Friday, 2 February 2018

लोया की मृत्यु से सरोकार है, दूसरे मामलों पर गौर नहीं करेंगे: सुप्रीम कोर्ट


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सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही साफ और स्पष्ट शब्दों में यह संदेश दिया कि उसका सरोकार सिर्फ विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की मृत्यु के मामले तक है. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को आरोप मुक्त करने सहित दूसरे पहलुओं पर गौर नहीं करेगा.प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि हमारे सामने विचारणीय विषय यह है कि क्या इस मामले में और आगे जांच का आदेश दिया जाना चाहिए. पीठ न्यायाधीश लोया की 2014 में हुयी मृत्यु की स्वतंत्र जांच के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.


सोहराबुद्दीन शेख मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश लोया की एक दिसंबर, 2014 को नागपुर में हृदय गति रुक जाने की वजह से मृत्यु हो गयी थी जब वह अपने एक सहयोगी की बेटी के विवाह में शामिल होने गये थे. न्यायाधीश लोया की मृत्यु के बाद विशेष न्यायाधीश एम बी गोसावी ने इस मुकदमे की सुनवाई शुरू की और उन्होंने शाह तथा कुछ अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया था.


पीठ के समक्ष जब यह मामला सुनवाई के लिये आया तो एक वकील ने कहा कि उसने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे अब शीर्ष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि याचिका में शाह को भी प्रतिवादी बनाया गया था. इस वकील ने जब न्यायालय से अनुरोध किया कि उसकी याचिका पर नोटिस जारी किया जाना चाहिए तो पीठ ने कहा, ‘हम आपको बहस की अनुमति देंगे. नोटिस जारी करने का सवाल नहीं है.’पीठ ने कहा, ‘हमारा सरोकार सिर्फ न्यायाधीश की मृत्यु को लेकर है. हम दूसरे मामलों पर नहीं है. यह संदेश स्पष्ट और साफ तरह से जाना चाहिए.’ शाह का मसला जब उठा तो महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘इन याचिकाओं का असली मकसद यही है.’ बंबई लायर्स एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और बेहतर होगा यदि इसमें पहले लिखित कार्यवाही पूरी कर ली जाये.


महाराष्ट्र के गुप्तचर आयुक्त (सीआईडी) की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुये दवे ने कहा कि इस मामले में एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है क्योंकि इसमें अनेक विसंगतियां और विरोधाभास हैं. कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने भी राज्य सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट की सत्यता पर सवाल उठाये और कहा कि रिकार्ड न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना चाहिए.


इस पर रोहतगी ने कहा कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और सुर्खियां प्राप्त करने के अलावा इसमें और भी कुछ है. हमने सारा रिकार्ड पेश किया है और कृपया इसका अवलोकन कीजिये. इस पर पीठ ने दवे से कहा कि आपके मामले में एक विहंगम निगाह डालें और देखते हैं कि दस्तावेज क्या हैं.


इस मामले में अब सोमवार पांच फरवरी को आगे सुनवाई होगी.


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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/desh/iaf-officers-highly-secure-mobile-laptop-stolen-in-delhi-488497.html

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