READ MORE
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा कि ये महंगाई को बढ़ावा दे सकती है. उनका मानना था कि इससे व्यापक अर्थव्यवस्था के विस्तार की गति पर भी असर पड़ सकता है. नेटवर्क 18 को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘‘हमें देखना होगा कि कच्चे तेल की कीमतें किस हद तक बढ़ती हैं. आज कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गई हैं. ये हमारी सीमा से बाहर की बात है.’’जेटली ने आगे कहा, ‘‘मैं चाहता हूँ कि कच्चे तेल की कीमतें इस स्तर से नीचे रहें. चूंकि हम सीधे खरीदार हैं और अगर ये इस स्तर से ऊपर जाती हैं, तो इसका असर मुद्रास्फीति पर पड़ेगा. हमारी एक नजर मॉनसून पर और दूसरी कच्चे तेल की कीमतों पर हैं.’’
जेटली ने कहा कि अगर दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें अपनी सीमा में रहीं और इस साल मॉनसून की बारिश सामान्य रही तो भारत की विकास दर काफी तेज होगी. उन्होंने कहा, ‘‘इन स्थितियों (सामान्य मॉनसून और अपेक्षाकृत स्थिर कच्चे तेल की कीमतें) में हमारी उम्मीदें भी बढ़ सकती हैं.’’
मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने सोमवार को कहा था कि हर 10 डॉलर प्रति बैरल की तेल की कीमत में वृद्धि जीडीपी को करीब 0.2-0.3 फीसदी अंक तक कम कर देती है और करंट अकाउंट डेफ़ीशिट यानी सीएडी को करीब 9 से 10 अरब डॉलर तक बिगाड़ देती है. नवंबर के शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं, जो अब 70 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं.
आर्थिक सर्वे में 2018-19 में भारत की जीडीपी दर 7-7.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जो इस साल जीएसटी और नोटबंदी की वजह से आई बाधाओं के बावजूद अनुमानित 6.75 प्रतिशत से बढ़ सकती है.
ये भी पढ़ें
आम चुनाव के साथ राज्यों के चुनाव की संभावना नहीं- अरुण जेटली
बजट में जेटली ने रखा सभी का ध्यान, बनाया बेहतरीन संतुलन
Article source: http://feedproxy.google.com/~r/ndtvkhabar/~3/RIYpdQywDnw/story01.htm
No comments:
Post a Comment