तक सुनवाई को कोई तय तारीख तय नहीं की है.


Article source: https://www.jagran.com/haryana/panipat-18243350.html

OPINION: 'हनुमान' विवाद- ये है योगी आदित्यनाथ और गोरखनाथ मठ के दलित प्रेम की पूरी कहानी!


READ MORE

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान एक सभा में हनुमान जी को दलित क्या कहा, देश भर में विवाद शुरू हो गया. कहीं ब्राह्मण उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, तो कहीं दलित संगठन हनुमान मंदिरों पर अपना दावा ठोक रहे हैं. दरअसल, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का दलितों से ‘पुराना रिश्ता’ है! योगी का दलित प्रेम दिल से है या सिर्फ दिखावा? इसकी एक बानगी देखिए. आपको शायद ही इस बात की जानकारी हो कि गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान मुख्य पुजारी कमलनाथ भी दलित हैं. योगी के बाद वो मंदिर का सबसे अहम चेहरा हैं.



ये भी पढ़ें (अयोध्या: राम मंदिर आंदोलन से क्या है योगी आदित्यनाथ के मठ का कनेक्शन?)



आदित्यनाथ ही नहीं उनके गुरु अवैद्यनाथ भी दलितों और वनवासियों का मुखर समर्थक रहे थे. नाथ परंपरा के तहत योगी और उनका मठ लंबे समय से छुआछूत के खिलाफ काम कर रहे हैं. सीएम बनने के बाद उन्होंने दलित के घर खाना खाने का अभियान चलाया और इसमें पार्टी की यूपी विंग को शामिल कराया. सीएम बनने से पहले भी योगी समाज में समरसता के लिए दलितों के बीच जाकर भोजन करते रहे हैं, ताकि हिंदू विभाजित न हो.


 Lord Hanuman,हनुमान जी, yogi adityanath, up cm Yogi Adityanath, 2019 lok sabha election, bjp, dalit politics, gorakhnath mandir, गोरखनाथ मंदिर, Gorakhnath Math, Mahant Avaidyanath,महंत अवैद्यनाथ, भगवान हनुमान, हनुमान जी, योगी आदित्यनाथ, दलित राजनीति, बीजेपी, गोरखनाथ मंदिर, गोरखनाथ मठ, महंत अवैद्यनाथ, dalit pujari, दलित पुजारी         सीएम बनने से पहले समरसता भोज में योगी (file photo)


‘अस्पृश्यता हिंदू समाज का अभिशाप है. धर्मशास्त्रों में इसके लिए कोई स्थान नहीं….’ ये लाइनें किसी दलित नेता की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के उस मठ की दी हुई हैं जिसके वो पीठाधीश्वर भी हैं. उनकी कट्टर छवि तले यह बात छिप जाती है.



ये भी पढ़ें (कौन हैं वे जिनके साथ एक दशक से दीपावली मनाते हैं CM योगी आदित्यनाथ?)



गोरखनाथ मंदिर उन मंदिरों की विचारधारा से अलग है, जहां दलितों का प्रवेश वर्जित होता है. इस मंदिर की ओर से जात-पात के खिलाफ लंबे समय से अभियान चलाया जा रहा है. संभव है कि हनुमान जी को आदिवासी और दलित बताने वाला योगी का ये दांव दलितों का वोट लेने के लिए हो. संभव है कि इस कदम का कोई राजनीतिशास्त्र हो.


योगी को बहुत नजदीक से जानने वाले गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार टीपी शाही कहते हैं, ‘गोरखनाथ पीठ की परंपरा के अनुसार योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक जनजागरण का अभियान चलाया. सहभोज के माध्यम से छुआछूत (अस्पृश्यता) पर प्रहार किया. इसलिए उनके साथ बड़ी संख्‍या में दलित भी जुड़े हुए हैं. गांव-गांव में सहभोज के माध्यम से ‘एक साथ बैठें-एक साथ खाएं’ मंत्र का उन्होंने उद्घोष किया.”



शाही बताते हैं, “गोरखनाथ मठ के मुख्य पुजारी कमलनाथ दलित चेहरा हैं. योगी के बाद सारा कामकाज वही संभालते हैं. आदित्‍यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने दक्षिण भारत के मंदिरों में दलितों के प्रवेश को लेकर संघर्ष किया. जून 1993 में पटना के महावीर मंदिर में उन्‍होंने दलित संत सूर्यवंशी दास का अभिषेक कर पुजारी नियुक्‍त किया.”


 Lord Hanuman,हनुमान जी, yogi adityanath, up cm Yogi Adityanath, 2019 lok sabha election, bjp, dalit politics, gorakhnath mandir, गोरखनाथ मंदिर, Gorakhnath Math, Mahant Avaidyanath,महंत अवैद्यनाथ, भगवान हनुमान, हनुमान जी, योगी आदित्यनाथ, दलित राजनीति, बीजेपी, गोरखनाथ मंदिर, गोरखनाथ मठ, महंत अवैद्यनाथ, dalit pujari, दलित पुजारी          सीएम बनने से पहले समरसता भोज में योगी (file photo)


शाही के मुताबिक “इस पर विवाद भी हुआ लेकिन वे अड़े रहे. यही नहीं इसके बाद बनारस के डोम राजा ने उन्‍हें अपने घर खाने का चैलेंज दिया तो उन्‍होंने उनके घर पर जाकर संतों के साथ खाना भी खाया.”



गोरखनाथ मंदिर का मत है कि “हरिजन भी हिंदू समाज के उसी उसी तरह से अभिन्न अंग हैं जिस तरह क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य, जैन, बौद्ध, सिख, आर्यसमाजी अथवा सनातनी लोग हैं. उनके प्रति समाज में उत्पन्न भेदभाव की भावना चाहे वह धार्मिक हो या सामाजिक, राजनीतिक हो अथवा आर्थिक, समाप्त कर दी जानी चाहिए. शास्त्रों में इसके लिए कोई स्थान नहीं है. भूतकाल में इसकी वजह से काफी क्षति उठानी पड़ी है. अब हम इसे भविष्य में कदापि चालू रहने की आज्ञा नहीं दे सकते. यह हिंदू समाज के लिए आत्महत्या समान ही है.”



योगी आदित्यनाथ का वनटांगियों से भी खास लगाव है. सांसद रहते हुए योगी ने सड़क से संसद तक इनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी. इन्हें नागरिक अधिकार देने का मामला संसद में उठाया. ज्यादातर वनटांगिया दलित और पिछड़े वर्ग से हैं. योगी 11 साल से उन्हीं के साथ दीपावली मनाते हैं.


 Lord Hanuman,हनुमान जी, yogi adityanath, up cm Yogi Adityanath, 2019 lok sabha election, bjp, dalit politics, gorakhnath mandir, गोरखनाथ मंदिर, Gorakhnath Math, Mahant Avaidyanath,महंत अवैद्यनाथ, भगवान हनुमान, हनुमान जी, योगी आदित्यनाथ, दलित राजनीति, बीजेपी, गोरखनाथ मंदिर, गोरखनाथ मठ, महंत अवैद्यनाथ, dalit pujari, दलित पुजारी         योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ (file photo)


राजनीति में क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं दलित
2011 की जनगणना के मुताबिक, देश में 16.63 फीसदी अनुसूचित जाति और 8.6 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं. 150 से ज्यादा संसदीय सीटों पर एससी/एसटी का प्रभाव माना जाता है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 46,859 गांव ऐसे हैं जहां दलितों की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है. 75,624 गांवों में उनकी आबादी 40 फीसदी से अधिक है. देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा की 84 सीटें एससी के लिए, जबकि 47 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं. विधानसभाओं में 607 सीटें एससी और 554 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं. इसलिए सबकी नजर दलित वोट बैंक पर लगी हुई है.



इसी वोटबैंक के भरोसे मायावती चार बार यूपी की सीएम बन चुकी हैं. रामविलास पासवान, उदित राज, रामदास अठावले जैसे दलित नेता उभरे हैं. चंद्रशेखर आजाद और जिग्नेश मेवाणी जैसे नए दलित क्षत्रप भी इसी संख्या की बदौलत पैदा हुए हैं.


Lord Hanuman,हनुमान जी, yogi adityanath, up cm Yogi Adityanath, 2019 lok sabha election, bjp, dalit politics, gorakhnath mandir, गोरखनाथ मंदिर, Gorakhnath Math, Mahant Avaidyanath,महंत अवैद्यनाथ, भगवान हनुमान, हनुमान जी, योगी आदित्यनाथ, दलित राजनीति, बीजेपी, गोरखनाथ मंदिर, गोरखनाथ मठ, महंत अवैद्यनाथ, dalit pujari, दलित पुजारी        वनटांगियाें के गांव में योगी आदित्यनाथ (file photo)


जहां तक राजस्थान की बात है तो यहां करीब 30 फीसदी वोटों के साथ अनुसूचित जाति-जनजाति समुदाय निर्णायक स्थिति में हैं. 1993 के बाद आरएसएस के सहयोगी संगठन वनवासी कल्याण आश्रम के जरिए बीजेपी ने अनुसूचित जाति-जनजाति आदिवासी इलाकों में अपनी जड़ें मजबूत की थीं, जिसका फायदा उसे लगातार चुनावों में होता रहा है. हालांकि, इस बार हालात बदले हुए हैं. अनुसूचित जाति जनजाति आरक्षण बचाओ आंदोलन के दौरान वसुंधरा सरकार का रवैया इनके नेताओं के प्रति काफी सख्त रहा.



ये भी पढ़ें: बीजेपी के ‘चाणक्य’ अमित शाह का कुछ ऐसा है सियासी सफर



योगी ही नहीं मायावती और अखिलेश यादव भी बदल चुके हैं इन शहरों के नाम



अयोध्या में ‘हिंदू कार्ड’ के सियासी इस्तेमाल की ये है कहानी!


Article source: https://www.jagran.com/haryana/panipat-18243350.html

चीन का ऐसा सेटेलाइट, जो पूरी दुनिया को फ्री में देने जा रहा है WiFi


READ MORE

चीन की एक तकनीकी कंपनी ने घोषणा की है कि वो साल 2026 तक पूरी दुनिया को फ्री वाईफाई देने लगेगी. इसकी शुरुआत अगले ही साल से हो जाएगी, जब मुफ्त का वाईफाई देने वाला पहला उपग्रह लॉन्च किया जाएगा. चीन की कंपनी लिंकश्योर के अनुसार इस योजना के तहत अगले आठ सालों में अंतरिक्ष में 272 उपग्रह होंगे जो यही काम सुनिश्चित करेंगे. इससे उन जगहों पर रहने वालों को फायदा मिल सकेगा, जहां टेलीकॉम कंपनियों का सेटअप नहीं हो सकता है, जैसे दुर्गम पहाड़ी या बर्फीले इलाके.जब 2.0 लिखा जाता है तो उसका क्या मतलब होता है?


यूनाइटेड नेशन्स द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2017 के अंत तक लगभग पौने चार मिलियन लोग ऐसे थे, जिन्हें इंटरनेट उपलब्ध नहीं था. भारत में तकनीकी बूम के बावजूद हालात काफी अच्छे नहीं हैं. वहीं चीन की नई घोषणा काफी राहत देने वाली है. चीन की एक तकनीकी कंपनी ने वादा किया है कि वो आने वाले आठ सालों में पूरी दुनिया के हर कोने में फ्री वाईफाई पहुंचाएगी.


जब थप्पड़ के बदले शास्त्री जी ने चपरासी को लगा लिया था गले!


चीन के सबसे बड़े अखबारों में से एक पीपुल्स डेली में इस आशय की एक खबर छपी है. इसे दिए एक इंटरव्यू में लिंकश्योर की सीईओ ने इस बारे में जानकारी दी. रिपोर्ट के अनुसार अगले साल चीन के पश्चिमोत्तर में स्थित गांसू प्रांत में स्थित जियुकान सेटेलाइट लॉन्च सेंटर से पहला उपग्रह लॉन्च किया जाएगा. अगले दो सालों में 10 उपग्रह होंगे जो कि आठ सालों यानी 2016 तक कुल 272 हो जाएंगे. इससे पूरी दुनिया के लोगों को मुफ्त में इंटरनेट मिल सकेगा


एक रुपए के नोट क्यों जारी नहीं करता रिजर्व बैंक, जानिए, सबसे छोटे नोट की बड़ी कहानीमुफ्त में वाई-फाई देने का वादा कर रही कंपनी लिंकश्योर की शुरुआत 2013 में शंघाई में हुई थी. जल्द ही इसने बाजार पर कब्जा जमा लिया. अब कंपनी अपनी नई महत्वाकांक्षी योजना पर तीन अरब यूआन यानी लगभग 43.14 करोड़ डॉलर का निवेश करने जा रही है. बता दें कि गूगल, स्पेसएक्स, वनवेब और टेलीसेट जैसी कंपनियों ने भी फ्री वाई-फाई के लिए सैटेलाइट की कई योजनाओं पर काम शुरू किया है, ऐसे में एशिया की ये एकमात्र कंपनी है जो स्थापित विदेशी कंपनियों को टक्कर देने की तैयारी कर रही है.



वोटर आईडी पर गलत नाम-तस्वीर आ जाए या पता बदल जाए तो ऐसे कराएं सही


कंपनी की वेबसाइट बताती है कि केवल चीन ही नहीं, बल्कि 223 देशों में इसके 9 सौ मिलियन से भी ज्यादा यूजर हैं. कंपनी की खासियत उसका वाईफाई मास्टर की नामक फीचर है. ये यूजर की लॉग इन डिटेल मांगे बिना भी उसे वाईफाई उपलब्ध करा पाता है. इसकी यही खूबी इसे तेजी से लोकप्रिय बना रही है. ऐसा अनुमान है कि इस योजना के कई फायदे हो सकेंगे. जैसे कि लोग वहां भी इंटरनेट चला सकेंगे, जहां पर मोबाइल नेटवर्क फेल हो जाता है. इससे मुश्किल हालातों में मदद ली-दी जा सकेगी. कई ऐसी जगहें हैं, जहां टेलीकॉम कंपनियों का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं लग पाता है, ऐसे में इस तरह का विकल्प बेहतरीन साबित हो सकता है.


Article source: https://www.jagran.com/haryana/panipat-18243350.html

Election Blog: राजस्थान में आज राहुल गांधी और अमित शाह की रैली, सिद्धू और योगी भी करेंगे प्रचार


READ MORE

राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए आज राज्य में दोनों मु्ख्य पार्टियों के अध्यक्षों की रैलियां होनी हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सुबह 09:00 बजे उदयपुर और 11:00 बजे भीलवाड़ा में रैली करेंगे. वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 9.30 बजे श्रीगंगानगर से प्रस्थान कर प्रात: 11.00 बजे फलौदी में, दोपहर 12.45 बजे बाड़मेर जिले के बालोतरा में, दोपहर 2.25 बजे बायतु में, सायं 3.50 बजे बाड़मेर में आयोजित आमसभाओं को सम्बोधित करेंगे.कांग्रेस प्रत्याशी डा. कर्णसिंह यादव के समर्थन में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू भी खैरथल पहुंचेंगे. वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 9.00 बजे लखनऊ से कोटा के लिए प्रस्थान कर प्रात: 10.15 बजे कोटा जिले की कोटा उत्तर विधानसभा में, प्रात: 11.35 बजे बारां जिले की अन्ता विधानसभा में, दोपहर 12.35 बजे बारां-अटरू विधानसभा के बारां में, दोपहर 1.45 बजे कोटा जिले की रामगंजमण्डी विधानसभा में, दोपहर 3.25 बजे अजमेर जिले की मसूदा विधानसभा में, सायं 5.00 बजे जयपुर जिले की आदर्श नगर विधानसभा के जामड़ोली में आयोजित आमसभाओं को सम्बोधित करेंगे.


केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी चुनाव प्रचार के लिए राजस्थान पहुंचेगी. स्वराज कई प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाली हैं.


Article source: http://feedproxy.google.com/~r/Khabar-Cricket/~3/3gpDgzhV8Qg/story01.htm