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बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पीएस श्रीधरन पिल्लई को केरल में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है. इस साल मई में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुम्मनम राजशेखरन को मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था जिसके बाद से यह पद खाली पड़ा था.आरएसएस चाहता था कि प्रदेश में उसकी पसंद के व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया जाए जिसके चलते अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हुई. राजशेखरन के पद से हटने के बाद पार्टी राज्य के उग्रवाद, बारिश से तबाही और सबरीमला विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने में सफल नहीं हो पाई है.
ऐसा लग रहा है कि पिल्लई को चुनकर बीजेपी ने राज्य के अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश की है. बता दें कि पिल्लई किसी विशेष वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं. प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर यह पिल्लई का दूसरा कार्यकाल होगा. इससे पहले वह 2003 से 2006 के बीच इस पद पर रह चुके हैं.
जानेमाने वकील पिल्लई को बीजेपी के मॉडरेड (उदार) चेहरे के रूप में देखा जाता है. उनका झुकाव सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ है. विवादों से दूर रहते हुए वह अपनी साफ छवि बनाने में सफल हुए हैं.हालांकि, पार्टी के कई नेताओं को, खासकर वो जो आरएसएस से जुड़े हैं, को पिल्लई का नेतृत्व स्वीकार्य नहीं है क्योंकि वह बहुत जल्दी समझौता करने वालों में से एक हैं.
हाल ही में चेंगनुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान पिल्लई ने न्यूज 18 से कहा था कि उनकी पार्टी के नेताओं ने ही उन्हें हराने की कोशिश की थी. यहां उन्हें मिले वोटों में कमी आई और पिछले चुनाव में उन्हें 42 हजार वोट मिले थे जबकि इस बार 25 हजार के करीब. उनके दूसरे नंबर पर आने की उम्मीद थी लेकिन यह जगह भी कांग्रेस ने छीन ली.
राज्य की बात करें तो पिल्लई की छवि वाजपेयी के जमाने के वरिष्ठ नेता की है इससे वे लोग पार्टी के साथ आ सकते हैं जो पार्टी के साथ आना चाहते हैं लेकिन कट्टर छवि की वजह से दूर रहते हैं. उनकी बीजेपी के कोर वोट और क्रिश्चियन चर्च दोनों से बनती है. उनकी यह अच्छी छवि ठीक वैसे ही काम आ सकती है जैसे कि पार्टी के केरल से इकलौते विधायक ओ राजगोपाल के लिए आई थी. राजगोपाल नेमम सीट से विधायक हैं.
इसके बावजूद पार्टी में धड़ेबाजी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें इससे पार पाना होगा. न्यूज18 को पता चला है कि राज्य सभा सांसद वी मुरलीधरन ने विवादित नेता के सुरेंद्रन को अध्यक्ष बनाने की पैरवी की थी. लेकिन आरएसएस के चलते ऐसा नहीं हो पाया क्योंकि संघ उन्हें शक की नजरों से देखता है.
ऐसी अफवाहें भी थीं कि अमित शाह किसी बाहरी आरएसएस नेता या एक युवा नेता को जिम्मेदारी दे सकते हैं. हालांकि यह भी नहीं हुआ. आखिरकार पिल्लई ही सबसे काबिल उम्मीदवारे लगे. बीजेपी कम से कम तीन लोकसभा सीटें जीत सकती है मगर इसके लिए उसे लड़ना होगा. कई लोगों का सवाल है क्या पिल्लई पार्टी को एकजुट करने और आने वाले महीनलों में चुनाव के लिए तैयार कर पाने में तैयार होंगे.
इसकी वजह यह है कि आलाकमान को अभी भी भरोसा नहीं है. बीजेपी के सूत्र ऐसा बताते हैं कि इस साल के आखिर में मिजोरम चुनावों के बाद कुम्मानम को एनडीए चेयरमैन के रूप में वापस भी लाया जा सकता है. ऐसा मान सकते हैं कि इस तरह की योजना के पीछे संघ का दबाव होगा हालांकि आधिकारिक रूप से अभी कुछ नहीं कहा गया है.
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/russia-and-slowakia-enters-in-euro-2016-416978.html
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