Tuesday, 31 July 2018

स्‍वाति मालीवाल ने दिल्‍ली के पहाड़गंज के होटल से 39 नेपाली लड़कियों को छुड़ाया


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दिल्‍ली महिला आयोग ने पहाड़गंज से रात करीब एक बजे एक होटल से रेस्‍क्‍यू कर 39 नेपाली लड़कियों को छुड़ाया है. इन सभी लड़कियों को देश से बाहर भेजने की तैयारी थी. दिल्‍ली महिला आयोग की अध्‍यक्ष स्‍वाति मालीवाल ने खुद इस रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन को संभाला और होटल में कैद सभी नेपाली लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला. पिछले कुछ समय से लगातार अलग-अलग जगहों से लड़कियों के मिलने का सिलसिला जारी है.दिल्‍ली महिला आयोग को सूचना मिली थी पहाड़गंज के एक होटल में नेपाल की कुछ लड़कियों को रखा गया है. शिकायत के आधार पर दिल्‍ली महिला आयोग की अध्‍यक्ष स्‍वाति मालीवाल ने खुद रात करीब एक बजे पुलिस टीम के साथ होटल पर छापा मारा. इस दौरान घर से 39 नेपाली लड़कियों को छुड़ाया गया है. इन लड़कियों को कुछ दिन पहले ही नेपाल से लाया गया था और विदेशों में भेजने की तैयारी थी. लड़कियों से पूछताछ में पता चला है कि दलालों ने उनके पासपोर्ट अपने पास रख लिए थे और उन्‍हें होटल में कैद  कर लिया.


गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी दिल्‍ली महिला आयोग ने मुनिरका इलाके से रात करीब डेढ़ बजे एक घर में छापा मारकर नेपाल की 16 लड़कियों को छुड़ाया है. इन लड़कियों को बहला फुसलाकर मानव तस्करी के लिए नेपाल से लाया गया था. पूछताछ में पता चला है कि इन लड़कियों को यहां से कुवैत और इराक भेजने की तैयारी थी.


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कोलकाता: 14 साल की बच्ची के गले से निकली 9 सुइयां, तंत्र विद्या का शक


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ज्यादातर बच्चे इंजेक्शन या सुई से डरते हैं. कभी सुई लगानी पड़ जाए, तो वो दर्द से कराहते हैं. ऐसे में अगर किसी के गले में एक-दो नहीं, 9 सुई चुभोई गई हो तो, उसके दर्द का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. कोलकाता के नदिया जिले की कृष्णानगर में ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने सर्जरी कर 14 साल की बच्ची के गले से 9 सुइयां निकाली.ऑपरेशन के दौरान बच्ची के सिर में छोड़ी सुई, पुलिस दर्ज नहीं कर रही केस


हॉस्पिटल के ईएनटी (कान, नाक और गला) विभाग के प्रो. डॉ मनोज मुखर्जी के नेतृत्व में 7 डॉक्टरों की टीम ने ये क्रिटिकल सर्जरी की. डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज के गले की मांसपेशी में सभी सुई फंसी हुई थी. बच्ची के गले से डेढ़ इंच की एक सुई और दो इंच की 8 सुई निकाली गई है.


डॉक्टरों का अनुमान है कि जिस तरह से सुइयां चुभोई गई थीं, वैसा तंत्र-मंत्र के उद्देश्य से ही किया जा सकता है. सर्जरी के बाद बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है.ऑपरेशन करके भूल गए डॉक्टर्स, महिला की पीठ में रह गई दो इंच लंबी सुई


जानकारी के मुताबिक, बच्ची की पहचान अपरुपा बिश्वास के रूप में हुई है. वह कृष्णानगर अक्षय विद्यापीठ में क्लास 8 की छात्रा है. उसके पिता ने बताया कि कुछ दिनों पहले उसने गले में दर्द की बात बताई थी. एक दिन वह खाना खाते हुए बेहोश भी हो गई थी. फिर बच्ची को हॉस्पिटल ले जाया गया. डॉक्टरों ने जांच में उसके गले में सुई फंसे होने की बात बताई.


हालांकि, बच्ची के पिता अधीर बिश्वास इस बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं कि उनकी बेटी के गले में सुइयां कैसे चुभी? फिलहाल, डॉक्टरों ने सुर्जरी से निकाले गई सुइयों को इंटाली थाने को सौंप दिया है. पुलिस जांच में जुटी है.


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इंडिगो फ्लाइट में सांस की समस्या के बाद हैदराबाद एयरपोर्ट पर बच्चे की मौत


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बेंगलुरू से पटना जा रहे एक विमान में बुधवार को चार महीने के एक बच्चे को सांस लेने में परेशानी महसूस हुई और हैदराबाद एयरपोर्ट पर उसकी मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि यह बच्चा अपने माता-पिता के साथ इंडिगो के विमान में बेंगलुरू से सफर कर रहा था.ये भी पढ़ेंः गर्लफ्रेंड के लिए उड़ाई प्लेन हाईजैक की अफवाह, नो फ्लाई लिस्ट में हुआ शामिल


एयरलाइन ने कहा है कि उड़ान 6 ई 897 के चालक दल के सदस्यों ने बच्चे की तबियत बिगड़ने पर विमान को हैदराबाद ले जाने का फैसला किया और एयरपोर्ट पर एक एंबुलेंस और एक डॉक्टर मुहैया कराने के लिए कहा.


पुलिस ने बताया कि विमान के उतरने पर बच्चे को एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मामला दर्ज किया है.ये भी पढ़ेंः क्यूबा में टेकऑफ के तुरंत बाद विमान में लगी आग, 110 यात्री थे सवार, 3 को बचाया गया


एयरपोर्ट सूत्रों ने बताया कि मेडिकल हेल्प को लेकर सुबह करीब साढ़े सात बजे विमान को हैदराबाद की ओर मोड़ा गया. बयान में कहा गया है कि चालक दल के सदस्यों ने विमान में मौजूद एक डॉक्टर के साथ बच्चे की देखभाल की. विमान के उतरने पर बच्चे को एक इंडिगो स्टाफ के साथ फौरन ही अस्पताल ले जाया गया लेकिन दुर्भाग्य से उसकी मौत हो गई. एयरलाइन ने शिशु की मौत पर संवेदना प्रकट की है.


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BJP से नाराज़ ममता ने की सुषमा-राजनाथ की तारीफ, कहा- आलू और आलू चिप्स बराबर नहीं होते


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असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की दूसरी और फाइनल लिस्ट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बाकी विपक्षी दलों के बीच खींचतान तेज हो गई है. NRC की दूसरी लिस्ट में 40 लाख लोगों का नाम नहीं होने पर पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ जोरदार तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद की है.हालांकि, ममता बनर्जी ने बीजेपी के विभिन्न नेताओं में अंतर का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैं नहीं कह रहीं हूं कि सभी लोग खराब हैं. सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह अच्छे हैं. आलू और आलू चिप्स बराबर नहीं हो सकता.’


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राजनाथ ने ममता को दिया ये भरोसा
राजनाथ सिंह ने ममता से कहा कि असम में एनआरसी को अपडेट करना पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया है. उन्होंने ममता को भरोसा दिलाया कि एनआरसी प्रक्रिया में किसी को भी परेशान नहीं किया जाएगा. सभी को पर्याप्त मौका दिया जाएगा.


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ममता ने दी थी सिविल वॉर की चेतावनी
बता दें कि असम के एनआरसी के दूसरे और फाइनल ड्राफ्ट में 40 लोगों का नाम नहीं होने को लेकर ममता बनर्जी ने देश में सिविल वॉर की चेतावनी दी थी. जिसे लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है.


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डिब्रुगढ़ में शिकायत दर्ज
असम एनआरसी मुद्दे पर दिए गए बंगाल सीएम के इस बयान को लेकर डिब्रुगढ़ जिले के नाहरकटिया पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है. ममता पर प्रदेश की सांप्रदायिक सद्भावना को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप लगाया गया है. पुलिस ने फिलहाल केस दर्ज नहीं किया है.


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कुवैत में रहने वाले भारतीय ने जीती साढ़े ढः करोड़ से ज़्यादा की ड्यूटी फ्री लॉटरी


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कुवैत में रहने वाले एक भारतीय संदीप मेनन ने दुबई में दस लाख डॉलर यानी करीब पौने सात करोड़ की ड्यूटी फ्री लॉटरी जीती है. खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 1999 में इसकी शुरुआत से ही संदीप मेनन 132वें भारतीय हैं जिन्होंने इतनी बड़ी रकम की लॉटरी जीती है.ये भी पढ़ेंः महिला ने जीती 35 अरब रुपये की लॉटरी लेकिन…


मेनन ने कहा, “मैंने कभी भी अपनी ज़िंदगी में कुछ नहीं जीता खासकर इतनी बड़ी कोई चीज़. मैं ‘दुबई ड्यूटी फ्री’ का इसके लिए अहसानमंद हूं.” दुबई में रहने वाले एक दूसरे भारतीय सांथी बोस ने बीएमडब्ल्यू आर नाइन टी स्क्रैंबलर मोटरबाइक जीती है. दुबई में ही रहने वाले मिस्र के एक नागरिक होसाम हुसैन ने भी एक आरामदायक वाहन जीता है.


ये भी पढ़ेंः ढाबा मालिक की लगी एक करोड़ की लॉटरी, पहले लकी ड्रॉ में जीती थी नैनो कारशारजाह में बसे एक भारतीय मिस्त्री ने दुबई ड्यूटी फ्री मिलेनियम मिलियनेयर ड्रॉ में मंगलवार को दस लाख डॉलर का इनाम जीता था. आंकड़ों के अनुसार यूएई के के दो सबसे बड़े लॉटरी ड्रॉ में जीतने वाले भारतीय नागरिक सबसे ज़्यादा भाग्यशाली रहे हैं.


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कर्ज के महंगा होने के आसार, मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा आरबीआइ


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नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकार से लेकर उद्योग जगत तक और छोटे कारोबारी से लेकर आम जनता तक, सभी की नजर बुधवार को आरबीआइ गवर्नर की तरफ से घोषित की जाने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा पर है। बाजार में इस बात को लेकर कयासों का दौर गर्म है कि मौद्रिक नीति तय करने के लिए गठित समिति (एमपीसी) ब्याज दरों पर क्या फैसला करती है।


जहां तक विशेषज्ञों का सवाल है तो वह इस पर विभाजित नजर आते हैं। कई जानकार मानते हैं कि महंगाई के तेवर को देखते हुए रेपो रेट में 25 आधार अंकों (0.25 फीसद) की बढ़ोतरी हो सकती है जबकि कुछ विशेषज्ञ यह मानते हैं कि आर्थिक विकास दर को बनाये रखने के लिए हो सकता है कि ब्याज दरों को फिलहाल मौजूदा स्तर पर ही बनाये रखने पर सहमति बन जाए।


एमपीसी सोमवार से ही मौद्रिक नीति पर बहस कर रही है। एमपीसी अध्यक्ष आरबीआइ के गवर्नर उर्जित पटेल हैं जो बुधवार को फैसले का ऐलान करेंगे। कोटक इक्विटीज के वरिष्ठ अर्थशास्त्री सुवोदीप रक्षित के मुताबिक महंगाई के तेवर को देखते हुए रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि संभव है।


महंगाई की दर लगातार चार फीसद से उपर या पांच फीसद के करीब बनी हुई है। मध्यवर्ती उत्पादों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है जिसका असर आने वाले दिनों में तैयार उत्पादों की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। इसके साथ ही भारतीय रुपये को लेकर चिंता भी लगातार बनी हुई है। इसके अलावा एक अन्य कारण एमएसपी में वृद्धि का फैसला भी है जो आगे चल कर महंगाई को और हवा दे सकती है।




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एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख अर्थशास्त्री धनंजय सिन्हा भी मानते हैं कि रेपो रेट (वह दर जिस पर वाणिज्यिक बैंक अल्पावधि जरूरतों के लिए आरबीआइ से कर्ज लेते हैं) में 0.25 फीसद की वृद्धि होगी। यह दर अभी 6.25 फीसद है जो बढ़ कर 6.5 फीसद हो सकती है। उनका यह भी मानना है कि वित्त वर्ष के शेष महीनों में रेपो रेट में 50 आधार अंकों की वृद्धि संभव है।


एक तरह से बुधवार को मौद्रिक नीति से यह साफ हो जाएगा कि ब्याज दरों को लेकर आरबीआइ अब तटस्थ की भूमिका में नहीं रहेगा बल्कि महंगाई को थामने के लिए वह ज्यादा आक्रामक रुख अपनाएगा। सनद रहे कि जून, 2018 में आरबीआइ ने चार वर्षो के बाद रेपो रेट को बढ़ाया था और इस बात के संकेत दिए थे कि महंगाई को लेकर हालात आने वाले दिनों में चुनौतीपूर्ण रहेंगे।


हालांकि एचडीएफसी के अर्थशास्त्री अभीक बरूआ का कहना है कि एमपीसी अभी इंतजार करने के मूड में होगा और ब्याज दरों के मौजूदा स्तर को ही बनाये रखा जाएगा। उनका मानना है कि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने और रुपये में स्थिरता के मद्देनजर भी यह उम्मीद है कि आरबीआइ ब्याज दरों को लेकर तेजी से कोई फैसला नहीं करेगा।



By Vikas Jangra


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ममता ने राजनाथ से की मुलाकात पूछा, क्या केन्द्र प. बंगाल में भी चाहता है NRC?


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ममता बनर्जी ने गृहमंत्री से पूछा कि क्या वो असम की तरह पश्चिम बंगाल में भी एनआरसी तैयार करना चाहते है. मंगलवार को प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या केंद्र सरकार असम की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी (एनआरसी) तैयार करने की कवायद चाह रही है.ममता ने असम में एनआरसी तैयार करने की कवायद के लिए बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए लोगों को बांटने का आरोप लगाया है. दिल्ली में ममता ने मंगलवार को राजनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की और दावा किया कि उन्होंने उन 40 लाख लोगों के नाम उन्हें सौंपे हैं जिनके नाम सोमवार को एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं किए गए.


ममता ने राजनाथ से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं यहां एनआरसी पर बात करने के लिए आई हूं. उन 40 लाख लोगों के नाम सौंपे जिनके नाम छूट गए हैं. मैंने उन्हें बताया कि उनका नेतृत्व दावा कर रहा है कि अगला एनआरसी बंगाल में बनेगा. उन्हें किसने अधिकार दिया है?’’


ये भी पढ़ें: असम NRC मुद्दाः ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज, सिविल वॉर की दी थी चेतावनीएनआरसी लाने के फैसले को ‘‘आपदा’’ करार देते हुए ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की कि वह असम के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए संशोधन करें. बाद में गृह मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि एनआरसी का मसौदा असम समझौते के प्रावधानों के मुताबिक और सु्प्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार किया गया है.


राजनाथ ने बयान में कहा, ‘‘मैंने ममता से कहा कि एनआरसी का मसौदा असम समझौते के प्रावधानों के मुताबिक और केंद्र, असम की राज्य सरकार और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के बीच एनआरसी 1951 को अद्यतन करने के लिए पांच फरवरी 2005 को हुई त्रिपक्षीय बैठक में लिए गए फैसलों के मुताबिक प्रकाशित किया गया है. ’’


राजनाथ ने यह भी कहा कि उन्होंने ममता को बताया था कि एनआरसी की कवायद ‘‘पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी, गैर-भेदभावकारी और कानूनी तरीके’’ से अंजाम दी जा रही है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी को परेशान नहीं किया जाएगा और प्रक्रिया के हर चरण में सभी लोगों को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे.


सत्ताधारी बीजेपी ने ममता की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि वह अवैध प्रवासियों को वोट बैंक की तरह देखती हैं जबकि भाजपा देश की सुरक्षा एवं अपने नागरिकों के अधिकारों के लिए ज्यादा चिंतित है.


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TRAI चीफ आर एस शर्मा ने कहा- बेवजह आरोप संस्थान की गरिमा गिराते हैं


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ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने मंगलवार को कहा कि दूरसंचार उद्योग ने उनकी जो ‘उचित आलोचना’ की वह उन्हें स्वीकार है लेकिन बिना किसी सबूत के लगाए गए पक्षपात के आरोप उन्हें परेशान करते हैं. इससे संस्थान की गरिमा भी कम होती है.शर्मा नौ अगस्त को ट्राई प्रमुख के पद से रिटायर हो रहे हैं. एक इंटरव्यू में शर्मा ने दूरसंचार उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तो बातचीत की लेकिन पिछले हफ्ते आधार संख्या को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के विवाद पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी.


उल्लेखनीय है कि बीते शनिवार को शर्मा ने अपनी आधार संख्या जारी कर हैकरों को उन्हें नुकसान पहुंचाने की चुनौती दी थी. इसके बाद कई लोगों ने उनसे जुड़ी जानकारियां साझा की और कईयों ने उन्हें ट्रोल किया. हालांकि, शर्मा इस विवाद में खुद को एक ‘विजेता’ के तौर पर देखते हैं।


उनके कुछ फैसलों को लेकर दूरसंचार उद्योग से की गई ‘उचित आलोचना’ को वह अपनी तरक्की के तौर पर देखते हैं.गौरतलब है कि दूसरे नेटवर्क पर कॉल जुड़ने की दर में कमी, पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्ट की संख्या, नई कंपनी जियो के मुफ्त कॉल की शुरुआती पेशकश को अनुमति देने और बाजार बिगाड़ू मूल्य निर्धारण नियम से जुड़े अपने फैसलों को लेकर शर्मा को दूरसंचार उद्योग की काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था.


शर्मा ने कहा, ‘‘पक्षपात का निराधार आरोप लगाना अच्छी बात नहीं है. हां उचित आलोचना सही है. लेकिन पक्षपाती होने के बेसिरपैर के आरोप सही नहीं है.’’


ट्राई के चेयरमैन ने कहा कि यदि किसी पक्ष को नियामक के निर्णय सही नहीं लगते हैं तो वह कानूनी रास्ता अख्तियार कर सकता है. इसलिए उनका मानना है कि आलोचना करने और आरोप लगाकर उसे प्रचार का मुद्दा बनाने से बेहतर है कि सही कानूनी मंच पर वह पक्ष अपनी बात रखे. कई पक्ष बहुत से मसलों पर अपनी चिंताओं को लेकर अदालत गए और अदालत ने उन पर अपना फैसला दिया.


आरोपों से विचलित होने के प्रश्न पर शर्मा ने कहा कि निश्चित तौर पर यह परेशान करते हैं. साथ ही निराधार आरोप संस्थान की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं.


शर्मा ने कहा कि ग्राहक हित के प्रति ट्राई के ज्यादा दृढ़ रहने का यह मतलब कतई नहीं कि वह उद्योग के खिलाफ काम कर रहा है. संस्थान एक ढांचे के तहत काम करता है और हम उसे बहुत ज्यादा खींच नहीं सकते.


उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरुआत में दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनियों के संगठन सीओएआई ने मौजूदा दूरसंचार नियामक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि नया ट्राई प्रमुख और नियामक ऐसा होना चाहिए जो अपने अधिकार क्षेत्र और सीमाओं को समझता हो. उन्हें उद्योग और ग्राहक कल्याण के बीच संतुलन रखना चाहिए.


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NRC से बाहर हुए 40 लाख लोगों के बायोमीट्रिक डाटा लेने पर विचार कर रहा है केंद्र


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केंद्र ने मंगलवार को सु्प्रीम कोर्ट से कहा कि वह उन 40 लाख लोगों के बायोमीट्रिक्स का ब्यौरा लेने पर विचार कर रहा है जिनके नाम असम में एनआरसी के अंतिम मसौदा में शामिल नहीं हैं. ताकि गलत पहचान के आधार पर अन्य राज्यों में उनके प्रवेश को रोका जा सके.केंद्र की ओर से उपस्थित अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर.एफ. नरीमन की पीठ से कहा कि पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों ने आशंका जताई है कि वैसे लोग जिनके नाम एनआरसी के दूसरे और अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, वे अन्य राज्यों में पलायन कर सकते हैं.


वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘उन राज्यों की आशंकाओं को दूर करने के लिये सरकार 40 लाख से अधिक लोगों का बायोमीट्रिक डाटा एकत्र करने पर विचार कर रही है, ताकि अगर उन्हें विदेशी घोषित किया जाता है और वे गलत पहचान के आधार पर दूसरे राज्यों में चले जाते हैं तो संबंधित अधिकारी उनका पता लगा सकें.’’


इस पर पीठ ने कहा कि सरकार जो भी करना चाहती है वो कर सकती है और न्यायालय इसकी जांच करेगा. पीठ ने कहा, ‘‘आप जो भी चाहें करें, फिलहाल हम टिप्पणी करना नहीं चाहेंगे. आप इसे करें और तब हम इसकी जांच करेंगे. हमारी चुप्पी सहमति या आश्वासन का प्रतीक नहीं है.’’ये भी पढ़ें: NRC मुद्दे पर संसद में कांग्रेस का विरोध तुष्टिकरण की घटिया राजनीति: केशव प्रसाद मौर्य


शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन 40 लाख से अधिक लोगों के नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी क्योंकि यह सिर्फ मसौदा है. पीठ ने केंद्र को दावों और मसौदा एनआरसी के प्रकाशन से उपजी आपत्तियों पर फैसला करने के लिये समय-सीमा तय करने समेत इसका स्वरूप और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने को कहा.


पीठ ने केंद्र से इसके तौर-तरीके और एसओपी 16 अगस्त तक मंजूरी के लिये उसे सौंपने को कहा. सुनवाई के अंत में ट्रांसजेंडरों के एक संगठन ने पीठ से अनुरोध किया कि वह 20 हजार ट्रांसजेंडरों को एनआरसी फॉर्म भरने का दूसरा मौका दे.


पीठ ने कहा, ‘‘आपने मौका गंवा दिया. हम समूची कवायद को अब दोबारा शुरू नहीं कर सकते.’’ कोर्ट ने हालांकि कहा कि वह मुख्य मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 16 अगस्त को सभी वादकालीन आवेदनों (इंटरलोक्यूटरी ऐप्लिकेशन) पर सुनवाई करेगा.


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