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कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने उत्तर कर्नाटक के नेताओं के साथ आपात बैठक करके वायदा किया कि वह अगले एक या दो महीने में सभी 13 जिलों का दौरा करेंगे. उन्होंने बीजेपी पर उत्तर कर्नाटक को अलग करने की मांग अचानक उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सत्ता की बेचैनी में बीजेपी राज्य के बंटवारे की मांग को भड़का रही है.मुख्यमंत्री ने नेताओं से कहा कि पिछले कार्यकाल में वह उत्तर कर्नाटक के 35 गांवों में ठहरे और बेलगांव में सुवर्ण विधान सौंध का निर्माण कराया.
बीजेपी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने राज्य के सभी 30 जिलों के किसानों के साथ एक बैठक की. लेकिन येदियुरप्पा उसमें शामिल नहीं हुए. वह अब अलग उत्तर कर्नाटक की मांग कर रहे हैं. वह मेरे मुख्यमंत्री बन जाने से परेशान हैं. इसी वजह से बीजेपी ये ड्रामा कर रही है. लोकसभा चुनाव के बाद वे इस पर चर्चा नहीं करेंगे.”
इस बीच उत्तर कर्नाटक के बहुत से महत्वपूर्ण नेताओं ने अलग राज्य की मांग का विरोध किया है.1950 में कर्नाटक के एकीकरण अभियान में शामिल रहे दिग्गज नेता पाटिल पुट्टप्पा ने इस मांग को बेकूफी भरा कह कर खारिज कर दिया.कर्नाटक के पूर्व पुलिस महानिदेशक और बीजेपी के एक नेता शंकर बिडारी ने भी कुमारस्वामी से सहमति जताते हुए कहा कि उत्तर कर्नाटक की अनदेखी के लिए कुमारस्वामी को दोषी ठहराने से कोई फायदा नहीं है.
कहीं से भी उत्तर कर्नाटक को अलग करने की मांग को समर्थन और आधार न मिलने के बीजेपी ने पलटी मार इस तथाकथित आंदोलन से अपने को अलग कर लिया है. बी श्रीरामालु और उमेश कात्ती जैसे बीजेपी नेता अलग राज्य की मांग पर मौन हो गए हैं. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा भी जेडीएस पर इस संकट का आरोप मढ़ कर इसका विरोध कर चुके हैं.
कांग्रेस के चोटी के नेता और विधायक एम बी पाटिल भी उत्तर कर्नाटक की अनदेखी करने के सरकार पर आरोप को बेबुनियाद बता चुके हैं. उनका कहना है कि उत्तर कर्नाटक के लिए दशकों से से बहुत कुछ किया गया है. हालांकि वे इस बात पर कुमारस्वामी से असहमत हैं कि उत्तर कर्नाटक के लोगों ने हालिया विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को वोट दिया है और ये जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन की सरकार है.
कन्नड के एक्टिविस्ट के एक बड़े ग्रुप बनवासी बड़गा के बैनर तले #KarnatakaVonde का एक कैंपेन ट्विटर पर बुधवार को दोपहर 2 बजे से शुरू हुआ है. इसका मतलब होता है- कर्नाटक एक है.
दक्षिण कर्नाटक के बीजेपी नेताओं ने भी सीधे या घुमाफिरा कर अलग राज्य की मांग को हवा देने से दूर रहने की चेतवानी दी है.
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