Tuesday, 31 October 2017

VIDEO: आखिर इंदिरा को क्यों याद किया जाए?


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भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज 33वीं पुण्यतिथि है. इसी दिन 31 अक्टूबर 1984 को उनकी हत्या कर दी गई थी. इंदिरा को भारतीय राजनीति के इतिहास में एक बेहद मजबूत पीएम के रूप में याद किया जाता है.इंदिरा उन नेताओं में शुमार हैं जिनके फैसलों ने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और दुनिया में देश की साख को मजबूत बनाया. ये हैं वो फैसले जिनके लिए इंदिरा को याद किया जाना चाहिए..


बैंकों का राष्ट्रीयकरण


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1969 में इंदिरा ने देश के 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया. उस जमाने में कांग्रेस पार्टी में दो गुट हुआ करते थे जिन्हें सिंडिकेट और इंडीकेट के नाम से जाना जाता था. कांग्रेस का इंदिरा विरोधी गुट ‘सिंडिकेट’ इसके खिलाफ था लेकिन फिर भी वो पीछे नहीं हटी.असल में उस वक़्त देश के ज्यादातर बड़े बैंकों की कमान प्राइवेट सेक्टर के हाथों में थी. इंदिरा के इस फैसले की बदौलत देश के गरीब तबके को भी बैंक क्रेडिट देने लगे.प्रिवीपर्स ख़त्म करना
आज़ादी के समय भारत में 562 रजवाड़े थे. आज़ादी के वक़्त हुए समझौतों के मुताबिक भारत सरकार इन्हें जो राजभत्ता देती थी उसे प्रिवीपर्स कहते थे. इंदिरा ने 1971 में इसे ‘अलोकतांत्रिक’ करार देते हुए ख़तम कर दिया. इसका काफी विरोध भी हुआ लेकिन इंदिरा ने फैसला नहीं बदला.


बांग्लादेश की आज़ादी
इंदिरा ने आक्रामक विदेश नीति को अपनाया जिससे दुनिया के बाकी देशों में भारत की छवि में सुधार हुआ. इंदिरा ने ही आगे बढ़कर 1971 में पकिस्तान के गृह युद्ध में हस्तक्षेप किया और पाकिस्‍तानी आर्मी नरसंहार का विरोध करते हुए बांग्लादेश को आज़ाद कराया. इसके लिए इंदिरा ने 10 लाख बांग्लादेशियों को असम में शरण दी और भारतीय सेना ने मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर पाकिस्तान को सबक सिखाया.


पोखरण परमाणु परीक्षण
मई 1974 में उन्होंने पोकरण में पहली बार परमाणु परीक्षण कराया और दुनिया की नाराजगी भी झेली. लेकिन इसके बाद भारत परमाणु संपन्न राष्ट्र की श्रेणी में शामिल हुआ. भारत का कद ऊंचा कराया था. इस समय देश में जेपी की अगुवाई में छात्र आंदोलन चल रहा था. इसके बावजूद इंदिरा ने परमाणु परीक्षण का कार्यक्रम टाला नहीं. इतना ही नहीं, सफल परमाणु परीक्षण के तुरंत बाद (1975 में) होमी सेठना, राजा रमन्ना और बसंती नागचौधरी को पद्म विभूषण से सम्मानित कराया.


इमरजेंसी
इंदिरा के इस फैसले को उनकी सबसे बड़ी भूल माना जाता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के इंदिरा की सीट पर चुनावों में धांधली से जुड़े एक फैसले के बाद 25 जून 1975 को संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर दी गई. इसके तहत चुनाव स्थगित कर प्रेस की आज़ादी भी सस्पेंड कर दी गई. डेढ़ साल बाद इमरजेंसी तो हट गई लेकिन इसके बाद चुनावों में इंदिरा बुरी तरह हार गईं. इंदिरा रायबरेली की अपनी सीट से भी चुनाव हार गईं.


ऑपरेशन ब्लू स्टार
पंजाब में अलगाववादी आंदोलन ने अपनी जड़ें जमा ली थीं. खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाला और उसके सपोर्टर हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) में छुप गए. इंदिरा ने सेना की मदद से स्वर्ण मंदिर को खाली करवाया. ऑपरेशन ब्लू स्टार के का बदला लेने के लिए ही इंदिरा की हत्या कर दी गई.


इंदिरा के आखिरी शब्द थे…
‘मैं आज जिन्दा हूं, हो सकता है कल न रहूं- जब तक मैं जिन्दा हूं अपनी अंतिम सांस तक इस देश की सेवा करती रहूंगी, मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को शक्ति प्रदान करेगा और मजबूत बनाएगा.’


Article source: https://hindi.news18.com/videos/hum-to-puchenge-46-1142854.html

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