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जम्मू और कश्मीर से जुड़े आर्टिकल 35A पर अब अगली सुनवाई 31 अगस्त यानी शुक्रवार को होगी. वहीं जम्मू और कश्मीर की सरकार (फिलहाल राज्य में राज्यपाल शासन) ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दे दिया है. हलफनामे में कहा गया है कि फिलहाल राज्य के हालात ऐसे नहीं हैं कि आप इस कानून के साथ छेड़छाड़ कर सकें.दूसरी ओर कश्मीर पूरी तरह से बंद हैं और जम्मू के अलग-अलग जिलों में लोग इसे लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुंछ, रजौरी, किश्तवाड़ और डोडा जिले में लोग इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं. बात राजनीतिक दलों की करें तो इस आर्टिकल को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस , पीडीपी और कांग्रेस इसे न हटाने की मांग कर रहे हैं. इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपने वकील लगाए हुए हैं.
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इसके साथ ही पैंथर पार्टी इसे लगातार हटाने की मांग करती नजर आ रही है. कई अन्य सामाजिक संगठन भी इसे हटाने के लिए अलग-अलग मंचों से मांग कर रहे हैं. वहीं बीजेपी यह कह रही है कि मामला अदालत में है और लोगों को उसके फैसले का इंतजार और सम्मान करना चाहिए.यह भी पढ़ें: श्रीनगर : NIA ने हिजबुल के चीफ सैयद सलाहुद्दीन के बेटे को किया गिरफ्तार
कुल मिलाकर राज्य के दोनों हिस्से फिलहाल आपस में ही बंट गए हैं. इसका फायदा लेने के लिए सभी राजनीतिक दल तैयार हैं. चाहे चुनाव नगरपालिका का हो या फिर पंचायत का, इन्हीं चुनावों से यह पता चलेगा कि किसी दल का वर्चस्व कितना मजबूत हो सकेगा. यह बात स्पष्ट है कि इन्हीं स्थानीय चुनावों के जरिए ही आगामी विधानसभा चुनाव की नींव रखी जाएगी. यही कारण है कि 35A का मुद्दा छाया हुआ है.
जम्मू और कश्मीर इकाई के बीजेपी अध्यक्ष रविन्द्र रैना का कहना है कि आर्टिकल 35 ए अब कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन हम ये कहेंगे कि बीजेपी चाहती है कि सबका साथ सबका विकास हो लेकिन इन सभी के बीच ये 35 ए रोड़ा है.
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