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सिंधू भट्टाचार्यवित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में करीब आधे घंटे तक कृषि क्षेत्र की बात ही. भाषण के दौरान जेटली ने 27 बार ‘किसान’ शब्द का ज़िक्र किया, जबकि 29 बार उनके मुंह से ‘कृषि’ शब्द निकला. इतना ही नहीं अरुण जेटली ने बजट पेश करते हुए 21 बार देश के गरीबों का ज़िक्र किया, लेकिन टैक्स देने वाले नौकरी पेशा लोगों की बात उन्होंने सिर्फ 7 बार की. इसमें कोई शक नहीं कि देश में गरीबों और किसानों के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा बातें होनी चाहिए. लेकिन हमने जिन आंकड़ों का ज़िक्र किया उससे साफ ज़ाहिर होता है कि सरकार ने नौकरी पेशा लोगों को नजरअंदाज किया है. ऐसे में नौकरी पेशा लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.
सरकार के राजस्व के लिए मध्यवर्गीय वेतनभोगी अहम क्यों हैं, इसका ज़िक्र भी वित्त मंत्री ने अपने भाषण में भी किया. अब ज़रा इन आकड़ों पर नज़र डालिए…
साल 2016-17 में एक नौकरी पेशा व्यक्ति ने किसी एक बिज़नेसमैन के मुकाबले औसतन तीन गुना ज़्यादा टैक्स दिया.साल 2016-17 में 1.89 करोड़ सैलरीड क्लास लोगों ने रिटर्न फाइल किया. इन लोगों ने कुल मिलाकर 1.44 लाख करोड़ का टैक्स सरकार को दिया, यानी औसतन एक आदमी ने 76,306 रुपये टैक्स भरा.
वहीं, 1.88 करोड़ बिज़नेसमैन और प्रोफेशनल ने सिर्फ 48,000 करोड़ टैक्स दिया. यानी औसतन एक आदमी ने सिर्फ 25,753 रुपये टैक्स के तौर पर भरे.
बजट के बाद वित्तमंत्री ने कहा कि टैक्स का 25-30% हिस्सा नौकरी पेशा और पेंशनधारी के हिस्से से आता है. तो क्या ऐसे में उन्हें नौकरी पेशा लोगों के टैक्स का बोझ कम नहीं करना चाहिए था?
छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए, जेटली ने कई राहत उपायों की पेशकश की है. कॉरपोरट टैक्स को भी काफी कम किया गया है. लेकिन तमाम अटकलों के बावजूद इस बार वेतनभोगी को इनकम टैक्स के स्लैब में स्लैब में कोई राहत नहीं मिली है. जबकि वेतनभोगी को इस बार के बजट के बाद नुकसान ही उठाना पड़ेगा. ट्रांसपोर्ट भत्ता, मेडिकल रींबर्समेंट और अन्य भत्ते छिन जाएंगे. अभी तक 15 हजार रुपये तक का मेडिकल बिल हर वित्त वर्ष टैक्स फ्री होता थी. वहीं, ट्रांसपोर्ट भत्ते के तौर पर कर्मचारियों को हर वित्त वर्ष 19200 रुपये की छूट मिलती थी. इसके अलावा अब इमकम टैक्स पर सेस 3 फीसदी से बढ़ा कर 4 फीसदी कर दी गई है.
यानी मिडिल क्लास को टैक्स में कोई छूट नहीं मिलने वाली है. इस तरह से टैक्स छूट वाली आय की सीमा 5800 रुपये बढ़ जाएगी. यानी अब ढाई लाख नहीं, बल्कि 2 लाख 55 हजार 800 रुपये तक की सालाना आमदनी टैक्स फ्री होगी.
क्लियर टैक्स के फाउंडर अर्चित गुप्ता के मुताबिक स्टैंडर्ड डिडक्शन तो वापस लाया गया है लेकिन इसका कोई फायदा नहीं. उन्होंने कहा, “लोग मेडिकल रींबर्समेंट 15000 से बढ़ाने की मांग कर कर रहे थे. लेकिन सरकार ने इसे हटा ही दिया है यानी 1% सेस बढ़ने के बाद लोगों को और नुकसान सहना पड़ेगा.”
एकमात्र अच्छी खबर वरिष्ठ नागरिकों के लिए है. बैंकों और डाकघरों के साथ जमा राशि पर ब्याज आय की छूट को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 कर दिया गया है. इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और चिकित्सा व्यय के लिए कटौती की सीमा 30,000 से बढ़ाकर 50,000 कर दी गई है. इसके अतिरिक्त, सभी वरिष्ठ नागरिक अब किसी भी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और/या किसी भी सामान्य चिकित्सा खर्च के संबंध में हर साल 50,000 रुपये तक कटौती के लाभ का दावा कर सकते हैं. जेटली ने कहा कि वो पिछले बजट के माध्यम से मिडिलक्साल को कई राहत के विकल्प दे रहे हैं.
(संधू भट्टाचार्य, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/isl-kerala-blasters-are-hugely-talented-says-sachin-tendulkar-409838.html
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