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सबसे पहली बार 1999 में लेप्टोस्पाइरोसिस बीमारी फैली थी. उस वक्त विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी की थी कि इस तरह की बीमारी भविष्य में फिर से हो सकती है. दो दशकों बाद इसी बीमारी से केरल में 12 मौतें हो चुकी हैं. सिर्फ तीन दिनों में लेप्टोस्पाइरोसिस के 159 मामले सामने आ चुके हैं. दरअसल लेप्टोपाइरोसिस चूहों, कुत्तो व दूसरे स्तनधारियों में पाई जाती है जो कि आसानी से इंसानों में फैल जाती है.लंबे समय तक बाढ़ के बाद जब केरल सरकार ने पहली बार डॉक्टरों को अलर्ट किया था तब तक औसतन महीने में 12.5 मौतें हो रही थीं. अगले तीन दिनों में 159 मामले सामने आए.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि यह बीमारी दुषित जल से फैल सकता है. 1999 में उड़ीसा में एक साइक्लोन आने के बाद फैली इस बीमारी को डॉक्टर पहचान नहीं पाए और उन्हें लगा कि मौतें किसी दूसरी बीमारी से हुई हैं लेकिन केरल ने ऐसी गलती नहीं की. स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने डॉक्टरों से कहा कि किसी को भी अगर किसी को भी बुखार के साथ मांसपेशियों के दर्द होता है तो इसका इलाज लेप्टोस्पाइरोसिस के अनुसार किया जाए.
केरल में डॉक्टर बिना किसी कारण के चिंतित नहीं हैं. 1999 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मूल मुद्दे की व्याख्या की थी. बाढ़ की वजह से मनुष्य एवं पशु एक स्थान पर इक्ट्ठे हो जाते हैं, परिमाणस्वरुप उनके बीच परस्पर क्रिया होती है बैक्टिरया के फैलने के लिए आदर्श वातावरण तैयार हो जाता है.ये भी पढ़ें: केरल की बाढ़ से बिगड़ सकता है आपकी रसोई का जायका
जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया के मौसम में तेजी से बदलाव आ रहे हैं जो चक्रवात एवं बाढ़ जैसी घटनाओं को जन्म दे रहा है, कई अध्यनों में बताया गया है कि शहरीकरण एवं खराब अपशिष्ट निपटान इस तरह के प्रकोपों की संभावना को तेजी से बढ़ाता है.
2001-2011 के बीच केरल में शहरी जनसंख्या में 92.7% की वृद्धि हुई. 2011 के सेंसेक्स के अनुसार यहां के शहरों की संख्या 159 से 520 हो गई है. हालांकि ठोस अपशिष्ठ पदार्थों का प्रबंधन यहां की सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है जिसपर केरल हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है.
डीएचएस के एक अधिकारी ने बताया, “समस्या यह है कि यह बीमारी बहुत आसानी से फैल जाती है. जब त्वचा या श्लेष्मा झिल्ली पानी, नम मिट्टी या कीचड़ के संपर्क में आती है तो इससे संक्रमण फैल सकता है.” अधिकारी ने कहा कि ऐसी में पहली जरूरत तेजी से उपचार करना है.
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इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने न्यूज18 से कहा, “मानसून के दौरान हर साल लेप्टोस्पाइरोसिस का डर रहता है. हम साल इसकी सूचना जारी करते हैं. इस बार अंतर केवल इतना है कि दृष्टिकोण अधिक व्यापक होना चाहिए.
महाराष्ट्र के केरल में राहत कार्य में शामिल 89 डॉक्टरों की टीम के कॉर्डिनेटर डॉ. अरशद खान ने कहा, “निश्चित रुप से पानी से उत्पन्न संक्रमण के प्रकोप का डर है. लेप्टोस्पायरोसिस के साथ रक्त में वायरल लोड का भी परीक्षण किया जाना चाहिए. लेकिन लक्षण अक्सर अस्पष्ट होते हैं. यहां तक कि आपको असामान्य मामले भी देखने को मिल सकते हैं, इसलिए प्रयोगशाल में जाच जरूरी है.”
इसके साथ ही उन्होने कहा कि लोगों को सही काउंसलिंग दी जानी चाहिए ताकि उन्हें पता हो कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं.
Article source: https://hindi.news18.com/news/sports/ipl-2018/ipl-2018-watch-andre-russell-rinku-singh-chris-lynns-tremendous-hitting-in-kkrs-practice-match-1329504.html
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