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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय सेना अभी भी महिलाओं को युद्धक भूमिकाओं में शामिल करने के लिए तैयार नहीं है. हालांकि, सेना प्रमुख ने कहा कि कई अन्य क्षेत्र हैं, जहां सेना महिलाओं को शामिल करने पर विचार कर रही है, जिनमें सूचना और मनोवैज्ञानिक युद्ध जैसे क्षेत्र शामिल हैं.रावत ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 135वें कोर्स की पासिंग आउट परेड से इतर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘हम अब तक इसके लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि सैन्य बलों में इसके लिए सुविधाएं विकसित करनी होंगी और महिलाओं को भी वैसी कठिनाईयों का सामना करने के लिए उस लिहाज से तैयार होने की जरूरत है. यह आसान नहीं है. हमें पश्चिमी देशों से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए. पश्चिमी देश अधिक खुले हैं.’
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उन्होंने कहा, ‘हां, यहां के बड़े शहरों में हम भी और खुले हो सकते हैं लेकिन हमारे सैन्यकर्मी केवल बड़े शहरों से नहीं आते, वे ग्रामीण इलाकों से भी आते हैं, जहां महिला और पुरूष आपस में उतने सहज नहीं हैं जितने की उम्मीद की जाती है.’ जनरल रावत ने कहा, ‘ महिला अधिकारियों को तीनों सेनाओं में शामिल किया जा रहा है. लेकिन उनमें से कुछ को स्थायी कमीशन दिया जाना चाहिए या नहीं, इस बारे में फैसला करने की जरूरत है. सेना का भी यह मानना है ऐसे कुछ पहलू, कुछ क्षेत्र हैं जहां हमें एक किस्म की निरंतरता और स्थायित्व की आवश्यकता है.’ये भी पढ़ें: आतंकवादियों के समर्थकों पर होगी सख्त कार्रवाई: सेना प्रमुख
उन्होंने बताया कि कमान आधारित सेना में पुरुष अधिकारी हर जगह उपयुक्त नहीं हो सकते. सेना को महिला दुभाषियों की जरूरत है क्योंकि सैन्य कूटनीति का दायरा विस्तृत हो रहा है. इसके अलावा और भी कई क्षेत्रों में सेना महिलाओं को अवसर देने पर विचार कर रही है.
Article source: http://feedproxy.google.com/~r/Khabar-Cricket/~3/TNQF2d1xGHk/story01.htm
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