Tuesday, 31 July 2018

'नीची जाति का हूं इसलिए मकान नहीं मिल रहा'


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‘मेरे सरकारी मकान में चार से पांच फुट तक पानी भर चुका है. रसोई का सामान पानी में बह गया है. घर का ज्यादातर सामान पानी में खराब हो चुका है. छोटे-छोटे बच्चों को लेकर यहां से वहां मारा-मारा फिर रहा हूं. बारिश से बचने के लिए पांच दिन एक मंदिर के अहाते में रात गुजारी हैं. बाजार से खाना खरीदकर खा रहे हैं.किराए पर मकान लेने के लिए जाते हैं तो मेरी वाल्मीक जाति सुनकर लोग मकान देने से मना कर देते हैं. जो मकान मालिक थोड़ी देर पहले किराया तय कर रहा होता है, वह जाति सुनकर कहने लगता है कि कोई दूसरा इस कमरे में रहने के लिए आने वाला है.


हद तो उस वक्त हो गई जब हमारे रेलवे विभाग ने भी हमारी कोई सुनवाई नहीं की. यहां तक की रेलवे ने भी हमें दूसरी जगह रहने के लिए मकान देने से मना कर दिया. जबकि हमारे पिताजी रेलवे स्टेशन पर नौकरी करते हैं. ̓



कालोनी में भरा बारिश और नालों का पानी.

ये दर्द है युवा मनीष और उसकी मां राजवती का. मनीष के पिताजी मनोज आगरा, यूपी में राजा की मण्डी रेलवे स्टेशन पर तैनात हैं. उनका परिवार रेलवे की एक ऐतिहासिक कालोनी बिल्लोचपुरा में रहता है. पिछले दिनों आगरा में चार से पांच दिन तक खूब मूसलाधार बारिश हुई.



घर के कमरों तक में भर गया पानी.

बारिश के बाद रेलवे कालोनी में बने सभी घरों में अंदर तक पानी भर गया. पानी भरने के बाद रेलवे ने कोई सुध नहीं ली. मजबूरी में सभी कर्मचारी इधर-उधर किराए पर रहने पहुंच गए.



घर की रसोई के पास तक पहुंच गया पानी.

रेलवे के इंजीनियर आए, लेकिन मौका मुआयना करने के बाद भी कोई सतही काम नहीं किया. आज भी कालोनी में पानी भरा हुआ है.


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