READ MORE
भारत और पाकिस्तान सिंधु जल संधि के अलग-अलग पहलुओं पर आज से लाहौर में बातचीत करेंगे. इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच पहली बार किसी मसले पर कोई द्विपक्षीय बातचीत होने जा रही है. भारत के सिंधु जल आयुक्त पीके सक्सेना अपने पाकिस्तानी समकक्ष सैयद मेहर अली शाह के साथ दो दिवसीय वार्ता करेंगे.भारत-पाकिस्तान के स्थायी सिंधु आयोग की पिछली बैठक मार्च में नई दिल्ली में हुई थी. इस दौरान दोनों पक्षों ने 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत जल बहाव और इस्तेमाल होने वाले पानी की मात्रा का ब्योरा साझा किया था.
1960 में सिंधु जल संधि पर हुए थे हस्ताक्षर
सिंधु जल संधि पर 1960 में हस्ताक्षर हुए थे, और इसमें छह नदियां -ब्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चेनाब और झेलम- शामिल हैं.इंडस वॉटर ट्रीटी यानी की सिंधु जल समझौते पर कराची में 19 सितंबर, 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे. इसमें मध्यस्थता वर्ल्ड बैंक ने की थी.
इस समझौते में तीन “पूर्वी” नदियों — ब्यास, रावी और सतलुज और पश्चिमी” नदियों — सिंधु, चिनाब और झेलम के नियंत्रण का बंटवारा किया गया.
विश्वबैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि के तहत प्रथम तीन नदियों के पानी के इस्तेमाल का अधिकार भारत को और अन्य तीन नदियों के जल के इस्तेमाल का अधिकार पाकिस्तान को है.
क्या है पाकिस्तान का डर ?
इस संधि में पाकिस्तान के कंट्रोल वाली नदियों का फ्लो पहले भारत से होकर आता है. संधि में ये प्रावधान थे कि भारत उस पानी का उपयोग सिंचाई, परिवहन और इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन के लिए करेगा. इस दौरान इन नदियों पर भारत द्वारा परियोजनाओं के निर्माण के लिए सटीक नियम निश्चित किए गए
संधि के अनुसार, भारत को इन नदियों की सहायक नदियों पर जलविद्युत प्लांट लगाने का अधिकार है. पाकिस्तान को डर है कि इससे उसके क्षेत्र में नदियों में जल का प्रवाह घट जाएगा.
इंटरनैशन वॉटर मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट की सलाह- भारत सिंधु जल संधि को करे रद्द
सन् 2005 में इंटरनैशन वॉटर मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई) और टाटा वॉटर पॉलिसी प्रोग्राम (टीडब्ल्यूपीपी) भी अपनी रिपोर्ट में भारत को सिंधु जल संधि को रद्द करने की सलाह दे चुका है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस जल संधि से केवल जम्मू-कश्मीर को ही हर साल 65000 करोड़ रुपए की हानि हो रही है.
“इंडस वॉटर ट्रीटी: स्क्रैप्ड ऑर अब्रोगेटेड” शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि इस संधि के चलते घाटी में बिजली पैदा करने और खेती करने की संभावनों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक घाटी में 20000 मेगावाट से भी ज़्यादा बिजली पैदा करने की क्षमता है, लेकिन सिधु जल संधि इस राह में रोड़ा बनी हुई है.
Article source: http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/ashokas-manuscripts-are-intentionally-destroyed-says-bihar-cm-nitish-kumar-1356361.html
No comments:
Post a Comment