Sunday, 4 February 2018

नेवी वाररूम लीक: 12 साल की जांच के बाद बर्खास्त कैप्टन के खिलाफ मामला बंद


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केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक दशक से अधिक समय की जांच के बाद भी भारतीय नौसेना के पूर्व कैप्टन कश्यप कुमार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. कुमार को सरकार ने 2005 में कुख्यात नौसेना वाररूम लीक मामले में कथित रूप से संलिप्त होने के आरोप में बर्खास्त कर दिया था.सीबीआई ने एक विशेष अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट में बीते वर्ष के अंत में अपनी रिपोर्ट सौंपी और कहा, ‘याचिकाकर्ता कश्यप कुमार के संबंध में जांच पूरी हो चुकी है और सीबीआई ने उनके खिलाफ मामला बंद करने का फैसला किया है.’ सीबीआई जांच पर स्थिति रिपोर्ट अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज करने की 58 साल के कैप्टन की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर सौंपी गई.


कुमार की याचिका निपटाते हुए न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने अपने एक पेज के आदेश में कहा था कि संबंधित दस्तावेजों को देखते हुए सीबीआई ने कहा है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला सीबीआई द्वारा बंद किया गया है. नौसेना युद्ध वाररूम लीक कांड में नाम आने के बाद कोर्ट मार्शल के बिना कश्यप कुमार को अक्टूबर 2005 में संविधान की धारा 311 के तहत राष्ट्रपति के ‘प्रसाद के सिद्धांत’ के दुर्लभ प्रयोग के तहत सेवा से बर्खास्त किया गया था.


उन्होंने नवंबर 2005 में रिट याचिका दायर करके इस फैसले को चुनौती दी थी. सीबीआई द्वारा जांच का जिम्मा संभालने के पश्चात प्राथमिकी में उन्हें नामजद किया गया था लेकिन एजेंसी ने सबूतों के अभाव में उनका नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं किया था. सीबीआई ने 2006 में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश के एक रिश्तेदार रवि शंकरन और दिल्ली के कारोबारी अभिषेक वर्मा सहित छह लोगों को आरोपपत्र में नामजद किया था.जांच के दौरान, सीबीआई ने सभी फाइलों की जांच की और लीक मामले में कश्यप कुमार की भूमिका के संबंध में कुछ नौसेना अधिकारियों से सवाल किये लेकिन उन्हें उनकी संलिप्तता को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं मिले. उन्हें सामान्य जवाब मिला कि कुमार को भारतीय नौसेना अधिनियम की धारा 15 के तहत बर्खास्त किया गया है.


कुमार को नौसेना अधिनियम की धारा 15 के तहत बर्खास्त किया गया था जिसमें आरोपी अधिकारी को अपना मामला पेश करने का अधिकार नहीं होता.


सीबीआई से राहत मिलने के बाद अब पूर्व कैप्टन सैन्य बल न्यायाधिकरण में अगली लड़ाई लड़ेंगे जहां उन्होंने नौसेना से अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने बीते साल 12 साल की सुनवाई के बाद याचिका को न्यायाधिकरण के पास भेजा है.


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Article source: http://hindi.news18.com/news/jharkhand/ranchi/cnt-spt-act-amendment-957428.html

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