Thursday, 29 November 2018

OPINION: चन्द्रबाबू नायडू और राहुल गांधी की क्या है मजबूरी?


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(रमेश गुत्तुला)तेलंगाना में राजनीतिक पारा अपने चरम पर है. यहां 7 दिसंबर को वोटिंग होने वाली है और 11 दिसंबर की दोपहर तक स्थिति साफ हो जाएगी कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इस समय सारे राजनीतिक दलों का एक मात्र लक्ष्य है कि सत्ता किसी तरह उनके हाथ आ जाए, इसके लिए उनके द्वारा तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं.


सत्ता तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा उठाये जा रहे कदमों और प्रचार के तरीकों से जनता हैरान है. खासतौर पर यहां हुए राजनीतिक गठजोड़ से. यहां की अधिकांश जनता और हम जैसे किसी पार्टी से सरोकार न रखने वाले लोग ये नहीं समझ पा रहे हैं कि सत्ता पाने के लिए अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियां कैसे एक साथ खड़ी हो जाती हैं.


हम बात कर रहे हैं तेलंगाना में हुए राजनीतिक गठजोड़ की. यहां तेलंगाना राष्ट्र समिति को सत्ता में दोबारा आने से रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने विरोधी तेलुगु देशम पार्टी के साथ हाथ मिलाया है. प्रजा कूटमी नाम के इस राजनीतिक गठजोड़ में कांग्रेस, तेलुगु देशम, तेलंगाना जन समिति और सीपीआई शामिल हैं.आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत कांग्रेस से ही की थी. नायडू ने अपने ससुर स्वर्गीय नंदमूरी तारक रामा राव द्वारा स्थापित तेलुगु देशम पार्टी को शुरूआत में कतई तवज्जो नहीं दी थी, लेकिन राजनीतिक समझ रखने वाले नायडू ने जैसे ही देखा कि संयुक्त आन्ध्र प्रदेश में एनटीआर का फिल्मी करिश्मा काम आ रहा है और उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत हो रही है उन्होंने पाला बदल लिया. उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़कर टीडीपी का दामन थाम लिया और उस दिन के बाद से बीते अक्टूबर तक उन्होंने कांग्रेस दूरियां बनाए रखी. टीडीपी में आने के बाद नायडू अपने ससुर एनटीआर की कांग्रेस से नफरत वाली लाइन को ही फॉलो करते रहे.


एनटीआर का मानना था कि कांग्रेस के नेताओं ने तेलुगु भाषियों के आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाया है, इसी को बेस बनाते हुए उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी का गठन किया था. टीडीपी में आने के बाद से नायडू भी इसी लाइन पर चलते रहे और पार्टी के आन्तरिक कलह के बावजूद उन्होंने कभी भी एनटीआर का राग अलापना नहीं छोड़ा. लेकिन चन्द्रबाबू नायडू द्वारा सालों बाद कांग्रेस के साथ हाथ मिलाना इस बात को इंगित करता है कि राजनीतिक मजबूरियां व्यक्तियों के आदर्श से कहीं बढ़कर हैं, यहां मैंने ये बात इसलिए लिखी कि एनटीआर ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिन आदर्शों के लिए उन्होंने टीडीपी की स्थापना की उस पार्टी को आज सत्ता में भागीदार बनने के लिए अपने ही विरोधी दल से हाथ मिलाना पड़ सकता है.


सालों-साल तक एक दूसरे को कोसने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और टीडीपी के मुखिया चन्द्रबाबू ने मंच साझा किया. सभा में कहा कि मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव सत्ता के लालची हैं. चन्द्रबाबू नायडू और राहुल गांधी ने यहां की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि तेलंगाना की जनता के हाल को देख कर वो बेहद परेशान हैं. अगर चन्द्रबाबू और राहुल गांधी यहां की जनता के हाल को लेकर इतने ही परेशान थे तो पिछले चार सालों में यहां का रुख क्यों नहीं किया. अगर यहां की सरकार द्वारा कोई जन विरोधी कदम उठाये गये थे तो आपने उस समय आंदोलन क्यों नहीं छेड़ा.ये भी पढ़ें:


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Article source: http://www.jagran.com/news/national-security-forces-kills-3-terrorist-in-kashmir-16517391.html

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