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नियंत्रण रेखा पर उरी सेक्टर में पाकिस्तान 19 फरवरी के बाद से लगातार गोलीबारी कर रहा है. इससे गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. ऐसे में लोगों को सरकारी स्कूलों में बने राहत शिविरों की ओर पलायन करवाने के लिए सेना के जवान राहत कार्यों में लगे हुए हैं. इस सप्ताह जम्मू और कश्मीर में हुई बर्फबारी से वहां के तापमान में आई गिरावट की वजह से लोगों में गरम कपड़े, दवाइयों की मांग बढ़ी है.उरी सेक्टर के जरिए सबसे ज्यादा आतंकी कश्मीर में घुसपैठ करते हैं. साल 2016 में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ था. इसमें 19 जवान शहीद हुए थे.ब्रिगेडियर वाईएस अहलावत ने कहा कि सेना के जवान राहत कार्यों में लगातार लगे हुए है और लोगों तक दवाइयां, कपड़े, पानी और खाना पहुंचा रहे है. अहलावत ने कहा कि उरी सेक्टर में पिछले 15 सालों में सीमा-पार से गोलीबारी का ऐसा मंजर नही देखा गया.
आर्मी अपने एक्शन मोड के तहत लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हुई है. खाना, पानी और दवाइयों के अलावा ठंड को देखते हुए गरम कपड़े भी लोगों तक पहुंचाएं जा रहे हैं. अहलावत ने पाकिस्तान की तरफ से लगातार हो रहे युद्धविराम उल्लघंन की कड़ी निंदा की. हालांकि ब्रिगेडियर ने बताया कि पाकिस्तान की इस हरकत पर सेना की तरफ से मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है. लेकिन पाकिस्तान कायरता दिखाते हुए नियंत्रण रेखा के पास उरी सेक्टर में लगातार बेगुनाह लोगों और उनके घरों पर निशाना लगा रहा है. इसकी वजह से स्थिति चिंताजनक होती जा रही है.
उरी सेक्टर में पहली बार लगातार तोप से आग के गोले दागे जा रहे, दोनों तरफ से गोलीबारी जारी है जिससे लोगों का जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. उरी सेक्टर में चुरांदा, सिलिकोट और तिलावरी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके है. सरकार राहत कार्यों के तहत लोगों को बचाने के लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल कर रही है. इसके अलावा शनिवार को लोगों को गाड़ियों में भर कर दूसरे जगह ले जाया गया. पूरे इलाके में लगभग 7000 से 8000 लोग प्रभावित है और करीब हज़ार लोगों को वहां से बाहर निकाला जा चुका है.ये भी पढ़े…
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