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आधुनिक ओडिशा के निर्माता के रूप में प्रसिद्ध बिजयानंद पटनायक यानी बीजू पटनायक ओडिशा के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे हैं. बीजू पटनायक एक लोकप्रिय राजनेता के अलावा एयरनोटिकल इंजीनियर, नेविगेटर, उद्योगपति, स्वतंत्रता सेनानी और पायलट भी थे, लेकिन उनके बारे में एक और तथ्य है, जिसके बारे में लोगों को शायद कम ही पता है.
आजादी के चंद दिनों बाद जब पाकिस्तान की सेना ने कश्मीर पर कब्जे की नियत से कबाइली भेष में अपने सैनिकों को भेजा तो उस जंग में बीजू पटनायक ने अपनी अहम भूमिका निभाई थी.
बीजू एक कॉमर्शियल पायलट थे, लेकिन देश की रक्षा के लिए अपने जान की परवाह न करते हुए पहली बार भारतीय सैनिकों को लेकर 27 अक्टूबर 1947 को जहाज लेकर कश्मीर पहुंचे.
बीजू का जहाज लेकर श्रीनगर जाना भारत के लिए बड़ा गेम चेंजर रहा और इस वजह से पाक अपने नापाक इरादे में कामयाब नहीं हो पाया. इतिहास गवाह है कि बीजू बाबू ने न सिर्फ सैनिकों को श्रीनगर तक पहुंचाया बल्कि युद्ध के दौरान कश्मीर के खतरनाक हालात में सैनिकों को रसद पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उन्ही के टीम के पास थी.
यही कारण था कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बीजू बाबू की साहस को हमेशा सलाम करते थे. कलिंग के नाम से खुद की एयरलाइंस चलाने वाले बीजू पटनायक बाद में राजनीति में आए और देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक ओडिशा के मुख्यमंत्री बनके उसे एक अलग पहचान दी.
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