Thursday, 27 September 2018

'एडल्टरी' पर आए SC के फैसले से कुछ पतियों को राहत, कुछ की मुश्किल बढ़ी


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एक शख्स पर उसकी पत्नी ने व्यभिचार (एडल्टरी) का मामला दर्ज कराया था. जिसके बाद पिछले दस सालों के दौरान वह अपने बच्चे का संरक्षण गंवा बैठा. दो जगह से नौकरी से निकाल दिया गया. इस मामले के चलते उसे भयंकर मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा. अब जाकर वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राहत महसूस कर रहा है.अशोक दीक्षित (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि यह आरोप सरासर गलत हैं और बस उत्पीड़न की बात ही सही है.


सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जब यह घोषणा की कि व्याभिचार अपराध नहीं है, तो पुणे के 32 वर्षीय आईटी पेशेवर ने कहा, “इस फैसले से मुझे राहत मिली है लेकिन मैं इतने साल तक जिस उत्पीड़न एवं पीड़ा से गुजरा, उसका क्या?” अशोक के कानूनी परामर्श पर चार लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं.


यह भी पढ़ें – क्या है संविधान की धारा 497, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बताया असंवैधानिककुमार रमेश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उनकी पत्नी ने उनके विरुद्ध व्याभिचार का मामला दर्ज कराया था.


दिल्ली के 35 वर्षीय रमेश (बदला हुआ नाम) ने कहा, “मैं खुश हूं कि आखिरकार एक निरपेक्ष निर्णय लिया गया लेकिन मैं इतने तनाव से गुजरा. काश यह फैसला पहले आता.”


चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की एक संविधान पीठ ने व्याभिचार के अपराध से जुड़ी आईपीसी की धारा 497 खारिज कर दी.


इस फैसले पर पतियों की मिश्रित प्रतिक्रिया आई है. कुछ ने इसे सशक्त करने वाला बताया तो कुछ ने कहा कि इससे जिंदगी दूभर हो जाएगी. दीक्षित और रमेश ने इसका स्वागत किया लेकिन कुछ ने कहा कि इससे उनकी सालों की मेहनत बर्बाद चली गई.


चैतन्य गौड़ा (बदला हुआ नाम) ने दावा किया कि उनकी बीवी का विवाहेत्तर संबंध था और वह उसके व उसके प्रेमी के खिलाफ पिछले आठ सालों से सबूत इकट्ठा कर रहे थे. लेकिन यह मामला, जो प्रेमी की पत्नी द्वारा दर्ज किया जाना था, अब अदालत द्वारा व्याभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से वैध नहीं रहा.


बेंगलुरु के 45 वर्षीय इन शख्स ने कहा कि उनकी पत्नी ने उन पर घरेलू हिंसा और दहेज मांगने का आरोप लगाया. उनके अनुसार कोर्ट का फैसला उन जैसे लोगों के लिए जिंदगी और दूभर बना देगा.


उन्होंने कहा, “पहले कम से कम प्रेमी की पत्नी अपने पति के विरुद्ध मामला दर्ज करा पाने की स्थिति में तो थी, लेकिन अब मेरी पत्नी और उसके प्रेमी को, जो करना चाहें, करने की आजादी मिल जाएगी.”


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Article source: http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-16185925.html

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