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पति पत्नी के बीच ‘वो’ का शक हर रिश्ते की किसी परत में रहता ही है. ऐसी ही कहानी है एक कॉंस्टेबल की, जिसकी बीवी के पास कोई सबूत नहीं था लेकिन कॉंस्टेबल के अफेयर की पोल खुल गई. तब उसने बीवी की हत्या की सुपारी दी लेकिन जब हिस्ट्रीशीटर कातिल दो छोटे छोटे बच्चों की मां को मारने पहुंचा तो बच्चों की मासूमियत उसकी ज़ालिम तबीयत पर भारी पड़ गई. वो भी एक नहीं हर बार.READ: जब 83 घंटे बाद कब्र से ज़िंदा निकली थी लड़की…
ये कहानी है कर्णाटक के शिवमोगा ज़िले के एक पुलिस कॉंस्टेबल रवींद्र की जिसकी शादी को नौ साल से ज़्यादा हो चुके थे. रवींद्र और अनिता के दो बच्चे थे, 8 साल का बेटा और 6 साल की बेटी. बाहर से देखने वालों को यही लगता था कि यह एक छोटा और सुखी परिवार है लेकिन भीतर मामला कुछ और था. अनिता और रवींद्र के सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था. पिछले कुछ वक्त से अनिता को शक हो चुका था कि रवींद्र उसे धोखा दे रहा था.
अनिता और रवींद्र के बीच इस बात को लेकर अक्सर बहस हुआ करती थी और एक दिन रवींद्र ने तैश में आकर बोल ही दिया कि वह उस रिश्ते को नहीं छोड़ेगा, भले ही उसे अनिता को छोड़ना पड़े. अनिता मायूस होकर रह गई थी और सिर्फ अपने बच्चों के भविष्य की खातिर शादी को ढोने पर मजबूर थी. रोज़ रोज़ उदासी और झगड़े का माहौल घर में घर करता जा रहा था. तंग आकर रवींद्र ने अपने प्यार को पाने के लिए अपनी बीवी को रास्ते से हटाना तय किया.रवींद्र चूंकि पुलिसकर्मी थी इसलिए उसे ऐसे काम को अंजाम देने वाले अपराधियों को तलाशने में कोई मेहनत भी नहीं करना पड़ी. रवींद्र ने सबसे छुपकर फिरोज़ के साथ मीटिंग की. फिरोज़ सुपारी लेकर हत्या करने के लिए बदनाम था और उसके खिलाफ केस चल रहे थे. फिरोज़ और दो साथियों इरफान और सुहैल के साथ रवींद्र ने डील की और कहा कि अनिता की हत्या के लिए वह चार लाख रुपये देगा.

कत्ल का कॉंट्रैक्ट देने के साथ ही रवींद्र ने अनिता का एक फोटो फिरोज़ को दिया और काम को अंजाम देने की स्कीम शुरू हुई. रवींद्र ने फिरोज़ को घर की लोकेशन और अनिता का पूरा शेड्यूल बता दिया था. रवींद्र चाहता था कि हत्या को उस वक्त अंजाम दिया जाए जब वह ड्यूटी पर हो ताकि उस पर इल्ज़ाम आने का कोई जोखिम न हो. फिरोज़ ने इस बात को ध्यान में रखकर एक दोपहर अनिता की हत्या करना तय किया.
रवींद्र घर पर नहीं था, तब फिरोज़ उसके घर पहुंचा. जैसे ही वह घर में दाखिल हुआ तो छोटे छोटे बच्चे उसे हंसते-खेलते हुए दिखे. उसने छुपकर कुछ देर नज़र रखी और बच्चों को देखता रहा. बच्चे कभी अपनी मां से लिपटते तो कभी अपने खेल में मगन हो जाते. फिरोज़ वहां से चला गया क्योंकि वह बच्चों के सामने मां को नहीं मारना चाहता था लेकिन बाद में उसे लगा कि बच्चों को देखकर वह मन ही मन कमज़ोर पड़ गया.
इधर, रवींद्र को लगा कि उस दिन हत्या को अंजाम दिया जा चुका होगा. रवींद्र ने फोन किया तो फिरोज़ ने कहा कि काम नहीं हुआ. रवींद्र बिगड़ गया और दोनों के बीच बहस हुई. लेकिन, फिरोज़ ने कहा कि वह फिक्र न करे, एक दो दिन में ही वह उसका काम कर देगा. दो दिन बाद फिरोज़ फिर अनिता को मारने के लिए ऐसे वक्त गया जब रवींद्र घर पर नहीं था. फिरोज़ के हाथ में पिस्तौल थी और वह दुआ कर रहा था कि आज बच्चे घर पर न हों.
जैसे ही वह घर में दाखिल हुआ तो फिर वही बच्चे उसे दौड़ते भागते और चहकते हुए दिखाई दिए. फिरोज़ फिर छुपकर खड़ा हो गया. रवींद्र की बेटी की नज़र खेल खेल में फिरोज़ पर पड़ी तो उसने उसे अंकल कहते हुए हलो किया और पूछा कि ‘आप कौन हो?’ फिरोज़ ने फौरन पिस्तौल छुपाई और वहां से चला गया, इससे पहले कि अनिता आ जाती और उसे देख लेती. इस बार फिर रवींद्र बिगड़ा —
रवींद्र : तुझसे काम नहीं हो रहा तो बता दे फिरोज़, मैं किसी और से करवा लूंगा.
फिरोज़ : नहीं भाई, ऐसी बात नहीं है. मैं आपका काम कर दूंगा.
रवींद्र : कर दूंगा, कर दूंगा बहुत हो गया. अब ये बता कि और कितना टाइम खर्च करूं तुझ पर? तू तो मंझा हुआ खिलाड़ी है, फिर भी इतना टाइम ले रहा है, अबे कहीं मर्दानगी बेच तो नहीं खाई?
फिरोज़ : ऐसी कोई बात नहीं है भाई, बस दो दिन का वक्त दो, आपका काम नक्की करता हूं.
रवींद्र से किसी तरह मोहलत तो मिल गई लेकिन फिरोज़ की समझ नहीं आ रहा था कि वह इतना कमज़ोर क्यों महसूस कर रहा था. उसने पक्का इरादा किया और तीसरी बार उस घर में दाखिल हुआ. रवींद्र की नन्ही सी बेटी कोई चोट लगने पर ‘मां’ को पुकारते हुए रो रही थी और बेटा अपनी मां के कहने पर दवा और पानी लाकर दे रहा था. अनिता ने अपनी बेटी को चुप करवाया और बिस्तर पर लेटाकर रसोई में काम करने चली गई.

दोनों बच्चे बिस्तर पर थे और रवींद्र का बेटा अपनी बहन को कविता सुनाकर उसे सुलाने की कोशिश कर रहा था. फिरोज़ ने जब यह सब देखा तो उसकी आंख भीग गई और उसे एहसास हुआ कि वह इन मासूम बच्चों से उनकी मां को छीनने का गुनाह नहीं कर सकता. फिरोज़ लौट गया और उसने रवींद्र को साफ कह दिया कि उससे यह काम नहीं होगा. रवींद्र का गुस्सा फूट पड़ा लेकिन फिरोज़ ने एडवांस रकम वापस कर देने की बात कहकर फोन काट दिया.
उसी दिन पुलिस की एक टीम ने फिरोज़ को किसी और केस के सिलसिले में गिरफ्तार किया. बीते सितंबर के आखिरी दिनों में जब पुलिस ने फिरोज़ की तलाशी ली तो उसके पास से अनिता का फोटो मिला. अनिता के फोटो के सिलसिले में पुलिस ने उससे पूछताछ की तो कुछ देर तक तो फिरोज़ ने राज़ रखा लेकिन उसके बाद वह रोने लगा और उसने रवींद्र की दी हुई सुपारी और अनिता के कत्ल की कोशिश की पूरी कहानी सुना दी.
यह कहानी सुनकर हैरान रह गई पुलिस ने अनिता को इस बारे में सब कुछ बताया तो अनिता ने अपने पति रवींद्र के खिलाफ कोई शिकायत नहीं करवाने का फैसला किया. फिर भी पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अनिता की हत्या की साज़िश का केस दर्ज किया और फिरोज़ के बयान के बाद रवींद्र और फिरोज़ के दोनों साथियों को गिरफ्तार कर लिया.
(लव सेक्स और धोखे की यह कहानी वास्तविक घटनाओं पर आधारित है, इसके किरदार और नाम वास्तविक हैं.)
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