Tuesday, 31 October 2017

क्या हम चीन के उत्पादों का विरोध कर पाएंगे?


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चीन से जब भी तनातनी बढ़ती है, देश में उसके उत्‍पादों को लेकर विरोध बढ़ने लगता है. चीनी सामान को बैन तक करने की मांग होने लगती है. राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ की संस्‍था स्‍वदेशी जागरण मंच ने चीन के उत्‍पादों का बहिष्‍कार करने का बीड़ा उठाया हुआ है. बाबा रामदेव भी मल्‍टीनेशनल कंपनियों की वस्तुओं का बहिष्कार करके सिर्फ अपने बनाए उत्‍पादों के इस्‍तेमाल की वकालत कर रहे हैं.पीएम नरेंद्र मोदी ने  शियामेन (चीन) में आयोजित ब्रिक्स देशों के वार्षिक शिखर सम्मेलन  में वहां के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर संबंध सुधारने की कोशिश शुरू की, क्‍योंकि डोकलाम विवाद से दोनों देशों के बीच तल्‍खी बढ़ गई थी. जबकि आरएसएस से जुड़ा स्वदेशी जागरण मंच चीन के उत्‍पादों का बहिष्‍कार कर रहा है.


रामलीला मैदान में रविवार को मंच ने स्वदेशी महारैली का आयोजन किया. इसमें ‘स्वदेशी स्वीकार और चाइनीज बहिष्कार’ का नारा दिया गया. संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि “चीनी माल के बहिष्कार और स्वदेशी के स्वीकार की शपथ लेनी होगी.” मंच के इंटेलेक्चुअल विंग के सह संयोजक सतीश कुमार के मुताबिक “चीन करीब 5 हजार आइटम भारत में भेज रहा है. चीन के इकोनॉमिक अग्रेशन के खिलाफ दुनिया भर के विकासशील देशों को खड़ा होना चाहिए.”


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इंडो-चाइना इकोनॉमिक कल्‍चरल काउंसिल के प्रेसीडेंट इरफान से हमने इसका जवाब तलाशा. उनके मुताबिक ‘हम चीन के उत्‍पादों का विरोध तब तक नहीं कर सकते जब तक कि अपने घरेलू मार्केट की डिमांड लोगों की परचेजिंग पावर के मुताबिक पूरी करने की हालत में नहीं हो जाते.’


Former US diplomat Nisha Desai Biswal said China should understand power of India - चीन को मान लेना चाहिए भारत एक बड़ी ताकत: पूर्व अमेरिकी राजनयिक       चीन के राष्ट्रपति से मिलते प्रधानमंत्री मोदी (Photo:PTI)


इरफान के मुताबिक ‘कोई सामान हमें बनाने की जगह आयात करना सस्‍ता पड़ता है तो उसका आयात ही होगा. चीन के उत्‍पादों का विरोध तो हम कर देंगे लेकिन क्‍या हम अपने घरेलू मार्केट की मांग पूरी करने की हालत में हैं?’.


हालांकि इरफान यह मानते हैं कि


‘लंबे समय के लिए चीन से आयात ठीक नहीं है. इसके लिए हमें उनसे टेक्‍नोलॉजी लेनी चाहिए. उनका अनुभव बांटना चाहिए. चीन के साथ भारत में ज्‍वाइंट वेंचर लगाना चाहिए. इससे हमें उनसे कम कीमत में उत्‍पाद पैदा करने की समझ मिलेगी’.


इंटीग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ माइक्रो स्‍माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज ऑफ इंडिया के चेयरमैन राजीव चावला कहते हैं कि ‘दोनों देश आपस में इतने उत्‍पादों का आयात-निर्यात करते हैं कि कोई भी उनका विरोध करने की हालत में नहीं है’.


गौर करने वाली बात यह है कि टशन के बीच भारत से चीन में निर्यात पिछले एक वित्‍त वर्ष में करीब 13 फीसदी बढ़ गया है. वाणिज्‍य मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में हमने चीन को 9.01 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया, जो बढ़कर 2016-17 में 10.19 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया. भारतीय उत्‍पादों की चीन में मांग बढ़ रही है.


Swadeshi Jagaran Manch, china, india         चीन के उत्पादों के खिलाफ स्वदेशी जागरण मंच का प्रदर्शन


फिर भी भारत, चीन से आयात के मुकाबले काफी कम निर्यात करता है. हम अपने निर्यात से कम से कम छह गुना आयात करते हैं. 2016-17 में भारत ने चीन से 61.28 बिलियन अमेरिकी डॉलर के उत्‍पादों का आयात किया.


विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 16 अरब डॉलर के तो हम इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स प्रोडक्ट ही चीन से मंगाते हैं. ये चीजें हमारे दैनिक जीवन का हिस्‍सा हैं. हम जिस मोबाइल पर चीन के उत्‍पादों के विरोध की मुहिम चला रहे होते हैं, उसमें से ज्‍यादातर चीन में ही बने होते हैं.


हालांकि, स्‍वदेशी जागरण मंच के राष्‍ट्रीय संयोजक अरुण ओझा कहते हैं कि ‘मंच सभी विदेशी कंपनियों के उत्‍पादों का विरोध करता है. लेकिन फोकस चीन पर है. इसके लिए हम राष्‍ट्रीय स्‍वदेशी सुरक्षा अभियान चला रहे हैं. उम्‍मीद है कि इस काम में हमें सफलता मिलेगी’.


india-china trade relations      विरोध के बावजूद चाइना बाजार एक सच्चाई है


चीन से ये मुख्य सामान आयात करते हैं हम
भारत चीन से जो चीजें आयात करता है उनमें मोबाइल, टीवी, चार्जर, मेमोरी कार्ड और म्‍यूजिक उपकरण सबसे अहम हैं. इसके अलावा बर्तन, ऑटो एसेसरीज, बिल्‍डिंग मैटीरियल, सेनेटरी आइटम, किचन आइटम, टाइल्‍स, मशीनें, इंजन, पंप, केमिकल, फर्टिलाइजर, आयरन एवं स्‍टील, प्‍लास्टिक, बोट और मेडिकल इक्‍यूपमेंट शामिल हैं.


Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/anupam-kher-on-national-anthem-inside-cinema-hall-1150728.html

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