Monday, 30 October 2017

क्या वाकई राजनीति का शिकार हुए हैं इरफ़ान पठान?


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बड़ौदा क्रिकेट संघ (बीसीए) का एक नवंबर को त्रिपुरा के खिलाफ खेले जाने वाले मुकाबले के लिए एक चौंकाने वाला निर्णय सामने आया है. जिसमें पहले दो रणजी मैचों में बड़ौदा टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले दिग्गज खिलाड़ी इरफान पठान को शामिल नहीं किया गया है.दिग्गज खिलाड़ी इरफान पठान की जगह रणजी ट्रॉफी में बड़ौदा टीम की कप्तानी दीपक हुड्डा को सौंपी जा रही है. बड़ौदा क्रिकेट संघ (बीसीए) के सचिव स्नेहल पारिख ने बताया, ‘हम हुड्डा को कप्तान बना रहे हैं और केदार देवधर टीम के उप-कप्तान होंगे.’


हालांकि इसके बचाव में पारिख ने कहा है कि 33 वर्षीय अनुभवी खिलाड़ी पठान को टीम में इसलिए शामिल नहीं किया गया ताकि अन्य युवा खिलाड़ियों को मौका मिल सके.


पारिख ने कहा, ‘पठान ने पहले दो मैच खेले हैं. हमें अपनी प्रणाली का पालन भी करना होगा. हमने इस प्रणाली को युवा टीम के निर्माण के लिए बनाया है. इस कारण, हमें युवा खिलाड़ियों को भी मौका देना होगा.’पिछले कुछ सालों से संघर्ष में चल रहे इरफ़ान पठान जहां 5 साल के लिए भारतीय टीम से बाहर किए गए थे, वहीं 2017 की आईपीएल नीलामी में भी नज़रअंदाज़ किए गए. शायद ये अभी उनके करियर का बुरा दौर नहीं था क्योंकि एक स्टार ऑलराउंडर को अपने घरेलू एसोसिएशन द्वारा इस तरह चौकाने वाला निर्णय मिलना बेहद बुरा है.


पूर्व भारतीय खिलाड़ी किरण मोरे कहते हैं, ‘ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, मैं कुछ नहीं कहना चाहता. मैं बड़ौदा क्रिकेट में शामिल नहीं हूं लेकिन यह बहुत दुख की बात है.’


2007 टी 20 वर्ल्ड कप फाइनल चैंपियन टीम के मैन ऑफ द मैच, पठान का कहना है कि वह इसे आसान रूप से नहीं ले रहे हैं.  उन्होंने कहा, ‘मैं एक योद्धा हूं, मुझे अपना रास्ता मिल जाएगा. यह जीवन है और यह क्रिकेट है.’


उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा कि अगर आप अपने बॉस को गुड मॉर्निंग नहीं बोलते हो या फिर उनके चापलूस नहीं हैं तो घबराइए मत, बस अपना काम करते जाइये. क्योंकि काम को सच्चे मन से करना ही कोशिश कहलाती है.




एक समय टीम इंडिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक रहे इरफान पठान, पिछले पांच सालों से टीम में अपनी जगह नहीं बना सके हैं. वह टीम इंडिया की ओर से आखिरी बार टी20 मैच साल 2012 में खेलते नजर आए थे. उसके बाद से वह टीम में वापसी करने में सफल नहीं रहे हैं. हालात यह है कि घरेलू क्रिकेट में भी खराब प्रदर्शन उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है.


शायद यही कारण है कि कप्तानी उनसे छिन गई है, हालांकि पठान ने अभी भी टीम इंडिया में वापसी को लेकर अपनी हिम्मत नहीं हारी है.


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