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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के लिए एक किताब लिखी –‘एक्जाम वॉरियर्स’. शनिवार को इसका विमोचन रखा गया था. छात्रों, शिक्षकों और माता-पिता को संबोधित यह किताब बताती है कि परीक्षा के दबाव और तनाव का सामना कैसे करें. प्रधानमंत्री मोदी इसके पहले अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में भी इस विषय पर अपने विचार व्यक्त कर चुके हैं. इस पुस्तक में कई जगह पीएम ने अपने जीवन के क़िस्से भी लिखे हैं कि वे किस तरह परीक्षाओं के दौरान होने वाले तनाव और दबाव का सामना करते थे. प्रस्तुत हैं कुछ अंश –जब मोदी ने स्कूल के नाटक में भाग लिया
किताब के एक अध्याय में मोदी छात्रों को विस्तार से समझाते हैं कि अपने काम की समीक्षा करना कितना महत्वपूर्ण है. वे उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्होंने स्कूल के एक नाटक में हिस्सा लिया था. किताब में वे लिखते हैं, ‘एक संवाद बोलना था, लेकिन किसी वजह से वो हो नहीं पा रहा था. मैं बड़ी मशक्कत कर रहा था. यह देखकर नाटक के निर्देशक अपना धैर्य खो बैठे और बोले कि अगर मैं ऐसे ही संवाद बोलता रहा तो वह मुझे नाटक में नहीं ले पाएंगे. ज़ाहिर है, मैं तो यही सोच रहा था कि मैं बिल्कुल ठीक बोल रहा हूँ. इसलिए निर्देशक की बात पर मुझे बड़ी हैरानी हुई. लेकिन अगले दिन मैंने उनसे कहा कि आप उस तरह एक्टिंग करके दिखाइए जैसे मैं कर रहा था और बताइए कि मैं क्या ग़लती कर रहा था. फिर क्या था, कुछ सेकेंड में मुझे समझ में आ गया कि मैं कहां ग़लत था और फिर मैंने वह ग़लती सुधार ली.’
प्रधानमंत्री मोदी की जिंदगी के सबकछात्रों से परीक्षा की तैयारी के महत्व पर बात करते हुए मोदी लिखते हैं, ‘किसी विषय को दोहराने का एक बढ़िया उपाय यह है कि उस पर वाद-विवाद और परिचर्चा की जाए. यह उन दिनों की बात है, जब मेरी राजनीतिक पार्टी की सांगठनिक ज़िम्मेदारियां मेरे सिर पर थीं- तब अकसर हम अलग-अलग समूह बना लेते थे और उनमें से कुछ विपक्ष के प्रवक्ता की तरह बात करते थे. फिर हम सभी एक ही मुद्दे को अलग नज़रिए से देखते और उस पर अलग-अलग ढंग से अपने विचार व्यक्त करते. इससे हमें यह समझने में मदद मिलती कि हमारी तैयारी कितनी मज़बूत है और हमें कहां-कहां सुधार की ज़रूरत है.
2012 के गुजरात चुनाव ने मोदी को क्या सिखाया
मोदी छात्रों को सलाह देते हैं कि एक बार परीक्षा ख़त्म हो जाए तो आंसरशीट की ज़्यादा फ़िक्र नहीं करनी चाहिए. जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन दिनों का एक क़िस्सा सुनाते हुए उन्होंने लिखा, ‘ जैसे आप लोगों की परीक्षा होती है, मेरी भी एक परीक्षा थी- दिसंबर 2012 के गुजरात चुनाव. जिस दिन चुनाव खत्म हुआ और मतदान हो गया, मैं आगे के काम निपटाने में जुट गया. मुझे आज भी याद है, मैं ग्लोबल समिट “वाइब्रेंट गुजरात” की तैयारियों का जायज़ा लेने और कृषि प्रोजेक्ट का मुआयना करने में व्यस्त हो गया. आपकी परीक्षा की उत्तरपुस्तिका की ही तरह मेरे लिए भी चुनाव एकतरफ़ा टिकट था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किताब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ का कवर
पीएम मोदी को सोने का वक़्त कैसे मिलता है
अपनी किताब में मोदी कहते हैं कि सफलता के लिए गहरी नींद बहुत ज़रूरी है. लेकिन एक प्रधानमंत्री को पर्याप्त नींद लेने का वक़्त कैसे मिल पाता है? मोदी कहते हैं, ‘कई बार लोगों ने मुझसे पूछा है- मोदीजी, आप काम के इतने दबाव के बावजूद और संभवतः इतनी कम नींद लेने के बावजूद दिन भर इतने ऊर्जावान कैसे रह पाते हैं? मैं कहता हूं कि मैं इसलिए तरोताज़ा रहता हूँ क्योंकि अच्छी नींद लेता हूँ. नींद की गुणवत्ता बहुत मायने रखती है. चाहे आप कितने भी घंटे क्यों न सो लें. अगर नींद गहरी नहीं है तो वह बेकार है. मेरी नींद का समय 4 से लेकर 6 घंटे तक होता है. यह काम की व्यस्तता पर निर्भर करता है. जो भी हो, मेरी नींदकाफ़ी गहरी होती है, जो मुझे अगले दिन के लिए फिर से तरोताज़ा कर देती है. दरअसल बिस्तर पर लेटने के कुछ ही सेकेंड के भीतर मैं गहरी नींद में होता हूँ और आंख खुलने के कुछ ही सेकेंड के भीतर उठ जाता हूँ. जब मैं सोने जाता हूँ तो सारी चिंताएं पीछे छोड़ देता हूँ और जब उठता हूँ तो एक नए दिन के लिए पूरी तरह तरोताज़ा और तैयार होता हूँ.
प्रकृति के साथ एकाकार हो
किताब के एक अध्याय में मोदी छात्रों से कहते हैं कि पढ़ाई के बीच एक नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना भी बहुत जरूरी है. वे बताते हैं कि उन्हें खुद प्रकृति से कितना लगाव है. वे कहते हैं, ‘जवानी के दिनों में मैं अपने गांव की एक झील में तैरने जाया करता था. मुझे खुले आसमान, ठंडे पानी और ताज़ी हवा से प्रेम था.
प्रकृति के साथ एकाकार होना बहुत ताज़गी और स्फूर्ति देने वाला अनुभव है.’
मीटिंग के दौरान “नो” फ़ोन
पीएम कहते हैं कि एक बार में एक ही काम पर ध्यान केंद्रित करना बहुत ज़रूरी है. वे लिखते हैं ‘‘मीटिंग के दौरान मैं मोबाइल फ़ोन या और कोई भी गैजेट का इस्तेमाल नहीं करता हूँ. यहां तक कि किसी व्यक्ति विशेष के साथ मुलाकात में भी मेरा पूरा समय और ध्यान उस बातचीत पर ही केंद्रित होता है. बाकी चीज़ें इंतज़ार कर सकती हैं.”
जब पीएम नेत्रहीन क्रिकेट टीम से मिले
पीएम मोदी चाहते हैं कि छात्र वॉरियर (योद्धा) बनें, न कि वरियर (चिंता में घुलने वाला). बतौर उदाहरण वे उस भारतीय क्रिकेट टीम के बारे में लिखते हैं, जिसने ब्लाइंड क्रिकेट टूर्नामेंट जीता. वे लिखते हैं, “मेरे जीवन की सबसे यादगार मुलाक़ातों में से एक उस इंडियन क्रिकेट टीम से मुलाकात थी, जिसने 2017 का ब्लाइंड टी-20 वर्ल्डकप जीता. उस टीम का हरेक खिलाड़ी अपने आप में एक प्रेरक योद्धा है. उनके जीवन में अनेक बाधाएं आईं, पर उन्होंने बड़े धैर्य से उनका मुकाबला किया. वे विपरीत परिस्थितियों और मुश्किलों के बावजूद मैदान में हिम्मत से लड़े. उन्होंने राष्ट्रको गौरव प्रदान किया. ठीक उसी तरह, जब परीक्षा का सामना हो तो वॉरियर बनो, वरियर नहीं.
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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/desh/beef-politics-bhartiya-janta-party-v-murlidharan-kerala-bjp-418926.html
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