READ MORE
एमके अलागिरी ने 27 अगस्त को कहा था कि अगर डीएमके में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा तो पार्टी को इसके नतीजे भुगतने होंगे. लेकिन गुरुवार को अलागिरी ने कहा कि अगर उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा तो वो स्टालिन को नेता मानने के लिए तैयार हैं.अलागिरी ने कहा, अगर मुझे पार्टी में शामिल किया जाएगा तो हम स्टालिन के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं. दूसरा कोई रास्ता नहीं है. अगर हमें पार्टी मे शामिल नहीं किया जाएगा तो हम इसके बारे में अपने समर्थकों से मीटिंग करने के बाद फैसला लेंगे.
ये भी पढ़ेंः अलागिरी ने की नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ
24 अगस्त को अलागिरी ने अपने समर्थकों से मदुरई में मिलना शुरू किया. पहले तीन दिनों में इनकी संख्या काफी थी लेकिन सोमवार के बाद इनकी संख्या में कमी आ गई. बुधवार को उनके घर पर सिर्फ 10 समर्थक मौजूद थे. मीडिया ने भी इसे बहुत कवरेज नहीं दिया. यह घटना स्टालिन के डीएमके अध्यक्ष बनने के एक दिन बाद की है.
We are prepared to join with them (DMK), he (MK Stalin) is not prepared to accept us: Expelled DMK personality MK Alagiri in Madurai pic.twitter.com/Ux7LazhLyC
— ANI (@ANI) August 30, 2018
एमके अलागिरी ने 27 अगस्त को कहा था कि अगर डीएमके में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा तो पार्टी को इसके नतीजे भुगतने होंगे. लेकिन गुरुवार को अलागिरी ने कहा कि अगर उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा तो वो स्टालिन को नेता मानने के लिए तैयार हैं.
अलागिरी ने कहा, ‘अगर मुझे पार्टी में शामिल किया जाएगा तो हम स्टालिन के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं. दूसरा कोई रास्ता नहीं है. अगर हमें पार्टी मे शामिल नहीं किया जाएगा तो हम इसके बारे में अपने समर्थकों से मीटिंग करने के बाद फैसला लेंगे.’
24 अगस्त को अलागिरी ने अपने समर्थकों से मदुरई में मिलना शुरू किया था. पहले तीन दिनों में इनकी संख्या काफी थी लेकिन सोमवार के बाद इनकी संख्या में कमी आ गई. बुधवार को उनके घर पर सिर्फ 10 समर्थक मौजूद थे. मीडिया ने भी इसे बहुत कवरेज नहीं दिया. यह घटना स्टालिन के डीएमके अध्यक्ष बनने के एक दिन बाद की है.
ये भी पढ़ेंः करुणानिधि का ऐलान, मेरे बाद स्टालिन संभालेंगे कमान
अलागिरी ने कहा कि करुणानिधि के निधन के बाद डीएमके को बचाने की खातिर वह यह सब कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘कलईनार (करुणानिधि) अब नहीं हैं, पार्टी को बचाना है. यदि उन्होंने मुझे फिर से शामिल नहीं किया तो उन्हें नतीजे भुगतने पड़ेंगे.’ बता दें कि साल 2014 में करुणानिधि की ओर से पार्टी से निकाले जाने के बाद से अलागिरी राजनीतिक एकांतवास में हैं.
Article source: http://feedproxy.google.com/~r/ndtvkhabar/~3/9_BHcA-jYqA/story01.htm
No comments:
Post a Comment