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एससी/एसटी को मिलने वाले आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का सदस्य दूसरे राज्य में पलयान करता है तो उसे वहां आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि सभी राज्यों में स्थिति समान नहीं है.जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए निर्णयों पर असहमति जताई. बेंच ने कहा, “बिना किसी हिचकिचाहट के यह कहा जा सकता है कि एक राज्य में अनुसूचित जाति के व्यक्ति को दूसरे राज्य में अनुसूचित जाति का न माना जाए, जहां उसने रोजगार अथवा शिक्षा के उद्देश्य से पलायन किया है.”
इसमें कहा गया कि संविधान द्वारा प्रदान किए गए आरक्षण का लाभ राज्य/संघ शासित प्रदेशों की भौगोलिक सीमा तक ही सीमित रहेंगे. कोर्ट ने कहा कि यदि एससी/एसटी के सदस्य को भारत के पूरे क्षेत्र में समान स्थिति का लाभ मिलता है तो संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्य को मिले अधिकारों का हनन होगा.
कोर्ट ने नोट किया कि यदि एक राज्य में एससी/एसटी के व्यक्ति को दिए गए स्टेट्स पूरे देश में लागू होता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के खिलाफ होगा. कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आरक्षण सरकारी सेवाओं में ऐसे वर्गों के प्रतिनिधित्व के आधार पर दिए जाते हैं.दिल्ली में अधीनस्थ सेवाओं के उद्देश्य के लिए, बेंच ने फैसला दिया कि सभी पदों पर भर्ती अखिल भारतीय आधार पर है और आरक्षण पैन इंडिया के आधार पर दिया गया है.
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