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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना तब तक संभव नहीं है जब तक कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 12 प्रतिशत तक नहीं पहुंच जाती. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ राजकोषीय घाटे में वृद्धि हुई है.’’
वित्तीय अंकगणित में कुछ गड़बड़ है
इससे पहले, सिंह ने कहा था कि यह देखना होगा कि सरकार अपने वादों को कैसे पूरा करेगी. उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं समझता कि मैं यह कह सकता हूं कि यह बजट चुनावों में फायदा हासिल करने की मंशा से पेश किया गया है, लेकिन मुझे इस बात की चिंता है कि वित्तीय अंकगणित में कुछ गड़बड़ है.चिदंबरम ने भी कहा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार मुश्किलकिसानों की स्थिति में सुधार को लेकर सरकार के इरादों पर सवाल खड़ा करते हुए पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सवाल किया कि कृषि आय में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? 29 जनवरी को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए चिदंबरम ने कहा, “आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पिछले चार वर्षों से कृषि जीडीपी स्थिर रहा है. कृषि राजस्व में पिछले चार वर्षों में कोई बदलाव नहीं हुआ. यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि किसानों की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है.”
चिदंबरम ने कहा, “इस बारे में कोई जिक्र नहीं हुआ है कि सरकार अपनी योजनाओं को कैसे आगे बढ़ाएगी.” सरकार ने कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की है. बजट में एमएसपी को निर्धारित करने के अलावा 2000 करोड़ रुपए की लागत से कृषि बाज़ार बनाने की बात कही गई है.
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