Tuesday, 31 July 2018

जानिये क्या है आधार नंबर से बैंक अकाउंट हैक किए जाने की सच्चाई?


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आरएस शर्मा, TRAI (टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के चेयरमैन हैं. उन्होंने शनिवार को अपना आधार नंबर ट्विटर पर शेयर किया था. जिसके बाद से कई लोगों ने उनका बैंक अकाउंट हैक करने की कोशिश की है. अब यह बहस उठ गई है कि क्या आपके आधार से आपका बैंक अकाउंट हैक किया जा सकता है? विशेषज्ञ मानते हैं कि आरएस शर्मा इन मामलों के जानकार हैं और उनका सरकार के कई तकनीकी मामलों में दखल भी है. ऐसे में उनका अकाउंट हैक करना मुश्किल है. जबकि साधारण इंसान का बैंक अकाउंट हैक करना उतना मुश्किल नहीं होगा. आइये जानते हैं कि आधार नंबर शेयर करना कितना खतरनाक हो सकता है? और क्या इससे बैंक अकाउंट हैक किया जा सकता है?यूं हुई थी मामले की शुरुआत
कुछ दिन पहले ‘द प्रिंट’ से बातचीत में ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा ने कहा था, “आधार प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं करता है और सरकार को हक है कि वे नागरिकों का पर्सनल प्रोफाइल बनाए क्योंकि वह उन्हें सब्सिडी देती है.” इसके बाद एक ट्विटर यूजर ने आरएस शर्मा को अपनी आधार डीटेल्स शेयर करने के लिए चैलेंज किया. और आरएस शर्मा ने अपनी आधार डीटेल्स शेयर कर दीं.


जिसके बाद लोगों ने आरएस शर्मा से जुड़ी कई पर्सनल डीटेल्स उनके ट्वीट के जवाब में पोस्ट करनी शुरू कर दीं. जिसमें उनके मोबाइल नंबर, पैन नंबर, बैंक अकाउंट डीटेल्स, कुछ पर्सनल तस्वीरें, फ्रीक्वेंट फ्लायर नंबर (एक तरह का हवाई यात्रा आईडी नं.) और ईमेल से जुड़ी कुछ जानकारियां थीं. इसके अलावा उनके बैंक अकाउंट में एक यूजर ने एक रुपया भी भेजा.फिलहाल आरएस शर्मा की बेटी को ईमेल के जरिये धमकी मिली है और उनसे फिरौती की मांग की गई है. साथ ही आरएस शर्मा ने खुद भी कई सारे स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं, जिसमें उनके अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट की जा रही है. यहां तक कि किसी ने उनके लिए एक वनप्लस 6 फोन, कैश ऑन डिलीवरी पर ऑर्डर कर दिया.


आधार ने किया था बचाव
इस घटनाक्रम के बीच आधार की रेगुलेटरी बॉडी UIDAI ने रविवार को एक बयान जारी किया. जिसमें कहा गया है कि कई लोगों के TRAI चेयरमैन आरएस शर्मा के आधार नंबर को यूज करके उनकी पर्सनल डीटेल्स पाने के दावे गलत हैं. यह सारी डीटेल्स पहले से पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं और बिना आधार कार्ड के भी पाई जा सकती हैं.


बयान में कहा गया था, “UIDAI ट्विटर पर कुछ तत्वों के और मीडिया के एक हिस्से के ऐसे दावों को पूरी तरह से खारिज करता है, जिनमें कहा गया है कि आरएस शर्मा जो कि एक पब्लिक सर्वेंट भी हैं के पर्सनल डेटा को उनके आधार नंबर का प्रयोग करके पाया गया है.” UIDAI ने अपने बयान में यह भी कहा, “UIDAI ऐसी किसी भी कोशिश की निंदा करता है जिसमें कुछ लोग दुनिया के सबसे बड़े यूनिक आईडेंटिटी प्रोजेक्ट की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. आधार ने लोगों के अंदर डिजिटल विश्वास बड़े स्तर पर बनाया है और ये तत्व गलत जानकारियां फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.”



आर.एस शर्मा, ट्राई चीफ (File Photo)

आरएस शर्मा ने भी दिया जवाब
इसके बाद आरएस शर्मा ने भी कहा कि उनकी कोई भी जानकारी आधार का प्रयोग कर हासिल नहीं की गई है. साथ ही उन्होंने EPFO डाटा लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि हर तरह से लीक होने वाले डेटा को आधार से नहीं जोड़ा जाना चाहिये. दरअसल कुछ दिनों पहले EPFO लाभार्थियों का डाटा लीक हुआ था. आरएस शर्मा ने कहा, “इसमें लोगों के आधार नंबर भी थे. लेकिन ये आधार नंबर के चलते लीक नहीं हुआ था.”


उन्होंने लिखा, “आधार केवल ऑथेंटिकेशन सर्विस के तौर पर काम करता है. और ऐसा करते हुये UIDAI को यह नहीं पता होता कि उसे कहां-कहां लिंक किया गया है या यूज किया जा रहा है.” आरएस शर्मा ने आरोप लगाया कि लोग दूसरे माध्यमों से लीक होने वाले डेटा को भी आधार लीक से जोड़ लेते हैं.


लेकिन जानकार मान रहे हैं गैरजिम्मेदार और खतरनाक
वहीं डिजिटल एक्टिविस्ट और मीडियानामा के संस्थापक निखिल पाहवा ने आरएस शर्मा के अपनी आधार डीटेल्स को पब्लिक करने के कदम को न केवल गैरजिम्मेदार बताया है बल्कि खतरनाक भी कहा है. निखिल लिखते हैं कि आरएस शर्मा टेक्नोलॉजी को समझते हैं. लेकिन बहुत से लोग नहीं समझते. वे भी आधार नंबर पब्लिक कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि आरएस शर्मा की कई सारी ऐसी जानकारियां भी हैं जो पब्लिक नहीं थीं और लोगों ने उन्हें खोज निकाला है. निखिल बताते हैं, “आरएस शर्मा की बैंक अकाउंट डीटेल्स और फ्रीक्वेंट फ्लायर नंबर पब्लिक डोमेन में मौजूद रहे हों ऐसा नहीं है. इन्हें निकाला गया है. किसी ने एअर इंडिया चैटबॉट में जाकर उनका डेट ऑफ बर्थ और मोबाइल नंबर देकर फ्रीक्वेंट फ्लायर आईडी हासिल की है.” निखिल यह भी कहते हैं कि इसी तरह मोबाइल नंबर, आधार नंबर और डेट ऑफ बर्थ देकर आपका एटीएम पिन भी बदला जा सकता है. ऐसे में आपके आधार नंबर की जानकारी किसी के पास होना खतरनाक है.



निखिल पाहवा, फोटो क्रेडिट – यूट्यूब

अगर आधार सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं फिर भी हो सकता है नुकसान
निखिल ने कहा कि जरूरी नहीं आरएस शर्मा से जुड़ी जानकारियां आधार के जरिए ही पाई गई हों. लेकिन इन जानकारियों के साथ आधार से जुड़ी जानकारी भी अगर किसी के पास है तो ये खतरनाक है. वे इसका कारण आधार का कई व्यवस्थाओं से जुड़ा होना बताते हैं. वे कहते हैं कि भले ही आधार ऑथेंटिकेशन और सिटिजनशिप के लिए जरूरी न हो. लेकिन आज इससे लोगों के बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर जुड़े हैं. कभी अगर आपका पैन नंबर या वोटर आईडी की डीटेल्स लीक हो जाती हैं तो इससे आपकी दूसरी डीटेल्स नहीं पता चलती. क्योंकि ये सारे किसी कार्य विशेष के लिये बने हैं (जैसे : वोट डालने या इनकम टैक्स भरने). लेकिन आधार से आपकी इंप्लायमेंट हिस्ट्री और क्रेडिट हिस्ट्री के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है.


साथ ही निखिल पाहवा ने यह भी बताया कि आरएस शर्मा के जीमेल पर पासवर्ड रीसेट करने के लिए उनका फ्लायर नंबर भी सिक्योरिटी क्वेश्चन्स में से एक है. ऐसे में कोई इसका प्रयोग कर ट्राई चेयरमैन की कई सारी जानकारियां हासिल कर सकता था. और उनका गलत प्रयोग भी कर सकता था. ऐसे में इन जानकारियों को साधारण कहना गलत है.


गैरकानूनी भी है आधार डीटेल शेयर करना
निखिल ने यह भी कहा कि आरएस शर्मा UIDIA के फाउंडिंग CEO हैं. हाल ही में उनका नाम DPAI (डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की शुरुआत के बाद, इसका पहला चेयरमैन बनाने के लिये भी सामने आया था. ऐसे में अगर आरएस शर्मा को कोई नुकसान नहीं होता तो यह माना जायेगा कि ऐसी डीटेल्स को शेयर करने में कोई ख़तरा नहीं है. और इसके बाद और लोग भी आधार नंबर शेयर करने लगेंगे. जबकि साधारण इंसान को इससे बहुत नुकसान हो सकता है.



वैसे बताते चलें कि आरएस शर्मा के ट्वीट के बाद कुछ और लोगों ने भी अपने आधार नंबर शेयर किए हैं. जिनमें से कुछ के ट्वीट्स को आरएस शर्मा ने रीट्वीट भी किया है. वहीं आधार से संबंधित कानून की धारा 29 (4) के अनुसार आधार से जुड़ी डीटेल्स शेयर करना गैरकानूनी भी है.


निखिल पाहवा ने यह भी कहा कि अगर इतनी सारी जानकारियां पा जाने को साधारण बात कहा जायेगा तो लोग समझेंगे कि सारी जानकारियां ऑनलाइन मौजूद हैं और प्राइवेसी एक मिथक है. ऐसे में डिजिटल विश्वास हासिल करना असंभव हो जायेगा.



विशेषज्ञ मोबाइल ओटीपी की जगह चाहते हैं आधार की पंचिग कार्ड बेस्ड सेवा
12 जुलाई को न्यूज 18 से एक विशेष बातचीत में  ज्यां द्रेज ने ओटीपी बेस्ड आधार सेवा को झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे राज्यों की दूरस्थ जगहों के लिए फेल बताया था. उन्होंने इससे जुड़े कई आंकड़े पेश करते हुये सुझाया था कि उनके लिए किसी पंचिंग कार्ड जैसी व्यवस्था की जानी चाहिये. ताकि उन्हें खराब नेटवर्क, खराब इंटरनेट या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फेल होने की स्थिति में भी राशन पाने से वंचित न होना पड़े.


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