READ MORE
भारतीय रेलवे ने अपनी ट्रेनों को सही समय पर चलाने के लिए जीरो बेस्ट टाइम टेबल तैयार किया है. इसके साथ ही नॉर्दर्न रेलवे की 51 एक्सप्रेस और 36 पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई गई है. वहीं, ईस्ट कोस्ट रेलवे में 37 एक्सप्रेस ट्रेन और 19 लोकल ट्रेनों की स्पीड पर काम हो रहा है.जीरो बेस्ड यानी शून्य आधारित समय सारिणी का मतलब है कि रेलवे ट्रैक पर कोई ट्रेन न हो और एक-एक कर सभी ट्रेनों को नए सिरे से समय दिया जाए. भारतीय रेल अपनी 13000 यात्री ट्रेनों और 8000 मालगाड़ियों के लिए नए सिरे से समय सारिणी बनाने में जुटा था. यह एक नवंबर से लागू होने वाला है.
हालांकि, चुनाव आयोग ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में नई ट्रेनों के ऐलान और उनके टाइम टेबल को जारी करने पर रोक लगा दी है.
जीरो बेस्ड टाइम टेबल में समान गति और समान दिशा की ओर जा रही ट्रेनों को एक के बाद एक समय दिया जाता है ताकि कम समय अंदर ऐसी सभी ट्रेनों को रवाना कर दिया जाए. इस तरह से ट्रेनों को समय देने से सैद्धांतिक तौर पर रेल ट्रैक को अलग-अलग सेक्शन में कुछ समय के लिए खाली रखा जा सकता है और मेंटेनेंस के काम के लिए ब्लॉक दिया जा सकता है. इस तरह की समय सारिणी बनाने में मुसाफिरों की सहुलियत का भी खास ध्यान रखा जाता है. यानी की लंबी दूरी की ट्रेनें रात को चलाई जाएं और वो सुबह मंजिल तक पहुंच जाए.रेलवे के साथ एक और बड़ी समस्या रेलवे की पटरियों पर क्षमता से ज्यादा ट्रेनें चलने का है. खासकर नॉर्थ सेट्रल रेलवे, नॉर्थ इस्टर्न रेलवे और ईस्ट सेंट्रल रेलवे में क्षमता से करीब 40 फ़ीसद ज़्यादा ट्रेनें चलती हैं. ऐसे में ट्रेनों का लेट होना बहुत ही स्वाभाविक है. दूसरी तरफ किसी चलती हुई ट्रेन के किसी भी वजह से लेट होने से पीछे की सारी ट्रेनें लेट हो जाती हैं और समय सारिणी धरी की धरी रह जाती हैं. फिर भी रेलवे तमाम चुनौतियों के बाद भी जिस प्रयास में लगा है उससे 1 नवंबर से सैंकड़ों ट्रेनों के समय में बदलाव होने जा रहा है.
Article source: https://hi.gadgets360.com/mobiles/samsung-galaxy-a7-2018-benchmark-listing-reveals-6gb-ram-android-7-1-nougat-7-2018-6-7-1-news-1767829
No comments:
Post a Comment