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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 93 साल के अपने इतिहास में सिर्फ दो बार आम चुनावों के दौरान बीजेपी के पीछे पूरी ताकत लगाई थी और इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि 2019 के चुनाव में वह ऐसा करे. संघ पर हालिया आई किताब ‘आरएसएस: ए व्यू टू द इंसाइड’ में यह दावा किया है.इस किताब के मुताबिक, ‘आरएसएस ने बस वर्ष 1977 और 2014 में बीजेपी के पीछे अपनी ताकत झोंकी थी. पहली बार उस वक्त जब संघ को आशंका थी कि इंदिरा गांधी कभी ‘संघ को कभी बढ़ने’ नहीं होने देंगी. दूसरी बार संघ को फिक्र थी कि हिंदू आतंकवाद के मुद्दे पर कांग्रेस उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की तैयारी में है और इसी के मद्देनजर उसने 2014 के आम चुनावों में मोदी नीत बीजेपी को जिताने में पूरा जोर लगा दिया.’
इसके साथ ही वह कहते हैं, ‘दोनों ही दफे, ऐसा डर था कि कांग्रेस अगर सत्ता में बरकरार रही संघ के हिंदू एकता कार्यक्रम को गहरा आघात लग सकता है… हमें यह बताया गया है कि आरएसएस आने वाले वर्षों में बीजेपी को उस स्तर पर मदद देने को इच्छुक नहीं. संघ चाहता है कि बीजेपी सहित उसके दूसरे आनुषंगिक संगठन अपने कार्यकर्ताओं को खुद ट्रेनिंग दें और इसी के बाद बीजेपी ने बूथ स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना भी शुरू कर दिया है.’
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/india-vs-zimbabwe-team-india-kl-rahul-jasprit-bumrah-super-game-2-489323.html
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