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(सुहास मुंशी)वॉल्टर के एंडरसन और श्रीधर दामले द्वारा आरएसएस पर लिखी गई किताब ‘आरएसएसः ए व्यू टू द इनसाइड’ में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी के बीच गठबंधन तोड़ने का मुख्य कारण पूरे देश में खासकर जम्मू कश्मीर में हिंदुओं को लुभाना था. दरअसल उस समय घाटी में बढ़ रही हिंसा के कारण हिंदू मतदाताओं वाले जम्मू और मुस्लिम बाहुल्य वाले कश्मीर के बीच बढ़ रहे तनाव को देखते हुए आरएसएस की सहमति से बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ लिया. इस कदम से बीजेपी ने अपनी राष्ट्रवादी छवि को सुरक्षित रखने की कोशिश की.
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किताब में कहा गया कि आरएसएस द्वारा जुटाई गई सूचना के अनुसार घाटी में जारी हिंसा और कथित तौर पर महबूबा सरकार द्वारा मुस्लिम बाहुल्य वाले कश्मीर के लिए पक्षपात करने के कारण हिंदुओं में सरकार के प्रति विश्वास की कमी हो रही थी.आगे इसमें कहा गया कि आम चुनाव को नज़दीक आता देख बीजेपी ने पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया और राज्यपाल शासन लागू कर दिया. चूंकि बीजेपी का वोट आधार काफी कुछ जम्मू क्षेत्र तक ही सिमटा हुआ है इसलिए अगर बीजेपी को जम्मू कश्मीर में सरकार बनाना है तो किसी पार्टी मिलकर ही बनाना पड़ेगा खासकर ऐसी पार्टी जिसका कश्मीर क्षेत्र में वोट बैंक हो.
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पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ते वक्त बीजेपी नेता राम माधव ने कहा था कि उनकी पार्टी खराब होती कानून व्यवस्था, रमज़ान के दौरान सीज़फायर के उल्लंघन होने, जम्मू और लद्दाख के बीच भेदभाव करने और शुजात बुखारी की हत्या के कारण पीडीपी से गठबंधन तोड़ रही है.
किताब में यह भी बताया गया है कि बीजेपी को पीडीपी के साथ गठबंधन करने के लिए आरएसएस ने इसलिए स्वीकृति दी क्योंकि इससे भारत का एकमात्र मुस्लिम बाहुल्य राज्य भारतीय संघ के और अधिक नज़दीक आ जाएगा.
आरएसएस को लगता था कि इससे राष्ट्रीय एकीकरण और अधिक बल मिलेगा और हिंदुत्व सभी लोगों को साथ लेकर चलने में कहीं ज्यादा सक्षम होगा. इसलिए बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 को भी को खत्म करने के अपने वादे को भी किनारे रख दिया और गठबंधन की घोषणा के साथ ही पीडीपी के साथ मिलकर एक साझा गाइडलाइन की घोषणा की.
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इन्ही कारणों से आरएसएस ने वो बातें भी कहीं जो कि अमूमन उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाती जैसे- ‘बीफ खान वाले लोग भी आरएसएस का हिस्सा बन सकते हैं’ या कि ‘समलैंगिकता को कानूनी अपराध नहीं माना जाना चाहिए.’
आरएसएस ने गठबंधन का समर्थन किया ताकि राज्य के मुसलमानों को राष्ट्र की मूलधारा मे लाया जा सके और बीजेपी की पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने की महत्वाकांक्षा को बल मिल सके और .
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