Tuesday, 31 July 2018

रहीम चाचा के रहने तक जिंदा रहा इंडियन फुटबॉल का वजूद!


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अलीगढ़ [गौरव दुबे]। रहीम चाचा के नाम से मशहूर सैयद अब्दुर्रहीम वो महान शख्सियत थे, जिनकी कोचिंग की बदौलत भारतीय फुटबॉल टीम दो बार ओलंपिक तक पहुंची। टीम एक बार चौथे तो दूसरी बार छठवें स्थान पर रही। दो बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल भी जीता।


1963 में चाचा ने दुनिया को अलविदा कह दिया तो फिर हिंदुस्तान से फुटबॉल का जैसे वजूद ही खत्म हो गया। रहीम चाचा के उस अभूतपूर्व योगदान पर अब फिल्म बनने जा रही है। इसमें चाचा की भूमिका अभिनेता अजय देवगन निभाएंगे।


चाचा के बेटे व पूर्व ओलंपियन सैयद शाहिद हकीम इससे बेहद खुश हैं। कहते हैं, इस बहाने चाचा के बारे में न सिर्फ पूरी दुनिया जानेगी, बल्कि देश के गौरवशाली अतीत के बहाने फुटबॉल खिलाडिय़ों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।


मूलत: हैदराबाद निवासी पूर्व ओलंपियन शाहिद हकीम 2014 से 2015 तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्र्वविद्यालय के स्पो‌र्ट्स एडवाइजर भी रहे हैं। वे बताते हैं कि 1909 में जन्मे उनके पिता 1920 में फुटबॉल खिलाड़ी बन गए थे। उस वक्त देश की टीम नहीं थी। राजा-महाराजा ही अपने क्लब चलाया करते थे। पिताजी क्लब के खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देते थे। इंडियन फुटबॉल टीम बनी तो 1950 से लेकर 1962 तक कोच रहे।

1951 में दिल्ली व 1962 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में टीम ने स्वर्ण पदक जीते। प्रशिक्षण के बूते ही मेलबर्न (1956) में हुए ओलंपिक के लिए टीम इंडिया ने न सिर्फ क्वालीफाई किया, बल्कि चौथा स्थान भी पाया। 1960 के रोम ओलंपिक में भी टीम खेली और छठवें स्थान पर रही। इस टीम का हिस्सा शाहिद भी थे। 1959 में क्वालालंपुर में हुए मर्डिका कप में भी रजत पदक जीता। 1963 में उनका इंतकाल हो गया। इसके बाद टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।




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रहीम चाचा ने सिर्फ खेल ही नहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया था। वे 1932 से शिक्षण कार्य में आ गए थे। 1958 में हैदराबाद में प्रिंसिपल भी रहे। रोम ओलंपिक में भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रहे 76 वर्षीय शाहिद हकीम बताते हैं कि वह 1952 में स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, हैदराबाद स्टेट, एअर फोर्स व देश की तीनों सेनाओं की टीम की ओर से खेले। 1959 में इंडिया टीम में आए और 1960 के रोम ओलंपिक में खेले। 1961 के अंत में एअर फोर्स ज्वॉइन कर ली। तभी, चीन से जंग हो गई और वहां बखूबी लड़े। 1983 में सेवानिवृत्त हो गए।


रहीम चाचा पर अब बोनी कपूर व ज्वॉय सेन गुप्ता के निर्देशन में फिल्म बन रही है। इसमें सैयद अब्दुर्रहीम की भूमिका अजय देवगन निभाएंगे। उनकी अजय से मुलाकात भी हो चुकी है।


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By Vikas Jangra


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KiKi challenge से है आपकी जान को खतरा, पुलिस ने जारी की चेतावनी


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नई दिल्ली (जेएनएन)। आपने ‘ब्लू व्हेल’ चैलेंज का नाम तो सुना ही होगा। जी हां वही चैलेंज जिसने कई बच्चों की जान ले ली थी। अब ब्लू व्हेल चैलेंज के बाद ‘किकी चैलेंज’ (KiKiChallenge) आ गया है। सोशल मीडिया पर तो आज कल किकी चैलेंज का जादू सा चल गया है। हर कोई अपनी जान पर खेल कर इस चैलेंज को पूरा करने में लग गया है। यहां तक की बॉलीवुड भी इससे अछूता नहीं रहा। कई सितारों ने किकी चैलेंज के अपने वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए हैं।



सितारों को देख कर आम लोगों में भी इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। लेकिन हम आपसे गुजारिश करते हैं कि इस तरह के चैलेंज से दूर रहें क्योंकि इससे आपकी जान को जोखिम भी हो सकता है। इसे किकी चैलेंज ना कह कर अगर ‘Life Challenge’ कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। लोगों के लिए फन बना किकी चैलेंज पुलिसवालों के लिए सिरदर्द बन गया है। इस चैलेंज की वजह से कई हादसे सामने आ रहे हैं। भले ही ये चैलेंज आपको मनोरंजन का हिस्सा लगता हो, लेकिन इसके खतरनाक पहलुओं के बारे में भी सोचना बेहद जरूरी है। ये डांसिंग मूव्स बड़ी दर्घटना को न्योता देने जैसा है।




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क्या है ‘KiKi challenge’


सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर किकी चैलेंज क्या है, जिसके पीछे दुनिया पागल हो गई है। दरअसल ‘किकी चैलेंज’ एक कैनेडियन रैप सिंगर का गाना है। इस गाने को यूट्यूब पर अब तक 8.2 करोड़ व्यूज मिल चुके हैं। शिगी नामक एक कॉमेडियन ने इस चैलेंज की शुरूआत की थी। चैलेंज को पूरा करने के लिए गाड़ी में एक आदमी बैठा होता है जो कि गाड़ी चलाने के साथ ही वीडियो भी बनाता है।




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वहीं गाड़ी का आगे का एक दरवाजा खुला होता है जिसके बाहर एक अन्य व्यक्ति चलती हुई गाड़ी की ओर देखकर सड़क पर डांस करता है। साथ में यह गाना भी बज रहा होता है। किकी.. डू यू लव मी। उसकी वीडियो गाड़ी चलाने वाला ही बनाता है। चैलेंज पूरा करने के बाद बाहर नाचने वाले व्यक्ति को कूदकर चलती गाड़ी में अंदर बैठना होता है। तभी इस चैलेंज को पूरा माना जाता है।




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बॉलीवुड पर छाया किकी चैलेंज का खुमार


बॉलीवुड सितारों पर भी इन दिनों KiKi plea का जैसे जादू सा चल गया है। एक्ट्रेस अब अपने नए वीडियो में अलग-अलग तरह की अतरंगी वीडियो करते हुए दिखाई दे रही हैं। बॉलीवुड की कई एक्ट्रेस ने किकी चैलेंज लेते हुए इस गाने पर चलती गाड़ी के साथ डांस स्पेट किए। नोरा फतेही ने लाल साड़ी में इस चैलेंज को लिया था। अभिनेत्री अदा शर्मा ने नागिन अवतार में इस चैलेंज को पूरा किया है। हालांकि अदा गाड़ी के साथ डांस तो कर रही थीं, लेकिन गाड़ी चल नहीं रही थी। रागिनी एमएमएस रिटर्न्स से बॉलीवुड में अपने कदम जमाने वाली करिश्मा शर्मा ने भी अपना डांस वीडियो शेयर किया है।




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पुलिस के लिए सिरदर्द बना KiKi challenge



किकी चैलेंज से भारतीय पुलिस परेशान हो गई है। पुलिस की तरफ से सोशल मीडिया पर अभियान चलाए जा रहे हैं जहां पर लोगों को खतरनाक डांस स्टेप न करने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वह लोगों को सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी दे रही है। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि छोटे बच्चे भी करने में लगे हैं।




हाल ही में मुंबई, उत्तर प्रदेश पुलिस, दिल्ली और पंजाब पुलिस ने भी ट्वीट कर परामर्श दिए हैं। हाल ही में मुंबई पुलिस ने लोगों से इस चैलेंज को ना करने की अपील की थी और अब दिल्ली और यूपी पुलिस ने ट्वीट के जरिए लोगों से अपील की है कि वो ऐसे खतरनाक चैलेंज को ना अपनाएं।




यूपी पुलिस ने ट्वीट में लिखा, डियर पेरेंट्स kiki आपके बच्चों से प्यार करते है या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन आप जरूर अपने बच्चों से प्यार करते हैं। इसलिए अपने बच्चों को जिंदगी में इस तरह के चैलेंज करने से बचाएं। पुलिस की ओर से ट्वीट में टेक्स्ट एक वीडियो भी पोस्ट किया गया है। जिसमें चलती गाड़ी से उतरते हुए लोगों को गिरते हुए दिखा कर इस चैलेंज को खतरनाक बताने की कोशिश की गई है।




कई देशों में लगा प्रतिबंध


किकी चैलेंज कितना खतरनाक है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि कई देशों में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्पेन, इजिप्ट और यूएई इस डांस चैलेंज पर प्रतिबंध लगा चुका है।


 


अमेरिकी के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड ने ट्विटर पर लिखा, ‘ #InMyFeelings चैलेंज को लेकर हम भी आपसे कुछ कहना चाहते है। किसी तरह का भटकाव खतरनाक और जानलेवा हो सकता है, भले ही आप ड्राइवर, पायलेट, या ऑपरेटर हों। अपने वाहन को सुरक्षित ढंग से चलाने पर ध्यान दें।’


बता दें कि यह इस तरह का पहला चैलेंज नहीं है, जो लोगों की जान के लिए खतरा बना हो। इससे पहले भी इसी तरह के कई चैलेंज का लोगों के बीच क्रेज रह चुका है। हम आपको कुछ ऐसे ही चैलेंज के बारे में बताने जा रहे हैं।  


कई मौतों की वजह बना ब्लू व्हेल चैलेंज
किकी चैलेंज से पहले ब्लू व्हेल चैलेंज बच्चों के बीच तेजी से फैल रहा था। इस चैलेंज के चलते कई बच्चों को अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ा था। इस खेल के जरिए बच्चों को खुदकुशी के लिए उकसाया जाता था। एक ऑनलाइन ऐडमिनिस्ट्रेटर खेलने वालों को 50 दिनों का चैलेंज देता है। हर टास्क पूरा होने के बाद प्लेयर को साबित करने के लिए एक तस्वीर भेजनी होती है। शुरुआत के चैलेंज खास मुश्किल नहीं होते, लेकिन बढ़ते-बढ़ते वे खतरनाक होते जाते हैं, जिनमें आपको खुद को नुकसान पहुंचाने का चैलेंज मिलता है। ये आपको धीरे-धीरे सूइसाइड की ओर मोड़ने लगते हैं। इन टास्क्स को कैसे पेश करना है, यह क्यूरेटर के हाथ में होता है।



आइस बकेट चैलेंज
ऐसे ही पहले आइस बकेट चैलेंज चला था। इसमें बाल्टी में भर कर आइस किसी पर डालने होते थे और लोग ऐसा कर के ये चैलेंज पूरा कर रहे थे। हर शख्स के पास यह चैलेंज पूरा करने के लिए 24 घंटे का वक्त होता है। इस चैलेंज की वजह से व्यक्ति के हाथ-पैर सुन्न हो जाते थे और रक्त का संचार रूक जाता था। इससे व्यक्ति को जान का भी खतरा रहता था।



नमक और बर्फ चैलेंज
नमक और बर्फ चैलेंज चैलेंज अमेरिका और ब्रिटेन से शुरू हुआ था। इसमें चैलेंज करने वाले को अपने हाथ पर नमक लगाना होता है और फिर उस पर बर्फ रखनी होती है। इसके बाद देखा जाता है कि वह कितनी देर तक दर्द सह सकता है। इससे कई बार शरीर का तापमान -20 डिग्री तक पहुंच जाता है और चोट और जलन जैसी घटनाएं भी हुई हैं।



इरेजर चैलेंज
इसी तरह का एक खतरनाक चैलेंज था इरेजर चैलेंज। इसमें व्यक्ति को अपने शरीर के एक हिस्से पर ए से लेकर जेड तक के एल्फाबेट रगड़कर लिखने होते हैं। आखिर में जब उनके उस अंग पर जेड लिखा आ जाता है तो उसे अपने दोस्त से कंपेयर करना होता है। इससे बच्चे अपनी त्वचा को बहुत ज्यादा रगड़ लेते हैं जिससे उन्हें गंभीर चोट तक आ जाती है।


वारहेड चैलेंज
इस चैलेज में व्यक्ति को 10 मिनट के अंदर 150 खट्टी कैंडी खानी होती है। लेकिन ये चैलेंज भी खतरनाक साबित हुआ और इसे पूरा करने के बाद लोगों की जीभ लहू लुहान हो गई।



By Arti Yadav


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मुंबई के तटीय इलाकों में दिखी जहरीली जेलीफिश, समुद्र की तरफ जाने से बचें


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महाराष्ट्र के गिरगौम और जुहू तटों पर जहरीली जेलीफिश देखी गई. इस पर, सरकार ने मंगलवार को परामर्श जारी कर लोगों से समुद्र में नहीं जाने की अपील की.मत्स्य पालन विभाग के राज्य आयुक्त अरुण विधाले ने कहा कि जेलीफिश समंदर की लहरों के साथ बह रही है. उन्होंने कहा कि जेलीफिश व्यक्ति के संपर्क में आने पर उसे काट लेती हैं. इससे दर्द होता है और शरीर का वह हिस्सा लाल हो जाता है. इससे बहरापन हो सकता है या शरीर का वह हिस्सा सुन भी हो सकता है, जहां यह मछली काटती है. इससे राहत के लिए व्यक्ति को प्रभावित हिस्से पर सिरका या गर्म पानी डाल लेना चाहिए.


अरुण विधाले ने कहा कि दर्द रहने पर व्यक्ति को मेडिकल सहायता लेनी चाहिए.


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अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़े ने लगाई पुलिस से सुरक्षा की गुहार


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ग्वालियर में अंतरजातीय विवाह रचाने वाली एक युवती को ऑनर किलिंग का खौफ सता रहा है. अपने प्रेमी के साथ कोर्ट मैरिज करने वाली युवती ने ग्वालियर एसपी से सुरक्षा की गुहार लगाई है.युवती का आरोप है कि उसके परिजन ही उसके पति को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं.काजल ने कहा कि उसे और उसके पति धीरेंद्र को जान का खौफ सता रहा है.पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सुरक्षा की गुहार करने पहुंचे काजल और धीरेंद्र ने अपने विवाह के दस्तावेज दिखाए. दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस ने माना कि काजल और धीरेंद्र दोनों बालिग हैं और उनका विवाह कानून के तहत पूर्णतः वैध है.आखिरकार धमकियों से परेशान होकर मंगलवार को दोनों ने ग्वालियर एसपी से सुरक्षा की गुहार लगाई.शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधिकारियों ने नव-दंपति को सुरक्षा का भरोसा दिलाया.ग्वालियर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे इस दंपति ने बताया कि उन्होंने अंतर जातीय विवाह रचाया है.ग्वालियर निवासी धीरेंद्र अग्रवाल औऱ मोहना निवासी काजल शिवहरे एक दूसरे से प्रेम
करते थे.काजल के घर वाले तैयार नहीं हुए तो दोनों ने 30 जून को कोर्ट मैरिज कर ली. 15 जुलाई को काजल ने अपने घर वालों को शादी के बारे में बताया लेकिन घर में बवाल हो गया.
लिहाजा काजल घर छोड़कर धीरेंद्र के साथ चली गई. लेकिन अब काजल का आरोप है कि उसके घर वाले धीरेंद्र को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं. बीते 15 दिनों से दोनों डर के साए में छुप कर जी रहे हैं.पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दंपति अपनी मर्जी से जहां चाहे रहेंगे, उनको हर स्तर पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी. पुलिस से इस सुरक्षा का भरोसा मिलने के बाद काजल और धीरेंद्र कंपू थाने रवाना हुए.


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सत्ता पाने की बेचैनी में राज्य के बंटवारे की मांग को हवा दे रही है BJP-कुमारस्वामी


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कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने उत्तर कर्नाटक के नेताओं के साथ आपात बैठक करके वायदा किया कि वह अगले एक या दो महीने में सभी 13 जिलों का दौरा करेंगे. उन्होंने बीजेपी पर उत्तर कर्नाटक को अलग करने की मांग अचानक उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सत्ता की बेचैनी में बीजेपी राज्य के बंटवारे की मांग को भड़का रही है.मुख्यमंत्री ने नेताओं से कहा कि पिछले कार्यकाल में वह उत्तर कर्नाटक के 35 गांवों में ठहरे और बेलगांव में सुवर्ण विधान सौंध का निर्माण कराया.


बीजेपी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने राज्य के सभी 30 जिलों के किसानों के साथ एक बैठक की. लेकिन येदियुरप्पा उसमें शामिल नहीं हुए. वह अब अलग उत्तर कर्नाटक की मांग कर रहे हैं. वह मेरे मुख्यमंत्री बन जाने से परेशान हैं. इसी वजह से बीजेपी ये ड्रामा कर रही है. लोकसभा चुनाव के बाद वे इस पर चर्चा नहीं करेंगे.”


इस बीच उत्तर कर्नाटक के बहुत से महत्वपूर्ण नेताओं ने अलग राज्य की मांग का विरोध किया है.1950 में कर्नाटक के एकीकरण अभियान में शामिल रहे दिग्गज नेता पाटिल पुट्टप्पा ने इस मांग को बेकूफी भरा कह कर खारिज कर दिया.कर्नाटक के पूर्व पुलिस महानिदेशक और बीजेपी के एक नेता शंकर बिडारी ने भी कुमारस्वामी से सहमति जताते हुए कहा कि उत्तर कर्नाटक की अनदेखी के लिए कुमारस्वामी को दोषी ठहराने से कोई फायदा नहीं है.


कहीं से भी उत्तर कर्नाटक को अलग करने की मांग को समर्थन और आधार न मिलने के बीजेपी ने पलटी मार इस तथाकथित आंदोलन से अपने को अलग कर लिया है. बी श्रीरामालु और उमेश कात्ती जैसे बीजेपी नेता अलग राज्य की मांग पर मौन हो गए हैं. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा भी जेडीएस पर इस संकट का आरोप मढ़ कर इसका विरोध कर चुके हैं.


कांग्रेस के चोटी के नेता और विधायक एम बी पाटिल भी उत्तर कर्नाटक की अनदेखी करने के सरकार पर आरोप को बेबुनियाद बता चुके हैं. उनका कहना है कि उत्तर कर्नाटक के लिए दशकों से से बहुत कुछ किया गया है. हालांकि वे इस बात पर कुमारस्वामी से असहमत हैं कि उत्तर कर्नाटक के लोगों ने हालिया विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को वोट दिया है और ये जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन की सरकार है.


कन्नड के एक्टिविस्ट के एक बड़े ग्रुप बनवासी बड़गा के बैनर तले #KarnatakaVonde का एक कैंपेन ट्विटर पर बुधवार को दोपहर 2 बजे से शुरू हुआ है. इसका मतलब होता है- कर्नाटक एक है.
दक्षिण कर्नाटक के बीजेपी नेताओं ने भी सीधे या घुमाफिरा कर अलग राज्य की मांग को हवा देने से दूर रहने की चेतवानी दी है.


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लोकसभा चुनाव में सामूहिक नेतृत्व के जरिए भाजपा का मुकाबला करेगा विपक्ष: ममता


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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान नहीं किए जाने का संकेत देते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी मोर्चा सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव में उतरेगा.नई दिल्ली की तीन दिन की यात्रा के तहत बनर्जी बुधवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और विपक्ष के अन्य प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेंगी. वह उन्हें अगले साल 19 जनवरी को कोलकाता में अपनी रैली में शामिल होने के लिए आमंत्रित भी करेंगी. उनकी इस रैली का लक्ष्य विपक्षी एकता का प्रदर्शन है.


बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, “2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का मुकाबला करने के लिए सामूहिक नेतृत्व होगा. मैं सभी विपक्षी नेताओं से मुलाकात करूंगी और उन्हें रैली के लिए आमंत्रित करूंगी. मैं कल कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से भी मिलूंगी.”


तृणमूल नेता से सवाल किया गया था कि क्या प्रस्तावित भाजपा विरोधी मोर्चे के लिए उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है. बनर्जी को एक मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है. 19 जनवरी की रैली को विपक्ष में बनर्जी की स्थिति को और मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.ये भी पढ़ें: मुख्तार अब्बास नकवी बोले, साल 2019 में पीएम के लिए कोई वैकेंसी नहीं


कांग्रेस पहले ही यह संकेत दे चुकी है कि वह गैर आरएसएस समर्थित किसी भी दल के किसी नेता को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने के खिलाफ नहीं है.


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शाह का विपक्ष पर हमला, वोटबैंक के लिए नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है NRC


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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को विपक्षी दलों से बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की और कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को पूरी तरह लागू किया जाएगा क्योंकि उनकी पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीयों के अधिकारों के साथ खड़ी है. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की आलोचना खारिज करते हुए शाह ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान करने पर केंद्रित एनआरसी की प्रक्रिया 2005 में शुरु हुई थी जब यूपीए सत्ता में था लेकिन उस सरकार में ‘अवैध बांग्लादेशियों को निकाल बाहर करने’ का साहस नहीं था.उन्होंने कहा, ‘‘ एनआरसी को पूरी तरह लागू किया जाएगा’’. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए शाह ने कहा कि उन्हें चुनाव जीतने के लिए अवैध प्रवासियों में ‘वोटबैंक’ दिखता है लेकिन उनकी पार्टी (भाजपा) देश की सुरक्षा और उसके नागरिकों के अधिकारों को देख रही है.


ममता बनर्जी ने एनआरसी के संदर्भ में बीजेपी पर ‘बांटो और राज करो’ का आरोप लगाया है. शाह ने कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक को चिंतिंत नहीं होना चाहिए और असम में रह रहे अन्य राज्य के लोगों को छुआ नहीं जाएगा तथा एनआरसी को दृढता एवं निष्पक्षता के साथ लागू किया जाएगा.


भाजपा ने इस मुद्दे को लपक लिया है जो चुनावी साल में विपक्षी दलों को घेरने के लिए राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के उसके व्यापक एजेंडे में फिट बैठता है. शाह ने भाजपा को भारतीयों के अधिकारों के पक्ष में तथा विपक्ष को अवैध बांग्लादेशियों के अधिकार के पक्ष में पेश किया है.ये भी पढ़ें: NRC से बाहर हुए 40 लाख लोगों के बायोमीट्रिक डाटा लेने पर विचार कर रहा है केंद्र


उन्होंने कहा, ‘‘बीजेपी राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है. यह हमारी शीर्ष प्राथमिकता है. अन्य सभी दल इस परअपना रुख स्पष्ट करें.’’उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस का जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ दें कि वे एनआरसी का समर्थन करते हैं या नहीं.


बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि एनआरसी असम समझौते की आत्मा है जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दस्तखत किये थे. यह स्पष्ट करता है कि हर एक अवैध प्रवासी की पहचान की जाएगी और उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जाएगा. लेकिन केंद्र और राज्य में आई कई कांग्रेस सरकारों में उसे लागू करने का साहस नहीं था.


उन्होंने कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कदम रखा और मोदी सरकार ने प्रक्रिया शुरु की. शीर्ष अदालत पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि आप एनआरसी पर सवाल क्यों उठा रहे हैं? कांग्रेस ने 2005 में एनआरसी प्रक्रिया शुरु की. लेकिन आप में अवैध बांग्लादेशियों को निकाल बाहर करने का साहस नहीं था क्योंकि वोटबैंक आपके लिए महत्वपूर्ण है, न कि राष्ट्रीय सुरक्षा एवं देश के नागरिकों का अधिकार.’’


शाह ने कहा कि कांग्रेस को वोट बैंक को राष्ट्रहित से ऊपर नहीं रखना चाहिए. यह बड़ी दुखद स्थिति है कि बीजेपी और बीजद को छोड़कर कोई भी यह कहना मुनासिब नहीं समझता कि अवैध प्रवासियों की इस देश में कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी इस विषय पर राजनीति नहीं कर रही है, चाहे वह सत्ता में हो या विपक्ष में, उसका रुख एक सा है.


उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की अपना रूख बदलने की आदत है. शाह ने राहुल गांधी से रूख स्पष्ट करने की मांग करते हुए पूछा कि क्या आप अपनी दादी एवं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की यह बात भूल गए कि देश में अवैध प्रवासियों की कोई जगह नहीं है.


कुछ दलों और संगठनों द्वारा उठाये गये मानवाधिकार के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय नागरिकों के अधिकारों की चिंता है जिनके संसाधन अवैध प्रवासियों द्वारा छीने जा रहे हैं. असम एनआरसी के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा मानवाधिकार का विषय उठाने के संबंध में शाह ने कहा कि एनआरसी देश के नागरिकों के मानवाधिकारों के लिये है. क्या देश के नागरिकों का कोई मानवाधिकार नहीं होता है ?


उन्होंने ममता बनर्जी की उनकी इस चेतावनी को लेकर निंदा की कि गृह युद्ध और खून-खराबा छिड़ सकता है. शाह ने पूछा, ‘‘उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वह किस प्रकार के गृहयुद्ध की बात कर रही हैं.’’ पश्चिम बंगाल में एनआरसी की प्रदेश बीजेपी नेताओं की मांग के बारे में पूछे जाने पर बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि एनआरसी फिलहाल असम तक केंद्रित है और पार्टी उपयुक्त समय पर ऐसे मुद्दे पर रुख तय करेगी.


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उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने अक्सर पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों के मुद्दे की बात की है और उसे उम्मीद है कि यह राज्य में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा,जहां शाह अगले साल 42 लोकसभा सीटों में 22 पर जीतने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं.


शाह ने कहा कि उन्होंने मीडिया के मार्फत एनआरसी पर अपना विचार रखने का फैसला किया क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने उन्हें राज्यसभा में बोलने नहीं दिया.  कांग्रेस पर शाह के प्रहार के चलते विपक्ष ने शोरशराब किया और सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी.


उन्होंने कहा कि कुछ दलों का यह दावा कि यह अंतर-राज्यीय विवाद बन जाएगा, भ्रम फैलाने का प्रयास है. शाह ने कहा कि एनआरसी ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि असम में रह रहे 40 लाख लोग भारतीय नागरिक नहीं है लेकिन लेाग अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं और उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका सत्यापन किया जाएगा.


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