Friday, 30 November 2018

पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण की मांग को लेकर मुस्लिम नेताओं ने जताई नाराजगी


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महाराष्ट्र विधान सभा में मराठा समुदाय को आरक्षण का बिल पास किए जाने को लेकर राज्य के मुस्लिम विधायकों ने मुसलमानों को आरक्षण न दिए जाने पर नारजागी व्यक्त की है. इन विधायकों ने बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार को सांप्रदायिक ताकतों की सरकार कहा है.ये भी पढ़ें : 68 फीसदी आरक्षण देने वाला देश का दूसरा राज्य बनेगा महाराष्ट्र


पूर्व विधायक मो. आरिफ नसीम खान ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि बीजेपी आरएसएस के इशारों पर चल रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पिछले साढ़े चार सालों से पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकारों की ओर से मुसलमानों को बदहाली के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण को लागू करने में गोलमोल कर रही है. उन्होंने ये भी कहा-“इस सदन ने मराठों को आरक्षण देकर मुसलमानों को एक तरह से ठेंगा दिखा दिया है.”


पूर्व विधायक नसीम खान ने ये भी कहा कि बीजेपी सरकार मुसलमानों के मसलों पर संजीदा नहीं है और मुसलमानों से सिर्फ झूठे वायदे करती चली आ रही है. बीते साढ़े चार सालों में सदन की जितनी भी बैठकें हुईं उसमें तकरीबन हर बार मुसलमानों की बात उठाई गई, लेकिन फडणवीस सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेगी.समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने भी मुसमानों को आरक्षण न दिए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मुसलमानों की हालत जग-जाहिर है फिर भी सबका साथ सबका विकास का नारा लगाने वाली बीजेपी सरकार मुसलमानों को उनका हक देने में नाकाम ही रही है. मालेगांव से विधायक आसिफ शेख ने कहा कि जिन आधारों पर माराठा समुदाय को आरक्षण दिया गया, उन्हें अगर पैमाना बना कर देखा जाए तो मुसलमानों की हालत उनसे भी बदतर है. फिर भी मुसलमानों को महज मजहब के आधार पर आरक्षण से दूर रखा गया. जबकि पिछली सरकार ने पिछड़ेपन के आधार पर मुसलामनों को आरक्षण देने का फैसला किया था, लेकिन इस सरकार ने उसे लागू नहीं किया.


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