Wednesday, 28 November 2018

क्या हार के डर से KCR खेल रहे हैं सहानुभूति का दांव ?


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पी वी रमणा कुमारमतदान का दिन करीब आने के साथ ही नतीजों को लेकर तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री और टीआरएस प्रमुख की चिंता बढ़ने लगी है. जिस दिन उन्होंने विधान सभा भंग की थी उस दिन वो 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव जीतने के प्रति निश्चिंत थे. बाद में पीपल फ्रंट के गठन और प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही हालात बदलने लगे.


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बदले राजनीतिक हालात में राजनीतिक प्रेक्षकों का अनुमान है कि 60-65 सीटों के साथ टीआरएस की सत्ता वापसी तो हो सकती है. यानी अंतर बहुत ही कम हो सकता है. जबकि केसीआर अभी भी चिंतित है. अगर कुछ और बदलाव हुआ तो नंबर और भी कम हो सकता है और चमत्कारी आंकड़ा भी न मिले.केसीआर हार मानने को तैयार नहीं हैं. सत्ता में वापसी की हरचंद कोशिश के तहत वे हर हथियार का इस्तेमाल कर रहे हैं. अपने अभियान की शुरुआत में अपनी सरकार की अहम उपलब्धियों को गिना रहे थे. फिर विपक्षियों पर हमले करने लगे. अब संवेदना जगा कर सहानुभूति हासिल करने में लग गए हैं.
अभी एक जनसभा में उन्होंने कहा-“अगर लोग मौका देंगे तो हम कड़ी मेहनत करेंगे. अगर नहीं देंगे तो घर बैठ कर आराम करेंगे.” इन शब्दों का असर हुआ और इस पर लोगों में चर्चा हो रही है.


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हैदराबाद के एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है-“केसीआर ने लोगों को चेतवनी दी और ब्लैकमेल कर रहे हैं. अगर टीआरएस सत्ता में नहीं आई तो विकास कार्य ठप हो जाएंगे. बेशक ये शब्द हार के डर और निराशा से पैदा होते हैं. लेकिन लोगों के मन में सहानुभूति और संवेदना पैदा करते हैं.”


दो दिन पहले महबूबनगर में उन्होंने कहा था कि अगर कोई गलती हुई है तो उसे ठीक किया जाएगा, किसी और की तरफ मत जाइए. एक राजनीतिक विश्लेषक भंडारु श्रीनिवासराव का कहना है-“हमने केसीआर में स्वीकारोक्ति देखी. तकरीबन 40 उम्मीदवारों को लेकर लोगो में नकारात्मकता थी. केसीआर ने इसे भांप लिया और इसी कारण वे उन्हें वोट देने को कह रही है.” पीपल फ्रंट के नेता भी मेहनत कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और टीडीपी नेता चंद्र बाबू नायडु मिल कर रोड शो और जनसभाएं कर रहे हैं. इससे राज्य की राजनीतिक तसवीर पर असर पड़ सकता है.


Article source: https://www.jagran.com/bihar/muzaffarpur-18195547.html

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