READ MOREयादवेंद्र सिंह
पंजाब सरकार के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का कहना है कि चाहे उनकी जितनी भी आलोचना हो, लेकिन करतारपुर साहिब के दर्शन अरदास के लिए पाकिस्तान की सीमा खोली जाना चाहिए. उनका कहना है कि वे अमन का संदेश ले कर गए थे और अब उसका असर दिखने लगा है. उनका ये भी कहना है कि वे किसी की भी आलोचना नहीं करना चाहते, न ही किसी तरह की क्रडिट लेना चाहते है.उनका संकेत भारतीय दूतावास के अधिकारियों की करतारपुर साहिब की यात्रा की ओर था. न्यूज 18 से खास बातचीत में उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि गुरु की डिक्शनरी में असंभव कुछ भी नहीं होता. सिद्धू ने कहा कि ये किसी एक का मुद्दा नहीं है, बल्कि साझा मुद्दा है. हलचल शुरू हो चुकी है और जल्द ही इसे हकीकत में तब्दील होते देखा जा सकेगा.
ये भी पढ़ें : पाकिस्तानी सेना प्रमुख के गले मिले, PoK के राष्ट्रपति के बगल में बैठे सिद्धूगुरु नानकदेव की शिक्षा और गुरुवाणी का हवाला देते हुए सिद्धू ने कहा कि करतारपुर साहिब मसले से फासले दूर खत्म होंंगे. श्रद्धा को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि जो प्रयास शुरु हुए हैं वो सब परमात्मा की कृपा से हुआ है और उम्मीद है कि बाबा नानक के पांच सौ पचासवीं जयंती के आयोजनों के बीच ही करतारपुर साहिब का मसला भी सुलझ जाएगा.
यह पूछे जाने पर क्या पाकिस्तान यात्रा के दौरान उनके जेहन में ये बात पहले से थी, सिद्धू कहते हैं कि नहीं उनके दिमाग में ये बात बिल्कुल नहीं थी क्योंकि वे दोस्त के रूप में गए थे. वहां उन्हे अगली कतार में पाकर बाजवा ने उनसे बातचीत की और करतारपुर साहिब मसले का जिक्र किया.
अन्तरराष्ट्रीय परिदृश्य का हवाला देते हुए सिद्धू ने कहा कि अगर दोनों पंजाब एक साथ हो जाए तो कोई मसला ही नहीं रह जाएगा. जब खान साहब कह रहे हैं कि भारत एक कदम चले तो वे दो कदम चलेंगे. फिर क्या दिक्कत है. पानी को लेकर देश में तमिलनाडु के अलावा पंजाब और हरियाणा के बीच संघर्ष चल रहा है और उधर पाकिस्तान से इंडस वॉटर समझौता की बात उठ रही है.. पाकिस्तान की इस पहल को वो बहुत पॉजिटिव मानते हैं.
वे कहते हैं बहुत से लोग गए थे, लेकिन नतीजा क्या रहा. वाजपेयी जी गए और करगिल हुआ. सैकड़ों जवान शहीद हुए. मोदी जी गए पठानकोट हो गया. वे दावा करते हैं एक सिद्धू गया और उसने अमन की बात की. खूब प्यार मिला. यहां लोगों ने बेकार में हंगामा कर दिया.
ये भी पढ़ें : दूरियां कम करने पर काम कर रहे हैं भारत-पाकिस्तान
लच्छेदार बातों के लिए मशहूर सिद्धू ने बताया कि चौधरी सरवर का 28 को पंजाब के गवर्नर पद के लिए शपथ-ग्रहण था. मेरे पास संदेश आया कि चौधरी चाहते हैं कि सिद्धू उसमें शामिल हो. उस समय उन्होंने जाने में असमर्थता जता दी थी और नहीं जा सके. किसी ने उन्हें फोटो भेजा कि भारत के हाई कमिश्नर करतापुर गए और वहां से सब देख करके आए. इस सबको वे प्रार्थना की ताकत बताते हैं.
करतारपुर का गुरुद्वारा में दर्शन की अगर अनुमति मिलती है तो इसका श्रेय किसे मिलना चाहिए, इस सवाल पर सिद्धू कहते हैं कि सबको मिले, उन्हें न मिले. फिर भी इस काम को होना चाहिए.
पाकिस्तानी जरनल के गले लगने पर सबने आलोचना की, कैप्टन अमरिंदर सिंह और अकाली दल ने भी क्या इससे दुख हुआ? इस सवाल पर सिद्धू संजीदा हो जाते हैं और कहते हैं कि इन्हें लग रहा है कि दुनिया लुट गई. वे कहते हैं सिद्धू का इसमें कुछ नहीं गया उन्हें तो सिर्फ मिला ही मिला है. परमात्मा ने उन्हें एक बड़े काम के लिए जरिया बनाया इस पर वे बहुत खुश हैं. क्रेडिट की होड़ में वे पहले भी नहीं थे अब भी नहीं है. इंसान का इंसान से हो भाईचारा यही पैगाम हमारा. गुरुनानक देव का बुनियाद यही है.
एक बार फिर आलोचना के सवाल पर उनका कहना हैं कि उनकी जवाबदेही जनता के प्रति है और जनता को सब पता है. जनता को कोई मूर्ख नहीं बना सकता. क्या इस पूरे प्रकरण में सिखों को लामबंदी करने की कोशिश हो रही है, वे कहते हैं कि दरबार साहिब का किसी के पास कॉपीराइट नहीं है. गुरुग्रंथ साहिब पर किसी का पेटेंट नहीं है. वहां बैठ कर हर बंदा उनकी वाणी सुन सकता है. ये सारी दुनिया के लिए निचोड़ है अच्छाइयों का. लिहाजा करतारपुर के लिए सभी मिल कर प्रयास करना चाहिए.