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दिल्ली हाईकोर्ट ने मानहानि के एक मामले में अरूण जेटली से जिरह के दौरान किए जाने वाले सवालों की प्रासंगिकता को लेकर सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप नेता अरविंद केजरीवाल की आलोचना की और कहा कि वह अप्रासंगिक सवाल करने में लिप्त हैं.जस्टिस मनमोहन ने यह टिप्पणी केजरीवाल की वह अर्जी खारिज करते हुए की जिसमें उन्होंने डीडीसीए की 1999 से 2013 तक की बैठकों का पूरा ब्यौरा मांगा था, जब जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे.
मानहानि का यह मामला केंद्रीय वित्त मंत्री जेटली ने आप नेता के खिलाफ दायर किया है.
कोर्ट ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के वकील से सवाल किया, ‘‘मेरा मानना है कि आप अप्रासंगिक सवाल पूछ रहे हैं. आपको डीडीसीए की बैठकों का पूरा ब्योरा चाहिए, लेकिन क्यों?’’ कोर्ट ने कहा कि उसे यह नहीं समझ आ रहा कि बैठकों का ब्यौरा केजरीवाल के खिलाफ मानहानि के इस मामले में कैसे प्रासंगिक है.इसके साथ ही कोर्ट ने जेटली की एक जिरह के दौरान वित्त मंत्री से किए गए सवालों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाया जो कि डीडीसीए में कथित अनियमितताओं के संबंध में एक राष्ट्रीय दैनिक में खबरें प्रकाशित नहीं होने को लेकर था.
जस्टिस मनमोहन ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट 10 फरवरी 2003 और छह अप्रैल 2003 के दो दस्तावेज पेश करने का केजरीवाल का अनुरोध स्वीकार कर रही है जिनके आधार पर जिरह के दौरान जेटली से सवाल किए जा सकते हैं.
इस मामले में संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष जेटली की जिरह चल रही है. संयुक्त रजिस्ट्रार ने केजरीवाल को 12 फरवरी तक जिरह पूरी करने का निर्देश दिया है.
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