Monday, 30 October 2017

मजदूर की बेटी की मदद को आगे आया कोर्ट, अस्पताल को इलाज का आदेश


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दिल्ली उच्च न्यायालय सोमवार को दिल की बीमारी से जूझ रही एक दिहाड़ी मजदूर की 11 वर्षीय बेटी की मदद के लिए आगे आया. उसने जीबी पंत अस्पताल को निर्देश दिया कि वो उसका इलाज करे. अस्पताल उसके परिजनों पर इलाज से पहले रकम जमा कराने पर ज़ोर दे रहा था.न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कहा कि दिल्ली सरकार ये जांच कर सकती है कि लड़की मुफ्त इलाज पाने की हकदार है या नहीं और अगर वो इसके अयोग्य पायी जाती है तो इलाज पर खर्च हुई रकम अस्पताल बाद में लड़की के पिता से वसूल सकता है.


अदालत ने ये स्पष्ट किया कि उसकी मुफ्त इलाज की योग्‍यता की जांच लंबित रहने के दौरान उसे अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए और उसका ज़रूरी इलाज नहीं रोका जाना चाहिए.


इस निर्देश के साथ ही अदालत ने लड़की के पिता की ओर से दायर वो याचिका निस्तारित कर दी जिसमें उसने दावा किया था कि वो जी बी पंत अस्पताल की ओर से अपनी बेटी को भर्ती किए जाने के लिए मांगी जा रही 50,000 रुपए की रकम जमा करने में असमर्थ है.

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