Monday, 30 July 2018

देश में 'कृषि और संबद्ध क्षेत्रों' का चैंपियन है उत्तर प्रदेश


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नई दिल्ली [हरिकिशन शर्मा]। औद्योगिक विकास के मामले में उत्तर प्रदेश भले ही पिछड़ा हो लेकिन खेती-बाड़ी के मामले में राज्य सबसे आगे है। सरकार की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में ‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों’ के उत्पादन मूल्य के मामले में यूपी शीर्ष पर स्थान पर है। चौंकाने वाली बात यह है कि जलवायु के हिसाब से खेती के अनुकूल न माने जाने वाला राजस्थान इस मामले में दूसरे नंबर पर है। वहीं हरित क्रांति के गढ़ पंजाब व हरियाणा इस मामले में काफी पीछे हैं।


केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सोमवार को ‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों’ के उत्पादन मूल्य के राज्यवार आंकड़ों पर एक रिपोर्ट जारी की। इसमें 2011-12 से 2015-16 के दौरान देश में विभिन्न फसलों, पशुपालन और मत्स्यन से होने वाले कुल उत्पादन के मूल्य का राज्यवार आकलन पेश किया है।


रिपोर्ट से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2015-16 में देश में ‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों’ का कुल उत्पादन मूल्य 20 लाख करोड़ रुपये था जिसमें सर्वाधिक 2.65 लाख करोड़ रुपये (13 प्रतिशत) योगदान उत्तर प्रदेश का है। गंगा-यमुना दोआब में फैले यूपी की जमीन काफी उपजाऊ है, इसलिए इसका खेती के मामले में शीर्ष पर होना लाजिमी है।

हालांकि सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस मामले में दूसरा स्थान राजस्थान का है जहां ‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों’ का उत्पादन मूल्य 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और राष्ट्रीय स्तर पर यह राज्य 9 फीसदी से अधिक योगदान करता है। 2011-12 में राजस्थान इस मामले में महाराष्ट्र से भी पीछे था लेकिन 2015-16 में यह आगे निकल गया।


राजस्थान में बारिश कम होती है और पानी की उपलब्धता भी उतनी नहीं है। इसलिए यह क्षेत्र खेती-बाड़ी के लिए उतना मुफीद नहीं है। महाराष्ट्र अब तीसरे नंबर पर और मध्य प्रदेश चौथे नंबर पर हैं। वहीं गुजरात पांचवें नंबर पर है। एमपी ने हाल के वर्षो में खेती-बाड़ी को बढ़ावा देने के कई प्रयास किए हैं और इसका असर भी देखने को मिला है। वर्ष 2011-12 में गुजरात और पश्चिम बंगाल से पीछे रहने वाला एमपी 2015-16 में इन दोनों राज्यों से आगे निकल गया है।




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सीएसओ की इस रिपोर्ट से यह तथ्य भी उजागर होता है कि हरित क्रांति के गढ़ पंजाब और हरियाणा का देश के ‘कृषि और संबद्ध क्षेत्रों’ के कुल उत्पादन में योगदान अपेक्षाकृत कम है। इन दोनों राज्यों का योगदान चार-पांच प्रतिशत के आस-पास है। हाल के वर्षो में दोनों राज्यों का योगदान घटता जा रहा है। इसी तरह बिहार का योगदान भी महज चार प्रतिशत के आस-पास है। बिहार की उपजाऊ जमीन और जल की प्रचुर उपलब्धता के बावजूद राज्य का इस मामले में पीछे रहना चौंकाने वाली बात है। वहीं छत्तीसगढ़ और झारखंड का योगदान दो प्रतिशत से भी नीचे है।


वर्ष 2015-16 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का उत्पादन मूल्य (करोड़ रुपये में)
राज्य कृषि-संबद्ध क्षेत्र उत्पाद मूल्य
उत्तर प्रदेश 265,701 12.83
राजस्थान 186,686 9.02
महाराष्ट्र 175,157 8.46
मध्य प्रदेश 154,065 7.44
गुजरात 150,791 7.28
पश्चिम बंगाल150,332 7.26
आंध्र प्रदेश 135,400 6.54
तमिलनाडु 124,049 5.99
पंजाब 97,590 4.71
कर्नाटक 93,707 4.53
बिहार 82,486 3.98
हरियाणा 80,818 3.90
तेलंगाना 63664 3.07
केरल 52,187 2.52
ओडिशा 51,691 2.50
असम 42,581 2.06
छत्तीसगढ़ 41,153 1.99
झारखंड 29,976 1.45
हिमाचल 19149 0.92
जम्मू कश्मीर 18,559 0.90
उत्तराखंड 16,224 0.78


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By Vikas Jangra


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/russia-and-slowakia-enters-in-euro-2016-416978.html

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