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मानिए या मत मानिए लेकिन प्राचीन भारत में भी पकौड़ा तलने का उल्लेख मिलता है.चूंकि पकौड़े को संस्कृत में “पक्कवट” कहा जाता रहा है. लिहाजा तय है कि “पक्कवट” शब्द वेद या पुराणों में जरूर कहीं न कहीं होगा. पक्कवट शब्दों से मिलकर बना है.पकवा यानि पका हुआ और वटा यानि छोटा टुकड़ा.पकौड़ा को कुछ पकौरा कहते हैं..कुछ पकुरा..कुछ फकुरा..पकौड़ा वैसे तो मूलरूप से एकदम शाकाहारी है लेकिन जब मुगल आए. उन्होंने इसका स्वाद लिया तो ये उन्हें इतना भाया कि पकौड़ा शाही दश्तरखान में पहुंच गया. शाही बावर्चियों ने इस पर अपने प्रयोग किए. चिकन, मटन और अंडों का पकौड़ा तैयार किया. य़ानि मुगल बादशाहों की शाही रसोई ने इसे नानवेज व्यंजन भी बना दिया. इस्लामी असर ने इसका नाम पकौरा कर दिया. हालांकि द्रविड़ियन यानि तमिल उसे हमेशा पकौड़ा कहते आए हैं. बंगालियों ने इसे पकुरा या फकुरा क्यों कहा..ये समझ में नहीं आया..
कहीं भज्जी तो कहीं आलूगोंडा
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वैसे भारत में इसके और भी नाम दिए गए. आंध्र, महाराष्ट्र और कर्नाटक जाएंगे तो वहां जो खाने का सामान भज्जी के नाम से खाने को मिले तो समझ लीजिए ये पकौड़ा ही है. वैसे मध्य प्रदेश में आलू और बेसन के साथ विशेषतौर पर तलकर बेचे जाने वाले पकौड़े को आलूगोंडे के नाम से जाना जाता है. वैसे पकौड़ों की इतनी किस्में हैं कि आप चकरा जाएंगे. भारत के जिस हिस्से में निकल जाएंगे, वहां एक अलग तरह का पकौड़ा खाने को पाएंगे.
पकौड़ा, भारतीय व्यंजन
विशुद्ध स्वदेशी व्यंजन
ये विशुद्ध तौर पर भारत का आविष्कार है यानि सौ-फीसदी स्वदेशी. इसका अब तक पेटेंट क्यों नहीं हो पाया-ये एक बड़ा सवाल है. अगर अमेरिकी और इतालवी बर्गर और पिज्जा को अंतरराष्ट्रीय व्यंजन बना सकते हैं तो हम पकौड़ा को क्यों नहीं.

अंडा पकौड़ा, पकौड़ा
भारत से कई देशों में गया
पकौड़ा भारत से कई देशों में गया. दक्षिण एशिया और ब्रिटेन में इसका स्वाद सिर चढ़कर बोला.स्काटलैंड में तो ये खास तरह की ग्रेवी के साथ परोसा जाता है और कहा जाता पकौड़ा ग्रेवी. चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मलेशिया, नेपाल जैसे देशों में भी पकौड़े की महिमा न्यारी रही है, कहीं कहीं इसे भजिया भी कह देते हैं. सोमालिया में इसे भजिए ही कहा जाता है.
अंग्रेज जब भारत से गए तो पकौड़े को खासतौर पर साथ ले गए. पूरे ब्रिटेन भारतीय, बांग्लादेशी और पाकिस्तान पकौड़ा स्नैक्स के चेन रेस्टोरेंट चलाते हैं, खूब पैसा बनाते हैं. लोगों को रोजगार देते हैं. अब तक पकौड़े के सियासी मतलब भले नहीं रहे हों लेकिन अब तो राजनीति में भी ये व्यंजन खूब उछल रहा है.
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