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सरदार वल्लभ भाई पटेल अनुशासन और सख्त प्रशासन के लिए तो जाने ही जाते थे लेकिन कभी कभी वह इन सबसे परे जाकर भी काम करते थे. उन्होंने जवाहर लाल नेहरू सरकार में वित्त मंत्री जॉन मथाई के एक बेटे न केवल जेल से निकलवाया बल्कि सजा से भी बचा लिया.मामला ये हुआ था कि जान मथाई का एक बेटा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ता था. उसने अपनी कार किसी सड़क पर चलते आम आदमी पर चढ़ा दी और तुरंत उसकी मौत हो गई. इससे मंत्री का बेटा मुश्किल में फंस गया.
नेहरू ने नहीं की मदद
इलाहाबाद पुलिस ने तुरंत केंद्रीय वित्तमंत्री के बेटे को गिरफ्तार कर लिया. हिरासत में डाल दिया गया. उसे कोर्ट में पेश किया जाने वाला था, जिसके बाद उसका बचना मुश्किल लग रहा था. एमओ मथाई ने अपनी किताब “रेमनिसन्सिज़ ऑफ नेहरू एज” में इस घटना के बारे में लिखा है.उन्होंने वल्लभ भाई पटेल संबंधी इस चैप्टर में लिखा है, घबराए हुए जॉन मथाई मदद की उम्मीद में सीधे प्रधानमंत्री नेहरू के पास पहुंचे. हालांकि वह गलत शख्स के पास पहुंचे थे. क्योंकि नेहरू कभी न्याय के मामले में दखल नहीं देते थे. हां उन्होंने अपनी सहानुभूति जरूर जाहिर की. मथाई बहुत आहत हुए. उन्हें ये महसूस हुआ कि पीएम ने उनकी मदद नहीं की.

पटेल ने यूपी के सीएम को फोन घुमाया
किताब में आगे लिखा है, जॉन मथाई इसके बाद तुरंत पटेल के पास भागे, जो चाहते थे कि मथाई को कृतार्थ कर सकें. पटेल ने तुरंत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत को फोन घुमाया. उनसे उस लड़के तुरंत रिहाकर पुलिस सुरक्षा में दिल्ली उनके घर पर पहुंचाने के लिए कहा.
लड़के को चुपचाप विदेश भेज दिया गया
अगले दिन लड़के को पटेल के घर पहुंचा दिया गया. अब पटेल ने जान मथाई को फोन करके कहा, ‘मेरे पास तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है.’ फिर जब वह पहुंचे तो लड़के को उनके सुपुर्द कर दिया. लेकिन इस हिदायत के साथ कि उसे वो बिना समय गंवाए तुरंत देश के बाहर भेज दें.
लड़के को चुपचाप पिता ने पढ़ाई के लिए बाहर भेज दिया. इसके बाद उस केस के बारे में किसी ने नहीं सुना. ये भी पटेल के प्रशासन का एक नमूना था.
Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/nid-ahmedabad-student-chakradhar-aalla-made-bullet-train-logo-on-31st-attempt-1150783.html
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