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विधि आयोग ने ‘देशद्रोह’ विषय पर एक परामर्श पत्र में गुरुवार को कहा कि देश या इसके किसी पहलू की आलोचना को ‘‘देशद्रोह’’ नहीं माना जा सकता. यह आरोप उन मामलों में ही लगाया जा सकता है, जहां इरादा हिंसा और अवैध तरीकों से सरकार को हटाने का हो.आयोग ने यह भी कहा कि देशद्रोह से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा ‘124 ए’ के संशोधन का अध्ययन करने के लिए, इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) में इस धारा को जोड़ने वाले ब्रिटेन ने दस साल पहले देशद्रोह के प्रावधानों को हटा दिया है.
परामर्श पत्र में कहा गया कि देश या इसके किसी पहलू की आलोचना को देशद्रोह के रूप में नहीं देखा जा सकता और ना ही देखा जाना चाहिए. यदि देश सकारात्मक आलोचना के लिए तैयार नहीं है, तो आजादी से पहले और बाद के युग में थोडा ही अंतर रह जाता है.
अपने ही इतिहास की आलोचना का अधिकार और ठेस पहुंचाने का अधिकार स्वतंत्र अभिव्यक्ति के तहत संरक्षित अधिकार हैं.इसे भी पढ़ें-
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