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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बीते कुछ दिनों में ज्ञान के मन्दिर की जगह सियासत का अखाड़ा बन गया है. जिस संस्थान ने डॉ ज़ाकिर हुसैन, ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान, हामिद अंसारी, नसीरुद्दीन शाह, जावेद अख्तर और ज़फ़र इकबाल जैसी अलग-अलग फ़ील्ड की हस्तियां दीं. उसी कैम्पस में आज देश के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविन्द के विरोध की हलचल है. वो भी तब जब संवैधानिक पद पर होने की वजह से वो वहां के विजिटर हैं. AMU के छात्रों का एक गुट RSS और BJP के विरोध के बहाने 7 मार्च को दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने आ रहे राष्ट्रपति और दूसरे मेहमानों के विरोध की धमकियां दे रहा है. इनका तर्क है कि वो देश के राष्ट्रपति का नहीं बल्कि संघी मानसिकता का विरोध कर रहे हैं. सवाल उठता है कि क्या AMU किसी खास विचारधारा की बंधक है? सवाल उठता है कि क्या AMU किसी खास शख्स या समुदाय की जागीर है? देश संविधान से चलेगा या गुंडागर्दी की जुबान से? इसी पर देखिए आज का हम तो पूछेंगे.
Article source: http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-16489150.html
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