Thursday, 1 February 2018

बजट 2018ः 'हकीकत नहीं सरकार की कल्पना है कृषि क्षेत्र की घोषणाएं'


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देवव्रत घोषभले ही बजट के माध्यम से देश में बढ़ते कृषि संकट को दूर करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली के प्रयासों को लेकर बीजेपी सरकार की पीठ थपथपा रही है, लेकिन विपक्ष और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ इसकी आलोचना कर रहे हैं.


बजट पेश करते हुए जेटली ने जोर देकर कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी और साथ ही एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) में 1.5 गुना वृद्धि करने का वादा किया.


सीपीआई (एम) की किसान विंग ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) ने कहा कि कृषि क्षेत्र की घोषणाएं जमीन हकीकत की बजाए एक कल्पना है. एआईकेएस के संयुक्त सचिव बादल सरोज ने कहा कि आज भी किसानों को अपनी बिक्री के लिए मंडी में चार से पांच दिनों के लिए इंतजार करना पड़ता है. भारतीय खाद्य निगम(एफसीआई) और राज्य की गोदामों फसल की खरीद नहीं कर रहे हैं. बजट का एकमात्र सकारात्मक हिस्सा है कि बड़े पैमाने पर पहली बार सरकार ने किसानों के मुद्दों को लेकर घोषणा की है.उन्होंने कहा कि बजट में आवंटन के बारे में उल्लेख नहीं है और न ही कार्यान्वयन के बारे में बात की गई है. यह किसानों के साथ एक क्रूर मजाक है.


किसानों की स्थिति में सुधार को लेकर सरकार के इरादों पर सवाल खड़ा करते हुए पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सवाल किया कि कृषि आय में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? 29 जनवरी को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए चिदंबरम ने कहा, “आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पिछले चार वर्षों से कृषि जीडीपी स्थिर रहा है. कृषि राजस्व में पिछले चार वर्षों में कोई बदलाव नहीं हुआ. यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि किसानों की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है.”


चिदंबरम ने कहा, “इस बारे में कोई जिक्र नहीं हुआ है कि सरकार अपनी योजनाओं को कैसे आगे बढ़ाएगी.”


सरकार ने कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है. बजट में एमएसपी को निर्धारित करने के अलावा 2000 करोड़ रुपए की लागत से कृषि बाज़ार बनाने की बात कही गई है.


जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि हमने किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया है. कृषि उत्पाद रिकॉर्ड पर है. सरकार इस बात पर काम कर रही है कि किसानों को लागत से 50% अधिक कीमत मिले. 2022 तक किसान की आय दोगुना करने का लक्ष्य है. हम एमएसपी को बढ़ावा देने का इरादा रखते हैं नीति आयोग और राज्य सरकारों सुनिश्चित करेंगे कि बाजार मूल्य कम होने पर भी किसानों को एमएसपी मिले. खरीफ फसलों के लिए एमएसपी 1.5 गुना होगा.


अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कृषि मंत्री और कृषि विशेषज्ञ सोमपाल शास्त्री ने घोषणाओं को झूठा कहा है.


उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत की सीएसीपी की गणना भी त्रुटिपूर्ण है. सरकार की ओर से पेश की गई एमएसपी लागत से कम है. सरकार की घोषणा के मुताबिक अगर अगले चार वर्षों में कृषि आय में दोगुना होना है, तो कृषि की विकास दर को न्यूनतम 20% वार्षिक दर से होना जाना चाहिए, जो नहीं हो रहा है.


गौरतलब है कि फसलों के दाम की सिफारिश करने वाली सरकारी संस्था कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी)  लागत के आधार पर एमएसपी तय करने की सिफारिश करती है.


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