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आय से अधिक संपत्ति के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के एक डायरेक्टर के 10 ठिकानों पर छापा मारकर करोड़ों की संपत्ति बरामद की है. खास बात ये है कि उसी बाबू के यहां साल 2009 में भी एसीबी ने छापा मारकर करोड़ों की संपत्ति बरामद की थी. लेकिन तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने केस चलाने की इजाजत नहीं दी और उसे उसके पद पर फिर से बिठा दिया गया. नतीजा ये हुआ कि 8 सालों में फिर उसने करोड़ों का भ्रष्टाचार कर डाला.हैदराबाद के मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के डायरेक्टर के. पुरुषोत्तम रेड्डी के 10 ठिकानों पर एंटी करप्शन ब्यूरों ने एक साथ छापा मारा. पुरुषोत्तम रेड्डी और उसके भाई का घर बंद मिला. लेकिन बाकी 8 ठिकानों से ही 6 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बरामद की गई है. इस संपत्ति की मार्केट वैल्यू 20 करोड़ से ज्यादा की बताई जा रही है.

एसीबी पकड़े गए भ्रष्ट अफसर के खिलाफ केस चलाना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसकी इजाजत ही नहीं दी. इतना ही नहीं उसे ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के एडिशनल सिटी प्लानर के पद पर भी बहाल कर दिया.

भ्रष्ट बाबुओं को बचाने का काम सिर्फ कांग्रेस सरकार ने ही नहीं किया बल्कि तेलंगाना की के. चंद्रशेखर राव की टीआरएस सरकार भी भ्रष्ट बाबुओं को बचाने में लगी हुई है. साल 2015-16 में ही रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए 10 अफसरों के खिलाफ केस को राज्य सरकार बंद कर चुकी है. एंटी करप्शन ब्यूरो ने उन सभी 10 मामलों में सरकार से केस चलाने की इजाजत मांगी थी.
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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/desh/iaf-officers-highly-secure-mobile-laptop-stolen-in-delhi-488497.html
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