Tuesday, 27 November 2018

दो विश्वकप फाइनल में भारत का नेतृत्व करने वाली अकेली खिलाड़ी हैं मिताली राज


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महिला क्रिकेट टीम की सचिन तेंडुलकर कही जाने वाली मिताली राज ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप सेमीफाइनल से बाहर करने पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए टीम के कोच रमेश पोवार पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. मिताली राज का दावा है कि कोच रमेश पोवार ने पद का फायदा उठाते हुए जानबूझकर उन्हें बाहर बैठाया. मिताली ने वनडे और टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी में 50 से ज्यादा की औसत रही है, वहीं टी20 क्रिकेट में उनका औसत 40 का रहा है.पुरुष और महिला क्रिकेटरों में कई तरह से तुलना होती रही है लेकिन एक मामले में मिताली राज भारत के हर पुरुष क्रिकेट कप्तान से आगे हैं. मिताली एकमात्र खिलाड़ी (पुरुष या महिला) हैं जिन्होंने एक से अधिक आईसीसी वनडे विश्वकप फाइनल में भारत का नेतृत्व किया है. 2005 और 2017 में दो बार मिताली कप्तान थीं. इसके साथ ही महिला वनडे क्रिकेट के इतिहास में मिताली राज 6000 रन बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी हैं.


क्रिकेटर नहीं बनना चाहती थीं
लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिताली क्रिकेटर नहीं बनना चाहती थीं. 3 दिसंबर 1982 को जोधपुर में पैदा हुईं मिताली की क्लासिकल डांस में काफी दिलचस्पी थी. वह एक अच्छी भरतनाट्यम डांसर हैं, लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. उनके पिता दोराई राज एक इंडियन एयरफोर्स अफसर थे. बाद में उन्होंने आंध्रा बैंक जॉइन कर लिया. जब मिताली 10 साल की थीं तो वह उन्हें सिकंद्राराबाद में सेंट जोन्स कोचिंग कैंप में ले जाया करते थे. पिछले 12 साल से भारतीय टीम की कप्तानी करने वाली मिताली बचपन में बेहस ही आलसी थी.



मिताली राज. (File Photo)

मिताली के पिता को हमेशा यही डर सताता था कि उनकी बेटी पूरी जिंदगी इस आदत की शिकार ना रह जाए. यही वजह थी कि मिताली के पिता ने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए भेजना शुरू कर दिया.


मिताली का मन पहले तो क्रिकेट में ना के बराबर था लेकिन लगातार खेलने की वजह से उन्हें इससे प्यार होने लगा. 10 साल की उम्र में मिताली क्लासिकल डांस किया करती थी लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने डांस छोड़ बल्ला हाथ में थाम लिया. 1999 में मिताली राज ने 16 साल 205 दिन की उम्र में शतक लगाया था. उनका यह रिकॉर्ड आज भी कायम है.


मां भी क्रिकेट प्रेमी
मिताली राज की मां भी क्रिकेट प्रेमी रही हैं और वह यह खेल चुकी हैं. इस वजह से उन्हें घरवालों की तरफ से क्रिकेट को लेकर हमेशा सपोर्ट मिलता रहा. लगातार क्रिकेट खेलने के बाद 17 साल की उम्र में पहली बार मिताली का चयन भारतीय टीम में किया गया. इसके बाद एक इंटरव्यू में मिताली ने बताया कि उन्होंने क्रिकेट खेलने की शुरुआत अपने पेरेंट्स की खुशी के लिए की थी लेकिन बाद में उन्हें इस खेल से प्यार हो गया.


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मिताली राज.

21 साल की उम्र में कप्तान
मिताली को महज 21 साल की उम्र में भारतीय महिला टीम का कप्तान बना दिया गया. साल 2013 में मिताली दुनिया की नंबर वन वनडे क्रिकेटर भी रही थीं. मिताली आज भी भारतीय महिला टीम की कप्तानी कर रही हैं और उनके नेतृत्व टीम ने कई उपलब्धियां भी हासिल की है. मिताली राज ने पहला टेस्ट मैच जनवरी 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था. वनडे में उनका पहला मुकाबला 26 जुलार्इ 1999 को आयरलैंड के खिलाफ खेला था. मिताली ने पहला टी- 20 मैच 5 अगस्त 2006 काे इंग्लैंड के खिलाफ खेला. मिलाली का टेस्ट में टॉप स्कोर 214, वनडे में 114* और टी- 20 में 73* है.


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हरमनप्रीत और मिताली राज की पेशी के बाद सीओए ने मामले से झाड़ा पल्ला!

सौरव गांगुली ने हौसला बढ़ाया
पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने कहा है कि महिला टी-20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में मिताली राज को शामिल नहीं किए जाने के फैसले से वह हैरान नहीं हैं. लगातार दो अर्धशतक बनाने के बावजूद मिताली को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए लीग मैच और फिर इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल मैच में से बाहर बैठाया गया और इस मैच में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा.


गांगुली ने कहा है कि टीम की कप्तानी करने के बाद भी मुझे बाहर बैठना पड़ा था. जब मैंने मिताली को बैंच पर बैठते देखा तो मैंने कहा कि ग्रुप में आपका स्वागत है. गांगुली ने ग्रेग चैपल के समय खुद का उदाहरण देते हुए कहा कप्तानों को बाहर बैठने के लिए कहा जाता है, तो आप ऐसा ही करें. मैंने पाकिस्तान दौरे पर फैसलाबाद में ही ऐसा ही किया थ. जब मैं वनडे में सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में था तब मैंने 15 महीने तक वनडे मैच नहीं खेला था. जीवन में ऐसा होता रहता है. मिताली के लिए यह दुनिया का अंत नहीं है.

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