Monday, 26 February 2018

LoC पर भीषण गोलीबारी बीच 18 साल के मकबूल ने बचाई मां-बाप की जान


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पाकिस्तान की ओर से उरी में लगातार चल रही गोलीबारी वहां लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है, लोग सेना की मदद से अपने-अपने ठिकानों से राहत शिविरों की तरफ पलायन कर रहे हैं. 18 साल का मकबूल और उसके चार भाई-बहन भी एक राहत शिविर में रुके हुए हैं. मकबूल के माता-पिता अपने पालतू जानवरों को छोड़कर नहीं आना चाहते. मकबूल परेशान है क्योंकि उसका गांव सिलिकोट सीमा से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर है और वहां फंसे उसके माता-पिता की जान पर खतरा बढ़ता जा रहा है.मकबूल ने अपनी मां बेगम अख्तर और पिता कय्यूम को तीसरे दिन भी फोन किया और घर छोड़कर राहत शिविर में आने का आग्रह किया लेकिन मकबूल के माता-पिता ने कहा कि “गोलीबारी तेज़ होती जा रही है और हम घर छोड़कर बाहर नहीं निकल सकते हैं”. ये सुनकर मकबूल अपने माता-पिता की सुरक्षा के लिए और चिंतित हो गया. मकबूल के गांव के ज्यादातर लोग अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में पहुंच चुके हैं लेकिन मकबूल के माता-पिता और कुछ परिवार अभी भी वहां फंसे हुए हैं.


लगभग 11 बजे मकबूल की मां का फोन आता है और वो रोते हुए मकबूल से कहती हैं कि “पाकिस्तान ने गंभीर गोलीबारी की चेतावनी दे दी है अब हमें यहां से बाहर निकलना है”. परेशान मकबूल दौड़ते हुए सरकारी ऑफिसर के पास जाता है और अपने माता-पिता को बचाने के लिए एंबुलेंस की मांग करता है, मकबूल ने यहां तक कहा कि “अगर एंबुलेंस का ड्राइवर जाने को तैयार नहीं होता तो वह खुद एंबुलेंस चलाकर ले जाएगा और अपने माता-पिता को वहां से बाहर निकालेगा.”


एंबुलेंस मिलते ही मकबूल 40 वर्षीय एंबुलेंस ड्राइवर मो. अशरफ गनी के साथ अपने माता-पिता को बचाने के लिए रवाना हो गया. चारों तरफ से गोलियां बरस रही थी, सीमेंट की पक्की सड़कों को भेदती हुई गोलियां एंबुलेंस पर भी टकरा रही थीं, लेकिन मकबूल और अशरफ ने एंबुलेंस नहीं रोकी. उंचे-नीचे पहाड़ों से होती हुई आधे घंटे की ड्राइव के बाद बालकोट इलाके में एक रिटायर्ड आर्मी सैनिक ने एंबुलेंस को आगे जाने से मना किया. उन्होंने कहा कि आगे खतरा अधिक है लेकिन मकबूल नहीं रुका और बालकोट से सिर्फ एक किलोमीटर दूर अपने गांव सिलिकोट की तरफ एंबुलेंस को मोड़ लिया.कुछ देर की जद्दोजहद के बाद आखिरकार मकबूल को उसके माता-पिता मिल गए और उसने उन्हें सुरक्षित एंबुलेंस में बैठाया. मकबूल अपने माता-पिता के साथ-साथ दो और परिवारों को बचाने में कामयाब हुआ. एंबुलेंस ड्राइवर अशरफ फिर से उन्हीं रास्तों से होता हुआ आगे बढ़ा और मकबूल के माता-पिता ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर खुदा का शुक्रिया अता किया कि वो सभी सुरक्षित हैं. राहत शिविर में पहुंचकर सबने राहत की सांस ली.


Article source: http://hindi.news18.com/news/bihar/murder-of-young-man-in-bhagalpur-after-polling-882919.html

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