Wednesday, 28 November 2018

CBI जॉइंट डायरेक्टर ने दिल्ली हाई कोर्ट को दिए अस्थाना के फिलाफ सबूत


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सीबीआई जॉइंट सेक्रेटरी एके शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ सबूत पेश करते हुए कोर्ट के सूचित किया कि जबरन वसूली के मामले में वो (अस्थाना) मुख्य लाभार्थी हैं और इस पूरे मामले में भी उन्हें दोषी बताया.सीबीआई राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार और वसूली के मामले की जांच कर रही है. इसके साथ दिल्ली हाईकोर्ट ने राकेश अस्थाना को मिला अंतरिम संरक्षण 7 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है.


कोर्ट ने बंद लिफाफे में सभी सबूत अपने पास रख लिए हैं और कहा कि अगर सीबीआई चाहे तो जांच में सहयोग के लिए इसका उपयोग कर सकती है.


न्यूज़18 के मुताबिक, शर्मा ने कहा ‘यह टेलीफोन/व्हॉट्सऐप पर आरोपी और उसके सहयोगियों की बातचीत पर आधारित है, इसमें याचिकाकर्ता के नाम का लगातार इस्तेमाल हो रहा है.’इससे पहले अस्थाना ने आरोप लगाया था कि एके शर्मा का परिवार कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के साथ मिलकर शेल कंपनियां चलाता है, जो सीबीआई के निशाने पर भी थीं.


वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्थाना के खिलाफ दर्ज FIR से संबंधित फाइल का सीवीसी कार्यालय में निरीक्षण करने की भी अनुमति दे दी है. यह अनुमति राकेश वर्मा और एके शर्मा को दी गई है. जस्टिस नाजमी वजीरी ने वर्मा को गुरुवार को केंद्रीय सतर्कता आयोग के कार्यालय में जाने के लिए कहा है. वर्मा के वकील ने कहा था कि अस्थाना की याचिका में उनके खिलाफ बदनीयती से आरोप लगाए गए हैं.


जस्टिस नाजमी वजीरी ने सीबीआई को अस्थाना के खिलाफ कार्यवाही के संबंध में यथास्थिति बरकरार रखने के निर्देश देने वाले अपने आदेश की अवधि सात दिसंबर तक बढ़ा दी. अस्थाना ने रिश्वत मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग की है.


अदालत ने सीवीसी कार्यालय में गुरुवार की शाम साढ़े चार बजे मामले की फाइल का निरीक्षण करने की अनुमति दी जहां निरीक्षण के समय सीबीआई के पुलिस अधीक्षक सतीश डागर मौजूद रहेंगे. वर्मा के खिलाफ जांच के लिए सतर्कता निकाय को निर्देश दिये जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले से जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों को जांच पड़ताल के लिए सीवीसी के पास भेजा गया था.


शर्मा को भी फाइलों का निरीक्षण करने के लिए शुक्रवार को सीवीसी कार्यालय में जाने के लिए कहा गया है.


शर्मा की ओर से पेश वकील एमए नियाजी ने कहा कि दस्तावेज निजी नहीं हैं और वे सीबीआई से भी जुड़े हुए हैं, लेकिन वह सिर्फ संवेदनशील सामग्री को इंगित करना चाहते हैं जिसे अदालत और एजेंसी द्वारा देखा जाना चाहिए. अदालत ने निर्देश दिये कि शर्मा द्वारा दिए गए दस्तावेजों को अगले आदेशों तक सीलबंद लिफाफे में रखा जाए.


अस्थाना और सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं अमरेन्द्र शरण और दयान कृष्णन ने कहा कि शर्मा को सीबीआई को सामग्री देनी चाहिए और अदालत में वो जो दस्तावेज देते हैं उनपर भरोसा किया जाता है तो उन्हें भी इनके निरीक्षण की अनुमति दी जानी चाहिए.


अदालत ने अस्थाना और कुमार की याचिकाओं पर वर्मा को अपना जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय भी दिया. अस्थाना और कुमार ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किये जाने का आग्रह किया है.


वर्मा की ओर से पेश वकील राहुल शर्मा ने कहा कि अस्थाना की याचिका में उनके खिलाफ बदनीयती से आरोप लगाए गए हैं. सीबीआई के वकील राजदीप बेहुरा ने कहा कि मामले की फाइल एजेंसी के पास नहीं है और वे सीवीसी के पास है.


अस्थाना के वकील ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर वर्मा के खिलाफ जांच के निष्कर्षों को सुप्रीम कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में सीबीआई प्रमुख को दिया था. इस पर वर्मा के वकील ने कहा कि उन्हें पूरे मामले की फाइल नहीं दी गई थी. अदालत अस्थाना, कुमार और बिचौलिये मनोज प्रसाद की अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी. इन लोगों ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किये जाने का आग्रह किया है.


हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर को सीबीआई को अस्थाना के खिलाफ कार्यवाही के संबंध में यथास्थिति बरकरार रखने के निर्देश दिये थे. कोर्ट ने अपने इस आदेश की अवधि को 29 अक्टूबर को एक नवम्बर तक के लिए बढ़ा दिया था.


एक नवम्बर को अंतरिम आदेश को 14 नवम्बर तक बढ़ाया गया और इसके बाद इसे 28 नवम्बर तक के लिए बढ़ाया गया था. 23 अक्टूबर के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि एजेंसी अस्थाना के खिलाफ कोई भी कड़ा कदम नहीं उठायेगी.


(एजेंसी इनपुट के साथ)


Article source: https://www.jagran.com/bihar/muzaffarpur-18195547.html

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