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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं. वोटरों को रिझाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 12 वीं सदी के समाज सुधारक और लिंगायत पंथ के नेता बासवन्ना के ‘वचन’ का सहारा ले रहे हैं. बासवन्ना के उपदेशों के जरिए वह कर्नाटक में अपनी सरकार की उपलब्धियां बता रहे हैं.राहुल गांधी बासवन्ना के ‘वचन’ की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि दो हफ्ते पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में समाज सुधारक और लिंगायत पंथ के संस्थापक संत बसवेश्वर के बहाने कांग्रेस पर तंज कसा था. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद भाषण देते हुए मोदी ने कांग्रेस पर 1947 में देश को बांटने का आरोप लगाया था और कहा था कि कांग्रेस ने उस लोकतंत्र को भुला दिया जो कर्नाटक के प्रसिद्ध समाज सुधारक बसवेश्वर ने स्थापित किया था.
कर्नाटक में राहुल गांधी इन दिनों जम कर रैलियां कर रहे हैं. पिछले तीन दिनों से वह मुंबई-कर्नाटक के इलाकों में घूम रहे हैं. ये वही इलाका है जहां लिंगायत समुदाय के लोग भारी संख्या में रहते हैं. यहां राहुल गांधी लिंगायत पंथ के नेता बासवन्ना के ‘वचन’ का जम कर इस्तेमाल कर रहे हैं.
अपने दौरे के पहले दिन शनिवार को राहुल गांधी ने बासवन्ना के सबसे प्रसिद्ध वचन – “इवानारावा इवानारावा अन्न्निनिसदिरयाय, इवा नाम्वव इवा नम्माव एंडेंसिराय्या ( ये नहीं पूछिए कि वो कौन है? कहो वो हमारे बीच में है, वो हमारे बीच में से एक है)” . दरअसल उन्होंने इस वचन के जरिए ये बताने की कोशिश की कि मोदी बांटने की राजनीति करते हैं.इंटनेट पर राहुल गांधी के इस ‘वचन’ की खूब चर्चा हो रही है लेकिन बीजेपी राहुल का मज़ाक उड़ा रही है. दरअसल बासवन्ना के ‘वचन’ का कन्नड़ में शुद्ध उच्चारण करना मुश्किल काम है. ऐसे में अब राहुल को थोड़े कम मुश्किल ‘वचन’ दिए जा रहे हैं.
न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए येदियुरप्पा ने कहा, “हम स्वागत करते हैं कि राहुल गांधी बासवन्ना के ‘वचन’ का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन हमें बासवन्ना के ‘वचन’ का पालन करने के लिए कहने की बजाए उन्हें खुद इसका पालन करना चाहिए. कांग्रेस नेता इस पर अमल करें”.
लिंगायत समुदाय और वोट बैंक
आपको बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में लिंगायत समुदाय काफी अहम भूमिका अदा करता आया है. राज्य की 224 विधानसभा सीटों में से करीब 80 सीटों पर इस समुदाय का सीधा दखल है. ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही इस चुनाव में इस समुदाय को साधने में जुटे हैं. बीजेपी के लिए फायदा ये है कि उनके मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा लंबे समय तक लिंगायत नेता रहे हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यहां 7 में से 6 सीटों पर जीत मिली थी. एक बार फिर से बीजेपी को उम्मीद है कि उन्हें यहां बड़ी जीत मिलेगी.
((डीपी सतीश))
Article source: http://ibnlive.in.com/news/sc-verdict-on-swiss-pharma-giant-novartiss-cancer-drug-glivec-today/382364-3.html
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