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राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रर (एनआरसी) के मसौदे में सेना में सालों देश की सेवा करने वाले जांबाज अजमल हक़ का नाम भी नहीं है. हाल में ही सेना के इस रिटायर्ड अधिकारी को फारेनर्स ट्रिब्यूनल में तलब किया गया था. उनसे अपनी नागरिकता के प्रमाण भी मांगे गए थे. ये भी कम दिलचस्प नहीं है कि उनके परिवार के तीन लोगों के नाम इस रजिस्टर में शामिल किए गए हैं.इसी तरह बीजेपी के एक विधायक अनंत कुमार मालो का नाम भी एनआरसी में नहीं है. मालो दक्षिण अभयपुरी के विधायक हैं.
उल्फा के चीफ रहे परेश बरुआ का नाम इस लिस्ट में है. उसके बारे में बताया जा रहा है कि वो कहीं विदेश में भूमिगत जीवन जी रहा है. जबकि उसकी पत्नी और बच्चों के नाम इसमें नहीं हैं. उल्फा नेता के बच्चे यहीं पैदा हुए हैं. इस कारण उनके और बरुआ की बीवी के नाम होने चाहिए थे.
इसी तरह देश के पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के भतीजे जियाउद्दीन अली अहमद का नाम भी एनआरसी में नहीं आया. उनका कहना है कि जरूरी दस्तावेज जिन्हें लिगेसी के तौर पर जमा करना था वे नहीं कर सके. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कुछ करेगी. जियाउद्दीन अली के पिता एकरामुद्दीन अली अहमद पूर्व राष्ट्रपति के भाई बताए जा रहे हैं. उनका परिवार असम के कामरुप जिले में रंगिया गांव में रहता है.हालांकि प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि इस मसौदे में जिन लोगों के नाम नहीं है उन्हें जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के लिए मौका दिया जाएगा, लेकिन बहुत से लोगों की चिंता ये है कि बाढ़ और दूसरी आपदाओं में उनके दस्तावेज गायब हो चुके हैं.
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/russia-and-slowakia-enters-in-euro-2016-416978.html
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